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आरबीआई ने रेपो दर में वृद्धि की, महंगाई पर काबू पाने की कोशिश

भारतीय रिजर्व बैंक ने बुधवार को रेपो दर को 0.25 प्रतिशत बढ़ाकर 5.50 प्रतिशत कर दिया, जो चार साल में पहली बार है। इस निर्णय का उद्देश्य महंगाई पर काबू पाना और आर्थिक स्थिरता बनाए रखना है। केंद्रीय बैंक ने भविष्य में और दर बढ़ाने के संकेत दिए हैं, जिससे आवास और वाहन जैसे कर्ज महंगे होंगे। जानें इस निर्णय के पीछे के कारण और इसके संभावित प्रभावों के बारे में।
 

आरबीआई की नई नीतिगत दर

मुंबई, 7 अक्टूबर: भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने बुधवार को प्रमुख नीतिगत ब्याज दर, जिसे रेपो दर कहा जाता है, को 0.25 प्रतिशत बढ़ाकर 5.50 प्रतिशत कर दिया। यह चार साल में पहली बार है जब रेपो दर में वृद्धि की गई है। केंद्रीय बैंक ने महंगाई में वृद्धि और रुपये की विनिमय दर में गिरावट के चलते अपने नीतिगत रुख को बदलते हुए भविष्य में और दर बढ़ाने के संकेत दिए हैं.


रेपो दर का प्रभाव

रेपो दर वह दर है जिस पर वाणिज्यिक बैंक अपनी तात्कालिक जरूरतों के लिए आरबीआई से कर्ज लेते हैं। इस दर में वृद्धि से आवास, वाहन और अन्य प्रकार के कर्ज महंगे हो जाएंगे, जिससे मौजूदा कर्जदारों की मासिक किस्तें भी बढ़ सकती हैं.


नीतिगत दर में बदलाव

छह सदस्यीय मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) ने सर्वसम्मति से रेपो दर बढ़ाने का निर्णय लिया। यह संजय मल्होत्रा के गवर्नर बनने के बाद पहली बार है जब नीतिगत दर में वृद्धि की गई है। हालांकि, यह निर्णय अपेक्षित था, लेकिन केंद्रीय बैंक का नीतिगत रुख को तटस्थ से 'सूझ-बूझ के साथ सख्त' करने का निर्णय कुछ हद तक चौंकाने वाला है.


महंगाई की स्थिति

इस निर्णय के बाद, निकट भविष्य में दर में कटौती की संभावना लगभग समाप्त हो गई है। मल्होत्रा ने कहा कि नीतिगत दर में कटौती का विकल्प निकट अवधि में नहीं है और आगे की नीतिगत कार्रवाई केवल दर बढ़ाने या यथास्थिति बनाए रखने तक सीमित रह सकती है. उन्होंने यह भी बताया कि मौद्रिक सख्ती का समय और सीमा महंगाई और आर्थिक वृद्धि की स्थिति पर निर्भर करेगी.


महंगाई के कारण

फरवरी 2023 के बाद यह पहली बार है जब नीतिगत दर में वृद्धि की गई है। पिछले साल फरवरी से दिसंबर 2025 तक रेपो दर में कुल 1.25 प्रतिशत की कटौती की गई थी. इस साल की मौद्रिक नीति समीक्षाओं में नीतिगत दर में कोई बदलाव नहीं किया गया था.


आर्थिक वृद्धि का अनुमान

आरबीआई ने वित्त वर्ष 2026-27 में खुदरा महंगाई का औसत 5.2 प्रतिशत रहने का अनुमान जताया है। मल्होत्रा ने कहा कि महंगाई के व्यापक होने के शुरुआती संकेत भी मिले हैं. उन्होंने मुख्य महंगाई में वृद्धि और उपभोक्ता मूल्य सूचकांक में शामिल वस्तुओं की कीमतों में बढ़ोतरी का उल्लेख किया.


भविष्य की मौद्रिक नीति

मौद्रिक नीति समिति की अगली बैठक 2 से 4 दिसंबर को होगी. इस बैठक में आगे की नीतिगत कार्रवाई पर चर्चा की जाएगी.