आरबीआई ने रेपो रेट को स्थिर रखा, आम आदमी को मिली राहत
महंगाई के मोर्चे पर राहत
मुंबई: भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने देश में महंगाई के खिलाफ आम जनता को एक महत्वपूर्ण राहत प्रदान की है। यदि आप होम लोन, कार लोन या व्यक्तिगत लोन की ईएमआई चुका रहे हैं, तो यह खबर आपके लिए बहुत सुखद हो सकती है। वैश्विक बाजार में चल रही उथल-पुथल और मध्य पूर्व में तनाव के बीच, आरबीआई ने करोड़ों ग्राहकों के हित में एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया है, जिससे आपकी ईएमआई पर कोई अतिरिक्त बोझ नहीं पड़ेगा।
रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं
आरबीआई के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने वित्त वर्ष 2027 की तीसरी द्विमासिक मौद्रिक नीति समीक्षा (MPC) के परिणामों की घोषणा करते हुए बताया कि रेपो रेट को 5.25 प्रतिशत पर बनाए रखा गया है। यह लगातार पांचवां मौका है जब केंद्रीय बैंक ने प्रमुख नीतिगत दरों में कोई परिवर्तन नहीं किया है। आरबीआई का मुख्य ध्यान आर्थिक विकास को बढ़ावा देने और महंगाई पर नियंत्रण रखने पर है। इस निर्णय का सीधा लाभ उन करोड़ों ग्राहकों को होगा जो हर महीने बैंक को किस्त चुकाते हैं, क्योंकि उनकी ईएमआई में कोई वृद्धि नहीं होगी।
पिछली बार दरों में बदलाव कब हुआ?
आरबीआई ने अपनी मौद्रिक नीति में आखिरी बार अक्टूबर 2025 में बदलाव करते हुए रेपो रेट में 25 बेसिस पॉइंट की कमी की थी। इसके बाद से दिसंबर, फरवरी, अप्रैल, जून और अब अगस्त की बैठकों में इसे स्थिर रखा गया है। उल्लेखनीय है कि 2025 में आरबीआई ने आम जनता को राहत देते हुए तीन बार में कुल 1.25 प्रतिशत (125 बेसिस पॉइंट) की कटौती की थी। हालांकि, वर्तमान में महंगाई बढ़ने की आशंका और जीडीपी ग्रोथ की धीमी रफ्तार को देखते हुए दरों को स्थिर रखने का निर्णय लिया गया है।
रेपो रेट का महत्व
सरल शब्दों में, रेपो रेट वह दर है जिस पर केंद्रीय बैंक (आरबीआई) अन्य वाणिज्यिक बैंकों को ऋण प्रदान करता है। जब इस दर में वृद्धि होती है, तो बैंकों के लिए आरबीआई से पैसे लेना महंगा हो जाता है। इसका सीधा असर आम जनता की जेब पर पड़ता है, क्योंकि बैंक इस बोझ को ग्राहकों पर डालते हैं। इससे होम लोन, कार लोन और अन्य सभी प्रकार के ऋण महंगे हो जाते हैं। इसके विपरीत, रेपो रेट का स्थिर रहना यह दर्शाता है कि आपके लिए ऋण महंगे नहीं होंगे और आपकी मासिक ईएमआई पहले जैसी बनी रहेगी।