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उत्तर प्रदेश के किसानों को दीपावली से पहले मिली बड़ी आर्थिक सहायता

उत्तर प्रदेश के 2.24 करोड़ किसानों को दीपावली से पहले प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के तहत 4,482.19 करोड़ रुपये की राशि मिली है। प्रधानमंत्री मोदी ने गुजरात से इस योजना की 24वीं किस्त जारी की, जिससे देशभर के 9.34 करोड़ किसानों को लाभ हुआ। इस योजना के माध्यम से किसानों को सालाना छह हजार रुपये की आर्थिक सहायता दी जाती है। जानें इस योजना के लाभ और प्रधानमंत्री मोदी के संकल्प के बारे में।
 

प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि का लाभ

दीपावली के अवसर पर उत्तर प्रदेश के 2.24 करोड़ से अधिक किसानों के बैंक खातों में प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के तहत 4,482.19 करोड़ रुपये से अधिक की राशि भेजी गई है। यह जानकारी शुक्रवार को एक आधिकारिक बयान में साझा की गई। बयान में बताया गया कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने गुजरात के बनासकांठा से इस योजना की 24वीं किस्त का शुभारंभ किया।


इस योजना के अंतर्गत देशभर के 9.34 करोड़ से अधिक किसानों के खातों में 18,690 करोड़ रुपये से अधिक की राशि ट्रांसफर की गई। उत्तर प्रदेश के किसानों को इस योजना का लाभ मिला, जिससे उनके खातों में 4,482.19 करोड़ रुपये जमा हुए। मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि किसानों की समृद्धि में गांवों की प्रगति और गांवों की प्रगति में राष्ट्र की उन्नति निहित है।


प्रधानमंत्री मोदी ने इस संकल्प के साथ शुक्रवार को गुजरात के बनासकांठा से 24वीं किस्त के तहत 9.34 करोड़ से अधिक किसानों के खातों में 18,690 करोड़ रुपये सीधे भेजे। इससे उत्तर प्रदेश के 2.24 करोड़ से अधिक किसान लाभान्वित हुए हैं। उन्होंने कहा कि किसानों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने और उनकी आय बढ़ाने के लिए केंद्र और राज्य सरकार पूरी तरह से प्रतिबद्ध है।


दीपावली के इस उपहार के लिए उत्तर प्रदेश के सभी किसान भाइयों की ओर से प्रधानमंत्री का आभार व्यक्त किया गया। प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के तहत प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (डीबीटी) के माध्यम से राशि सीधे लाभार्थियों के बैंक खातों में भेजी जाती है। इस योजना के तहत योग्य किसान परिवारों को सालाना छह हजार रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान की जाती है।


यह राशि तीन समान किस्तों में, प्रत्येक दो-दो हजार रुपये की, दी जाती है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 24 फरवरी, 2019 को गोरखपुर से इस योजना की शुरुआत की थी।