उच्चतम न्यायालय ने ओआईएल को नई याचिका दायर करने की अनुमति दी
ओआईएल की याचिका पर उच्चतम न्यायालय का निर्णय
उच्चतम न्यायालय ने ऑयल इंडिया लिमिटेड (ओआईएल) को एक अंतरिम आवेदन वापस लेने की अनुमति दी है, साथ ही असम के डिब्रू-सैखोवा राष्ट्रीय उद्यान के नीचे हाइड्रोकार्बन निकालने के लिए विस्तारित पहुंच ‘ड्रिलिंग’ (ईआरडी) के प्रस्ताव को केंद्र द्वारा खारिज करने के खिलाफ नई याचिका दायर करने का आदेश दिया।
प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ के समक्ष ओआईएल की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता राकेश द्विवेदी ने कहा कि यह मामला अत्यंत महत्वपूर्ण है और इसे सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया जाना चाहिए।
परियोजना की तात्कालिकता और महत्व
द्विवेदी ने बताया कि यह मामला राष्ट्रीय उद्यान की सीमा के निकट है और सभी आवश्यक मंजूरियां प्राप्त हो चुकी हैं। हालांकि, सरकार 2023 के एक आदेश के तहत खनन पर रोक का हवाला दे रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह खनन नहीं है, बल्कि पाइपलाइन उद्यान के बाहर बिछाई जा रही है, जो 4,000 मीटर नीचे जाती है और फिर क्षैतिज रूप से आगे बढ़ती है।
उन्होंने यह भी बताया कि यह आवेदन 1995 के एक महत्वपूर्ण मामले ‘टी. एन. गोदावर्मन थिरुमुलपाद बनाम भारत संघ’ में दायर किया गया है, जिसने वन संरक्षण और पर्यावरण संबंधी न्यायशास्त्र को प्रभावित किया है।
न्यायालय की प्रतिक्रिया
द्विवेदी ने परियोजना की तात्कालिकता पर जोर देते हुए कहा कि यह देश की ऊर्जा जरूरतों के लिए महत्वपूर्ण है। उन्होंने पीठ को सूचित किया कि रजिस्ट्री अंतरिम आवेदन को संख्या नहीं दे रही है क्योंकि पहले इस मामले में ऐसे आवेदनों को स्वीकार नहीं करने का निर्देश था।
प्रधान न्यायाधीश ने कहा कि यदि नया कारण उत्पन्न हुआ है, तो आवेदक नई याचिका दायर कर सकता है। उन्होंने कहा, 'हम उस पूरे मामले को बंद करना चाहते थे। अगर कोई नया कारण है तो नई याचिका दायर करें और हम उस पर सुनवाई करेंगे।'
ओआईएल की याचिका का विवरण
ओआईएल ने अपनी याचिका में वन सलाहकार समिति के निर्णय और पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय द्वारा तिनसुकिया जिले में परियोजना के लिए 0.069 हेक्टेयर वन भूमि के गैर-वानिकी उपयोग की मंजूरी देने से इनकार करने के फैसले को चुनौती दी है।
कंपनी ने कहा कि अधिकारियों ने उच्चतम न्यायालय के 26 अप्रैल, 2023 के निर्णय को गलत तरीके से लागू किया, जिसमें राष्ट्रीय उद्यानों और वन्यजीव अभयारण्यों के एक किलोमीटर के दायरे में खनन पर रोक लगाई गई थी। ओआईएल के अनुसार, विस्तारित पहुंच ‘ड्रिलिंग’ के माध्यम से हाइड्रोकार्बन की खोज और उत्पादन को पारंपरिक खनन के समान नहीं माना जा सकता।