आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का प्रभाव: तकनीकी क्षेत्र में नौकरियों में गिरावट
एआई का बढ़ता प्रभाव
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के विकास का सबसे अधिक प्रभाव तकनीकी पेशेवरों और व्हाइट-कॉलर कर्मचारियों पर पड़ रहा है, जबकि ब्लू-कॉलर श्रमिकों पर इसका असर अपेक्षाकृत कम है। गोल्डमैन सैक्स रिसर्च द्वारा जारी की गई रिपोर्ट, जिसका शीर्षक है 'एआई का वैश्विक श्रम बाजार पर प्रभाव', बताती है कि भले ही समग्र अर्थव्यवस्था में छंटनी की प्रक्रिया अभी सीमित है, लेकिन नॉलेज-बेस्ड और आईटी सेक्टर में नई भर्तियों पर दबाव बढ़ता जा रहा है।
रोजगार में सुस्ती
गोल्डमैन सैक्स रिसर्च के अर्थशास्त्रियों सारा डोंग और जोसेफ ब्रिग्स के अनुसार, विकसित देशों में 2022 के बाद से सूचना और संचार सेवाओं में नौकरियों की वृद्धि धीमी हो गई है। विशेष रूप से अमेरिका में, तकनीकी क्षेत्र में रोजगार अपने ऐतिहासिक स्तर से नीचे चला गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि टेक सेक्टर में हायरिंग पर यह नकारात्मक प्रभाव केवल अमेरिका तक सीमित नहीं है, बल्कि अन्य विकसित बाजारों में भी यही स्थिति देखी जा रही है।
भर्ती नीतियों में बदलाव
रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि जहां जनरेटिव एआई और ऑटोमेशन टूल्स का उपयोग संभव है, वहां कंपनियों ने अपनी भर्ती नीतियों में तेजी से बदलाव किया है। कॉल सेंटर क्षेत्र इसका एक प्रमुख उदाहरण है, जहां अमेरिका में कॉल सेंटर रोजगार ऐतिहासिक स्तर की तुलना में 39 प्रतिशत कम हो गया है। इसी तरह, कनाडा में यह 33 प्रतिशत और जर्मनी में 27 प्रतिशत तक गिर गया है।
ज्ञान-आधारित सेवाओं में कमी
सॉफ्टवेयर और आईटी कंपनियों के अलावा, प्रबंधन परामर्श, सॉफ्टवेयर प्रकाशन और विज्ञापन सेवाओं जैसी अन्य ज्ञान-आधारित पेशेवर सेवाओं में भी नए रोजगार के अवसरों में कमी आई है। रिपोर्ट का निष्कर्ष है कि वर्तमान में तकनीक कर्मचारियों को सेवामुक्त करने के बजाय रूटीन और डिजिटल कार्यों में नई रिक्तियों के सृजन को धीमा कर रही है। हालांकि, ब्लू-कॉलर नौकरियों पर इसका प्रभाव अभी तक स्पष्ट नहीं है, लेकिन जैसे-जैसे स्वचालन तकनीक अन्य क्षेत्रों में फैलती है, वैश्विक श्रम बाजार की आवश्यकताएं और कंपनियों की भर्ती रणनीतियों में महत्वपूर्ण बदलाव आ सकते हैं।