आरबीआई ने रेपो रेट में 0.25% की वृद्धि की, आर्थिक वृद्धि का अनुमान बढ़ा
रेपो रेट में वृद्धि का निर्णय
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने 3.5 साल के अंतराल के बाद रेपो रेट में वृद्धि की है। लंबे समय से इस दर में कोई बदलाव नहीं किया गया था। मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) की बैठक के बाद, RBI के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने घोषणा की कि रेपो रेट को 0.25 प्रतिशत बढ़ाकर 5.5 प्रतिशत कर दिया गया है। इसका सीधा प्रभाव बैंकों द्वारा दिए जाने वाले कर्ज पर पड़ेगा, जिससे आम उपभोक्ताओं के लिए होम लोन और कार लोन की किस्तें महंगी हो सकती हैं या उनकी संख्या बढ़ सकती है। RBI की इस बैठक के बाद, चालू वित्त वर्ष के लिए आर्थिक वृद्धि के अनुमान को 6.7 प्रतिशत से बढ़ाकर 7.1 प्रतिशत कर दिया गया है।
नीतिगत दरों में सख्ती का संकेत
मौद्रिक नीति समिति ने अपने रुख को 'तटस्थ' से बदलकर 'जरूरत के अनुसार सख्त' करने का निर्णय लिया है। इसका अर्थ है कि RBI आवश्यकतानुसार नीतिगत दरों में वृद्धि कर सकता है। इसके साथ ही, मुद्रास्फीति के अनुमान को 5 प्रतिशत से बढ़ाकर 5.1 प्रतिशत कर दिया गया है।
आगे की संभावनाएं
RBI के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने मौद्रिक नीति समिति की तीन दिवसीय बैठक में लिए गए निर्णय की जानकारी देते हुए कहा, 'वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए, एमपीसी ने आम सहमति से रेपो दर को 0.25 प्रतिशत बढ़ाकर 5.5 प्रतिशत करने का निर्णय लिया।' यह फरवरी 2023 के बाद पहली बार है जब रेपो रेट में वृद्धि की गई है। पिछले साल फरवरी से दिसंबर 2025 तक रेपो दर में कुल 1.25 प्रतिशत की कटौती की गई थी। इस वर्ष की मौद्रिक नीति समीक्षा में नीतिगत दर में कोई बदलाव नहीं किया गया था।
EMI पर प्रभाव
बैंक अपनी लोन दरों को उसी हिसाब से समायोजित करते हैं, जिस दर पर उन्हें लोन मिलता है। यदि उन्हें महंगा लोन मिलता है, तो वे ग्राहकों को भी महंगा लोन देंगे। इसी तरह, यदि उन्हें सस्ता लोन मिलता है, तो ग्राहकों के लिए ब्याज दरें घटाई जा सकती हैं। पहले से चल रहे लोन की दरों में भी इसी के अनुसार बदलाव होता है।