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ईमुद्रा में सुरक्षा घटना की जांच के लिए विशेष दल का गठन

इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने ईमुद्रा में हुई सुरक्षा घटना की जांच के लिए एक विशेष दल का गठन किया है। मंत्रालय ने बताया कि इस घटना का प्रभाव भारतीय वेबसाइटों पर सीमित रहा है। ईमुद्रा ने सुरक्षा कुंजियों की सुरक्षा में कमी की पुष्टि की है, जिसके बाद सीईआरटी-इन ने परामर्श जारी किया। मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि ईमुद्रा के डिजिटल हस्ताक्षर प्रमाणपत्र इस घटना से अप्रभावित हैं। कंपनी ने प्रभावित ग्राहकों से संपर्क कर नए प्रमाणपत्र उपलब्ध कराने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। जानें इस मामले में और क्या जानकारी सामने आई है।
 

ईमुद्रा में सुरक्षा संबंधी घटना की जांच

इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने डिजिटल प्रमाणपत्र जारी करने वाली कंपनी ईमुद्रा में हुई सुरक्षा घटना की जांच के लिए एक विशेष टीम का गठन किया है। मंत्रालय के अनुसार, इस घटना का प्रभाव भारतीय वेबसाइटों और ऐप्स पर बहुत सीमित रहा है। बयान में कहा गया है कि यह घटना मुख्य रूप से ईमुद्रा के वैश्विक डिजिटल प्रमाणपत्र व्यवसाय से संबंधित है।


सोशल मीडिया पर डर फैलाने का आरोप

मंत्रालय ने कुछ सोशल मीडिया प्लेटफार्मों पर इस घटना के बारे में लोगों में डर फैलाने का आरोप लगाया है। यह मामला तब सामने आया जब ईमुद्रा ने बताया कि उसके डिजिटल प्रमाणपत्र से जुड़ी निजी सुरक्षा कुंजियों की सुरक्षा में कमी आई है। इस संदर्भ में भारतीय कंप्यूटर आपात प्रतिक्रिया दल (सीईआरटी-इन) ने भी एक परामर्श जारी किया है।


ईमुद्रा के कार्यक्षेत्र

मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि ईमुद्रा दो अलग-अलग क्षेत्रों में कार्यरत है। पहले क्षेत्र में डिजिटल हस्ताक्षर प्रमाणपत्र (डीएससी) और ई-हस्ताक्षर सेवाएं शामिल हैं, जिनका नियमन भारतीय प्रमाणन प्राधिकरण (सीसीए) द्वारा किया जाता है।


दूसरे क्षेत्र में, ईमुद्रा ऐसे डिजिटल प्रमाणपत्र जारी करती है जिन्हें प्रमुख वेब ब्राउज़र और ऑपरेटिंग सिस्टम विश्वसनीय मानते हैं। इनका उपयोग वेबसाइटों, सॉफ्टवेयर और इंटरनेट पर संचार को सुरक्षित रखने के लिए किया जाता है। मंत्रालय के अनुसार, कंपनी का यह व्यवसाय वैश्विक स्तर पर संचालित होता है और इसके लिए अंतरराष्ट्रीय मानकों का पालन आवश्यक है।


स्वतंत्र एजेंसियों द्वारा जांच

इस व्यवसाय की स्वतंत्र एजेंसियां भी जांच करती हैं, जिसमें बीडीओ इंटरनेशनल लिमिटेड द्वारा किया जाने वाला वेबट्रस्ट ऑडिट शामिल है। मंत्रालय ने कहा कि सुरक्षा संबंधी घटना कंपनी के वैश्विक कारोबार तक सीमित है और इसके ऑडिट में मंत्रालय की कोई भूमिका नहीं है।


सीईआरटी-इन का परामर्श

मंत्रालय ने यह भी स्पष्ट किया कि सीसीए के नियमन के तहत आने वाले डिजिटल हस्ताक्षर प्रमाणपत्र और ई-हस्ताक्षर सेवाएं इस घटना से पूरी तरह अप्रभावित हैं। सीईआरटी-इन ने इस घटना के संबंध में एक परामर्श जारी किया है, जिसमें नुकसान को सीमित करने के उपाय भी शामिल हैं। मंत्रालय ने कहा कि वह मामले को जल्द सुलझाने के लिए सभी संबंधित पक्षों के साथ मिलकर काम कर रहा है।


जांच के बाद जानकारी का खुलासा

जांच पूरी होने के बाद इस मामले में और जानकारी दी जाएगी। ईमुद्रा विभिन्न कारोबारी इकाइयों के ऑनलाइन लेनदेन में उपयोग होने वाले डिजिटल हस्ताक्षर प्रमाणपत्र जारी करती है। सार्वजनिक कुंजी ढांचे (पीकेआई) में सार्वजनिक और निजी सुरक्षा कुंजियों सहित कई घटक होते हैं।


