इथेनॉल निर्माताओं की चिंता: बढ़ती लागत और ई20 कार्यक्रम की आपूर्ति
इथेनॉल की बढ़ती लागत पर चिंता
इथेनॉल उत्पादकों ने सोमवार को ई20 कार्यक्रम के लिए आवश्यक सामग्री की उपलब्धता को लेकर चिंता व्यक्त की है, खासकर जब कच्चे माल और ईंधन की कीमतें बढ़ रही हैं।
देश के डिस्टिलरी उद्योग के प्रमुख संगठन 'आयडा' की वार्षिक आम सभा में मक्के की कीमतों में वृद्धि और सरकार द्वारा मक्के से बने इथेनॉल की खरीद मूल्य में कटौती पर चिंता जताई गई। इस बैठक में बताया गया कि गन्ने के उपयोग पर रोक के कारण इथेनॉल उत्पादन में कमी आई है।
आयडा के अध्यक्ष विजेंद्र सिंह ने कहा कि गन्ने से इथेनॉल बनाने पर प्रतिबंध से सालाना 200 करोड़ लीटर की कमी आएगी। मक्के से इथेनॉल बनाने की संभावना है, लेकिन मक्के की बढ़ती कीमतें और इथेनॉल की घटती कीमतें उद्योग के लिए नकारात्मक संकेत हैं।
उन्होंने बताया कि पिछले वर्ष मक्का 19 रुपये प्रति किलोग्राम था, जो अब 27 रुपये प्रति किलोग्राम हो गया है। जबकि सरकार ने मक्के से बने इथेनॉल की कीमत में तीन रुपये प्रति लीटर की कटौती की है, जिससे उद्योग पर नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है।
सरकार ने हाल ही में इथेनॉल के खरीद मूल्यों की घोषणा की है। मक्के से बने इथेनॉल की कीमत 71.86 रुपये से घटाकर 68.86 रुपये प्रति लीटर की गई है। वहीं, चावल से बने इथेनॉल की कीमत में वृद्धि की गई है।
श्री सिंह ने कहा कि डिस्टीलरी उद्योग मक्के से बने इथेनॉल की कीमत 75 रुपये प्रति लीटर करने की मांग कर रहा है ताकि लागत के दबाव को कम किया जा सके। उन्होंने बताया कि ईंधन और श्रम की लागत भी बढ़ रही है, जिससे इथेनॉल निर्माण की कुल लागत लगभग 15 प्रतिशत बढ़ गई है।
गन्ना एवं खाद्य तेल निदेशालय के निदेशक अरविंद कुमार रावत ने कहा कि सरकार को सभी हितधारकों का ध्यान रखना चाहिए, और किसानों के हितों की रक्षा प्राथमिकता होनी चाहिए।
श्री सिंह ने उद्योग के अधिकारियों से अपील की कि वे ई-20 के लिए आवश्यक 1,100 करोड़ लीटर की सालाना आपूर्ति सुनिश्चित करें। उन्होंने सरकार से फ्लेक्सी फ्यूल वाहनों को प्रोत्साहित करने की भी मांग की।
जब उनसे पूछा गया कि यदि मक्के से बने इथेनॉल के खरीद मूल्य नहीं बढ़ाए जाते हैं तो क्या उद्योग आपूर्ति कम कर सकता है, श्री सिंह ने कहा कि यह संभव नहीं है। अगले एक-दो महीने में स्थिति स्पष्ट होगी, और उम्मीद है कि सरकार कोई नीतिगत बदलाव करेगी।