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आरबीआई में नई पदोन्नति नीति पर विवाद: अधिकारियों का प्रदर्शन

भारतीय रिजर्व बैंक में नई पदोन्नति नीति को लेकर अधिकारियों का विरोध बढ़ता जा रहा है। रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ऑफिसर्स एसोसिएशन ने इस नीति के खिलाफ देशभर में प्रदर्शन किया और गवर्नर से हस्तक्षेप की मांग की। नई नीति में पदोन्नति को रिक्तियों से जोड़ा गया है, जिससे अधिकारियों में असंतोष बढ़ रहा है। संगठन ने लगभग 8,000 अधिकारियों के प्रभावित होने की बात कही है और नीति को स्थगित करने की मांग की है। जानें इस विवाद की पूरी कहानी।
 

आरबीआई में पदोन्नति नीति पर उठे सवाल

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) में पदोन्नति के नए नियमों को लेकर विवाद बढ़ता जा रहा है। रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ऑफिसर्स एसोसिएशन (आरबीआईओए), जो कि आरबीआई के अधिकारियों का सबसे बड़ा संगठन है, ने नई पदोन्नति नीति के खिलाफ शुक्रवार को देशभर में प्रदर्शन किया। संगठन ने आरबीआई के गवर्नर संजय मल्होत्रा को पत्र लिखकर इस मामले में तात्कालिक हस्तक्षेप की मांग की है।


प्रदर्शन का कारण

आरबीआई के विभिन्न क्षेत्रीय कार्यालयों और मुंबई स्थित केंद्रीय मुख्यालय में कार्यरत अधिकारियों ने नई पदोन्नति नीति के खिलाफ आवाज उठाई। इस नीति में पदोन्नति को रिक्तियों की उपलब्धता से जोड़ा गया है, जबकि पहले समयबद्ध पदोन्नति प्रणाली लागू थी।


आरबीआईओए की चिंताएं

आरबीआईओए ने आठ मई को जारी पत्र में कहा कि केंद्रीय बैंक ने उनकी गंभीर चिंताओं और सुझावों पर ध्यान नहीं दिया है, जिससे अधिकारियों में असंतोष और निराशा बढ़ रही है। संगठन ने बताया कि विभिन्न ग्रेड में पदोन्नति रुकने से युवा अधिकारियों में असंतोष बढ़ रहा है, जो लंबे समय तक एक ही पद पर बने रहने को मजबूर हैं।


संगठन की मांगें

आरबीआईओए के अनुसार, लगभग 8,000 अधिकारी इस नई नीति से प्रभावित हो सकते हैं। संगठन ने मांग की है कि संशोधित नीति को तुरंत स्थगित किया जाए और इसके पुनरावलोकन के लिए आरबीआईओए के साथ विस्तृत चर्चा की जाए। उन्होंने शीर्ष प्रबंधन से अनुरोध किया है कि इस मामले पर पुनर्विचार किया जाए और अधिकारियों के करियर विकास के लिए एक निष्पक्ष और संतुलित ढांचा तैयार किया जाए।