डिजिटल जानकारी की सुरक्षा

इनका उपयोग डिजिटल जानकारी को सुरक्षित रखने, उसकी प्रामाणिकता की पुष्टि करने और वेबसाइट को विश्वसनीय बनाने में किया जाता है। ट्रांसपोर्ट लेयर सिक्योरिटी (टीएलएस) प्रमाणपत्र का उपयोग एचटीटीपीएस वाली वेबसाइटों पर होता है। ये ब्राउज़र और ऐप्स के बीच डेटा के सुरक्षित आदान-प्रदान को सुनिश्चित करने में मदद करते हैं।


ईमुद्रा की स्थिति

ईमुद्रा ने स्पष्ट किया है कि इस घटना का उसके भारतीय डिजिटल हस्ताक्षर प्रमाणपत्र और ई-हस्ताक्षर व्यवसाय से कोई संबंध नहीं है। कंपनी के अनुसार, इससे उसके वैश्विक टीएलएस कारोबार का एक छोटा हिस्सा प्रभावित हुआ है। सीईआरटी-इन के परामर्श के अनुसार, ईमुद्रा ने अपने सार्वजनिक कुंजी ढांचे में आठ मध्यवर्ती प्रमाणन प्राधिकरण प्रमाणपत्रों से जुड़ी निजी कुंजियों की सुरक्षा में कमी की जानकारी दी है।


साइबर अपराध की आशंका

इनमें छह टीएलएस प्रमाणपत्र और दो कोड-साइनिंग प्रमाणपत्र शामिल हैं। इस खुलासे के बाद आशंका जताई गई कि इन कुंजियों का उपयोग साइबर अपराधी किसी वास्तविक भुगतान कंपनी की नकल करने वाले फर्जी ऑनलाइन प्लेटफार्मों को बनाने और लोगों को भुगतान के लिए बरगलाने में कर सकते हैं। हालांकि, ईमुद्रा ने कहा कि उसके बुनियादी ढांचे की सुरक्षा में कोई सेंध नहीं लगी है और किसी डेटा की चोरी या अनधिकृत पहुंच की घटना नहीं हुई है।


कंपनी की प्रतिक्रिया

कंपनी ने कहा कि प्रभावित वैश्विक टीएलएस कारोबार उसके कुल कारोबार का बहुत छोटा हिस्सा है और कंपनी के राजस्व में इसका योगदान लगभग एक प्रतिशत है। हालांकि, इस घटना से कंपनी की प्रतिष्ठा को कितना नुकसान हो सकता है, इसका आकलन नहीं किया जा सकता। ईमुद्रा ने कहा कि वह संभावित रूप से प्रभावित ग्राहकों से सीधे संपर्क कर उन्हें नए प्रमाणपत्र उपलब्ध करा रही है, ताकि महत्वपूर्ण सेवाओं में कोई बाधा न आए।


घटना की जांच जारी

कंपनी ने बताया कि वह प्रमुख ब्राउज़र और ऑपरेटिंग सिस्टम में प्रमाणपत्रों को विश्वसनीय मानने वाली संस्थाओं के साथ भी काम कर रही है और घटना के मूल कारणों की जांच जारी है। कंपनी के अनुसार, उसकी प्रणाली में एक खामी के कारण मूल मजबूत कुंजियों के साथ कुछ कमजोर कुंजियां भी बन गई थीं। एक शोधकर्ता ने एप्पल, गूगल, माइक्रोसॉफ्ट और मोजिला को बताया था कि कृत्रिम मेधा (एआई) की मदद से इन कमजोर कुंजियों का विश्लेषण कर उनका मूल स्वरूप निकाला जा सकता है।


गूगल और मोजिला की कार्रवाई

सीईआरटी-इन ने कहा कि गूगल ने क्रोम ब्राउज़र में प्रभावित टीएलएस प्रमाणपत्रों की सार्वजनिक कुंजियों को सर्टिफिकेट रिवोकेशन लिस्ट सेट (सीआरएल-सेट) अपडेट के जरिए रोक दिया है। मोजिला ने भी ईमुद्रा के छह प्रभावित टीएलएस मध्यवर्ती प्रमाणपत्रों को अवरुद्ध कर दिया है। सर्टिफिकेट रिवोकेशन लिस्ट सेट (सीआरएल-सेट) गूगल क्रोम ब्राउज़र की एक व्यवस्था है, जिसके माध्यम से उन डिजिटल प्रमाणपत्रों को अवरुद्ध किया जा सकता है, जिन पर अब भरोसा नहीं किया जाना चाहिए।