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उच्चतम न्यायालय ने ओआईएल को नई याचिका दायर करने की अनुमति दी

उच्चतम न्यायालय ने ऑयल इंडिया लिमिटेड को एक नई याचिका दायर करने की अनुमति दी है, जिसमें असम के डिब्रू-सैखोवा राष्ट्रीय उद्यान के नीचे हाइड्रोकार्बन निकालने के लिए विस्तारित पहुंच ‘ड्रिलिंग’ के प्रस्ताव को चुनौती दी गई है। वरिष्ठ अधिवक्ता राकेश द्विवेदी ने मामले की तात्कालिकता पर जोर दिया, यह बताते हुए कि यह परियोजना देश की ऊर्जा जरूरतों के लिए महत्वपूर्ण है। जानें इस महत्वपूर्ण निर्णय के पीछे की पूरी कहानी।
 

ओआईएल की नई याचिका पर उच्चतम न्यायालय का निर्णय

(फाइल फोटो के साथ) नयी दिल्ली, 2 सितंबर: उच्चतम न्यायालय ने ऑयल इंडिया लिमिटेड (ओआईएल) को एक अंतरिम आवेदन वापस लेने और असम के डिब्रू-सैखोवा राष्ट्रीय उद्यान के नीचे हाइड्रोकार्बन निकालने के लिए विस्तारित पहुंच ‘ड्रिलिंग’ (ईआरडी) के प्रस्ताव को केंद्र द्वारा खारिज किए जाने के खिलाफ नई याचिका दायर करने की अनुमति दी। प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची तथा न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ के समक्ष ओआईएल की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता राकेश द्विवेदी ने कहा कि यह मामला अत्यंत महत्वपूर्ण है और इसे सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया जाना चाहिए। द्विवेदी ने बताया, “यह मामला इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यह क्षेत्र राष्ट्रीय उद्यान की सीमा के निकट है।”


उन्होंने आगे कहा कि सभी आवश्यक मंजूरियां प्राप्त हो चुकी हैं, लेकिन सरकार 2023 के उस आदेश का हवाला दे रही है, जिसमें खनन पर रोक लगाई गई थी। यह खनन नहीं है, बल्कि पाइपलाइन उद्यान के बाहर बिछाई जा रही है। यह पाइपलाइन 4,000 मीटर नीचे जाती है और फिर क्षैतिज रूप से आगे बढ़ती है।


द्विवेदी ने बताया कि यह आवेदन 1995 के लंबित मामले ‘टी. एन. गोदावर्मन थिरुमुलपाद बनाम भारत संघ’ में दायर किया गया है, जो वन संरक्षण और पर्यावरण संबंधी न्यायशास्त्र को आकार देने में महत्वपूर्ण रहा है। उन्होंने मामले की तात्कालिकता पर जोर देते हुए कहा कि प्रस्तावित परियोजना देश की ऊर्जा आवश्यकताओं के लिए महत्वपूर्ण है।


उन्होंने पीठ को बताया कि रजिस्ट्री अंतरिम आवेदन को संख्या नहीं दे रही है क्योंकि पहले इस मामले में ऐसे आवेदनों को स्वीकार नहीं करने का निर्देश था। प्रधान न्यायाधीश ने कहा कि यदि नया कारण उत्पन्न हुआ है तो आवेदक नई याचिका दायर कर सकता है। उन्होंने कहा, “हम उस पूरे मामले को समाप्त करना चाहते थे। यदि कोई नया कारण है तो नई याचिका दायर करें और हम उस पर सुनवाई करेंगे।”


द्विवेदी ने परियोजना के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि यह देश की लगभग तीन प्रतिशत तेल जरूरतों से संबंधित है। उन्होंने पीठ से अंतरिम आवेदन वापस लेने और नई याचिका दायर करने की अनुमति देने का अनुरोध किया।


पीठ ने कहा, “अनुरोध के अनुसार अंतरिम आवेदन वापस लेने की अनुमति दी जाती है और नई याचिका दायर करने की स्वतंत्रता दी जाती है।” सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी ने अपनी याचिका में वन सलाहकार समिति के फैसले और पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (एमओईएफसीसी) द्वारा तिनसुकिया जिले में परियोजना के लिए 0.069 हेक्टेयर वन भूमि के गैर-वानिकी इस्तेमाल की मंजूरी देने से इनकार करने के फैसले को चुनौती दी है।


कंपनी ने कहा कि अधिकारियों ने उच्चतम न्यायालय के 26 अप्रैल, 2023 के उस फैसले को गलत तरीके से लागू किया, जिसमें राष्ट्रीय उद्यानों और वन्यजीव अभयारण्यों तथा उनकी सीमाओं से एक किलोमीटर के दायरे में खनन पर रोक लगाई गई थी। ओआईएल के अनुसार, विस्तारित पहुंच ‘ड्रिलिंग’ के माध्यम से हाइड्रोकार्बन की खोज और उत्पादन को पारंपरिक खनन के समान नहीं माना जा सकता।