×

उच्चतम न्यायालय ने ग्रासिम इंडस्ट्रीज पर जुर्माना रद्द करने का आदेश बरकरार रखा

उच्चतम न्यायालय ने ग्रासिम इंडस्ट्रीज पर लगे 301.6 करोड़ रुपये के जुर्माने को रद्द करने के एनसीएलएटी के आदेश को स्वीकार कर लिया है। इस निर्णय के साथ, न्यायालय ने सीसीआई को निर्देश दिया है कि वह ग्रासिम के मामले की फिर से सुनवाई करे। जानें इस मामले की पूरी जानकारी और इसके पीछे के कारण।
 

उच्चतम न्यायालय का निर्णय

(फाइल फोटो के साथ) नई दिल्ली, 31 जुलाई: उच्चतम न्यायालय ने ग्रासिम इंडस्ट्रीज पर लगाए गए 301.6 करोड़ रुपये के जुर्माने को रद्द करने के राष्ट्रीय कंपनी विधि अपीलीय न्यायाधिकरण (एनसीएलएटी) के आदेश को शुक्रवार को स्वीकार कर लिया। एनसीएलएटी ने भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (सीसीआई) द्वारा ग्रासिम पर लगाए गए जुर्माने को रद्द कर दिया था। न्यायालय ने यह भी निर्देश दिया कि निष्पक्ष व्यापार नियामक को विस्कोस स्टेपल फाइबर (वीएसएफ) बाजार में आदित्य बिरला समूह की कंपनी के मामले की फिर से सुनवाई करनी चाहिए।


सीसीआई की अपील का खारिज होना

न्यायमूर्ति जे. बी. पारदीवाला और न्यायमूर्ति के. विनोद चंद्रन की पीठ ने सीसीआई की उस अपील को खारिज कर दिया, जिसमें उसने एनसीएलएटी के पांच मई के आदेश को चुनौती दी थी। न्यायाधिकरण ने कहा कि सीसीआई ने अपने जांच प्रकोष्ठ के महानिदेशक (डीजी) के निष्कर्षों से भिन्न रुख अपनाने के बावजूद ग्रासिम को अपना पक्ष रखने का अवसर नहीं दिया। सीसीआई ने मार्च 2020 में भारत में ‘स्पिनर्स’ को वीएसएफ की आपूर्ति के संबंध में अपने प्रमुख बाजार प्रभुत्व का कथित दुरुपयोग करने के आरोप में ग्रासिम पर यह जुर्माना लगाया था।


कपड़ा उद्योग में स्पिनर्स की भूमिका

कपड़ा उद्योग में ‘स्पिनर्स’ उन मिलों या कंपनियों को संदर्भित करता है जो कच्चे फाइबर (जैसे कपास, विस्कोस, या पॉलिएस्टर) से धागा बनाते हैं। ग्रासिम ने इस आदेश को एनसीएलएटी में चुनौती दी थी, जहां सीसीआई के आदेशों के खिलाफ अपील की जा सकती है।


नए सिरे से सुनवाई का निर्देश

एनसीएलएटी ने नियामक को मामले की नए सिरे से सुनवाई करने का निर्देश दिया था। न्यायाधिकरण की दो सदस्यीय पीठ ने कहा कि सीसीआई ने छूट/मूल्य निर्धारण नीति के खुलासे और वीएसएफ का कारोबार करने वाले खरीदारों को बिक्री संबंधी निष्कर्षों पर डीजी की रिपोर्ट से भिन्न राय बनाई थी। न्यायाधिकरण ने पूर्व के फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि ऐसे मामलों में, जहां सीसीआई और उसके डीजी के निष्कर्ष अलग-अलग हों, आयोग के लिए विपक्षी पक्ष (ग्रासिम) को सुनवाई का अवसर देना आवश्यक है।


ग्रासिम पर आरोप

सीसीआई ने अपने आदेश में कहा था कि ग्रासिम ने भारत में ‘स्पिनर्स’ को वीएसएफ की आपूर्ति के बाजार में ग्राहकों से भेदभावपूर्ण मूल्य वसूलकर और उन पर अतिरिक्त शर्तें थोपकर अपने प्रमुख बाजार प्रभुत्व का दुरुपयोग किया। सीसीआई ने कंपनी को अनुचित और भेदभावपूर्ण मूल्य निर्धारण की नीति अपनाने से परहेज करने तथा खरीदारों से वीएसएफ की खपत का ब्योरा मांगना बंद करने का निर्देश दिया था। वीएसएफ एक बहुउपयोगी, जैव-अपघटनीय सेल्यूलोसिक रेशा है जिसका व्यापक उपयोग परिधान, घरेलू वस्त्र एवं गैर-बुने स्वच्छता उत्पादों में किया जाता है।


वीएसएफ की विशेषताएँ

अपनी मुलायम बनावट और उच्च अवशोषण क्षमता के कारण, वीएसएफ को आराम, टिकाऊपन और कपड़े की गुणवत्ता बढ़ाने के लिए अक्सर कपास, पॉलिएस्टर या लिनन के साथ मिलाया जाता है।