☰
×

आरबीआई ने ब्याज दर में वृद्धि की, आर्थिक विकास का अनुमान बढ़ाया

भारतीय रिजर्व बैंक ने वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच ब्याज दर को 0.25 प्रतिशत बढ़ाकर 5.5 प्रतिशत कर दिया है। इसके साथ ही, आर्थिक विकास का अनुमान 7.1 प्रतिशत और मुद्रास्फीति का अनुमान 5.1 प्रतिशत किया गया है। यह निर्णय मौद्रिक नीति समिति की बैठक में लिया गया, जो फरवरी 2023 के बाद पहली बार है। जानें इस निर्णय का बाजार पर क्या प्रभाव पड़ेगा और भविष्य में क्या संभावनाएँ हैं।
 

आरबीआई की नई नीतिगत दर

मुंबई, 7 अक्टूबर: भारतीय रिजर्व बैंक ने बुधवार को वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं के बीच प्रमुख नीतिगत ब्याज दर, जिसे रेपो कहा जाता है, को 0.25 प्रतिशत बढ़ाकर 5.5 प्रतिशत कर दिया। यह निर्णय लगभग तीन साल बाद लिया गया है। मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) ने अपने रुख को ‘तटस्थ’ से बदलकर ‘जरूरत के अनुसार सख्त’ करने का निर्णय लिया है, जिसका अर्थ है कि आरबीआई भविष्य में परिस्थितियों के अनुसार नीतिगत दर में और वृद्धि कर सकता है।


आर्थिक वृद्धि और मुद्रास्फीति के अनुमान

इस वर्ष के लिए आर्थिक वृद्धि का अनुमान 7.1 प्रतिशत कर दिया गया है, जो पहले 6.7 प्रतिशत था। वहीं, मुद्रास्फीति का अनुमान 5 प्रतिशत से बढ़ाकर 5.1 प्रतिशत किया गया है। आरबीआई के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने बताया कि मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए, एमपीसी ने आम सहमति से रेपो दर में वृद्धि का निर्णय लिया। यह फरवरी 2023 के बाद पहली बार है जब नीतिगत दर में वृद्धि की गई है।


भविष्य की संभावनाएँ

पिछले साल फरवरी से दिसंबर 2025 तक रेपो दर में कुल 1.25 प्रतिशत की कटौती की गई थी। इस साल फरवरी, अप्रैल, जून और अगस्त में नीतिगत दर में कोई बदलाव नहीं किया गया था। गवर्नर ने यह भी संकेत दिया कि आगे नीतिगत दरों में कटौती की संभावना नहीं है।


रेपो दर का प्रभाव

रेपो वह ब्याज दर है, जिस पर वाणिज्यिक बैंक अपनी तात्कालिक जरूरतों के लिए केंद्रीय बैंक से कर्ज लेते हैं। आरबीआई द्वारा रेपो दर बढ़ाने से आवास, वाहन और वाणिज्यिक कर्ज की मासिक किस्तों में वृद्धि हो सकती है।