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आरबीआई गवर्नर ने मर्चेंट डिस्काउंट रेट पर दी नई जानकारी

भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने मर्चेंट डिस्काउंट रेट (एमडीआर) पर अपने विचार साझा किए हैं। उन्होंने कहा कि इस पर कोई ठोस निर्णय लेने से पहले 'इंतजार करें और देखें' की नीति अपनाना उचित होगा। डिजिटल भुगतान अवसंरचना में निवेश की आवश्यकता पर जोर देते हुए, उन्होंने बताया कि इसकी लागत किसी न किसी को उठानी होगी। जानें इस विषय पर और क्या कहा गया है और भविष्य में एमडीआर के संभावित प्रभावों के बारे में क्या जानकारियाँ सामने आई हैं।
 

मर्चेंट डिस्काउंट रेट पर आरबीआई का रुख

भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने बुधवार को कहा कि मर्चेंट डिस्काउंट रेट (एमडीआर) के बारे में अभी कोई ठोस टिप्पणी करना जल्दबाजी होगी। उन्होंने सुझाव दिया कि वर्तमान में 'इंतजार करें और देखें' की नीति अपनाना उचित रहेगा। यह बयान डिजिटल भुगतान से संबंधित कानूनों में प्रस्तावित संशोधनों के संदर्भ में आया है।


एमडीआर का महत्व

मर्चेंट डिस्काउंट रेट वह शुल्क है जो व्यापारी से डिजिटल भुगतान प्रक्रिया के लिए बैंक या भुगतान सेवा प्रदाता द्वारा लिया जाता है। मौद्रिक नीति समीक्षा के बाद संवाददाताओं से बात करते हुए, मल्होत्रा ने कहा कि डिजिटल भुगतान के बुनियादी ढांचे में निवेश आवश्यक है और इसकी लागत किसी न किसी को उठानी पड़ेगी।


लागत उठाने के विकल्प

इस संदर्भ में दो विकल्प मौजूद हैं। पहला, आम जनता करों के माध्यम से इस लागत को वहन करे। दूसरा, उपयोगकर्ता भुगतान मॉडल (यूजर पे) के तहत एमडीआर लागू किया जाए।


डिजिटल भुगतान अवसंरचना पर ध्यान

मल्होत्रा ने कहा, 'सरकार डिजिटल भुगतान से जुड़े कानूनों में संशोधन कर रही है। हमारा ध्यान इस सार्वजनिक अवसंरचना को और मजबूत और अधिक दक्ष बनाने पर है।' देश में एमडीआर का मुद्दा लंबे समय से चर्चा का विषय बना हुआ है।


बैंक और भुगतान उद्योग की मांग

बैंक और भुगतान उद्योग से जुड़े अन्य पक्ष एमडीआर को लागू करने की मांग कर रहे हैं, जबकि सरकार ने इस पर अभी तक कोई निर्णय नहीं लिया है। यूपीआई (यूनिफाइड पेमेंट इंटरफेस) जैसे डिजिटल भुगतान प्लेटफार्मों का उपयोग तेजी से बढ़ रहा है। कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि भविष्य में व्यापारी और ग्राहक के बीच एक निश्चित सीमा से अधिक मूल्य के यूपीआई लेनदेन पर एमडीआर लागू किया जा सकता है।


डिजिटल भुगतान की लागत

आरबीआई गवर्नर ने कहा कि डिजिटल भुगतान सेवा की लागत किसी न किसी को वहन करनी होगी। 'यूजर पे' सिद्धांत के तहत लेनदेन करने वाले व्यापारी या उपयोगकर्ता से एमडीआर के रूप में शुल्क लिया जाता है। यदि एमडीआर नहीं भी लगाया जाता है, तो भी इस व्यवस्था की लागत अंततः आम जनता द्वारा करों के माध्यम से उठाई जाती है।


डिजिटल मुद्रा का उपयोग

मल्होत्रा ने कहा, 'हमें डिजिटल भुगतान अवसंरचना में निवेश जारी रखना है और इसके लिए साधन तलाशने होंगे।' आरबीआई के डिप्टी-गवर्नर रोहित जैन ने बताया कि केंद्रीय बैंक की डिजिटल मुद्रा (ई-रुपया) का उपयोग बढ़ रहा है और आरबीआई बैंकों को इसके नए उपयोग विकसित करने के लिए प्रोत्साहित कर रहा है।


ऋण प्रक्रिया में सुधार

जैन ने कहा कि एकीकृत ऋण इंटरफेस (यूएलआई) मंच के उपयोग को भी बढ़ावा दिया जा रहा है, जिसका उद्देश्य कर्ज मंजूरी और वितरण की प्रक्रिया को तेज करना है। वर्तमान में 12 राज्यों ने अपने भूमि अभिलेखों का डिजिटलीकरण कर लिया है, जो यूएलआई मंच की सफलता के लिए आवश्यक है।