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उपभोक्ता शिकायतों के समाधान के लिए कंपनियों से आग्रह

उपभोक्ता मामलों की सचिव निधि खरे ने बढ़ती उपभोक्ता शिकायतों पर चिंता जताते हुए कंपनियों से शिकायत निवारण प्रणाली को मजबूत करने का आग्रह किया। उन्होंने गुणवत्ता मानकों को सरल बनाने और परीक्षण अवसंरचना को सुदृढ़ करने की आवश्यकता पर जोर दिया। खरे ने बताया कि उपभोक्ता अब उच्च गुणवत्ता वाले उत्पादों की अपेक्षा कर रहे हैं और शिकायतों का उचित समाधान होना चाहिए। जानें इस विषय में और क्या कहा गया है।
 

उपभोक्ता मामलों की सचिव का बयान

नई दिल्ली, चार अगस्त: उपभोक्ता मामलों की सचिव निधि खरे ने मंगलवार को बढ़ती उपभोक्ता शिकायतों पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने दैनिक उपभोग की वस्तुएं बनाने वाली कंपनियों (एफएमसीजी) और खाद्य एवं खुदरा क्षेत्र के उद्यमों से उपभोक्ता शिकायत निवारण प्रणाली को मजबूत करने का अनुरोध किया, ताकि ग्राहकों को उच्च गुणवत्ता वाले उत्पाद और सेवाएं मिल सकें। फिक्की द्वारा आयोजित एक सम्मेलन में उन्होंने कहा कि देश में परीक्षण अवसंरचना को सुदृढ़ करने और गुणवत्ता मानकों के अनुरूप उत्पादों के नमूनों की जांच क्षमता को बढ़ाने के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) और रोबोटिक्स का उपयोग बढ़ाने की आवश्यकता है। खरे ने बताया कि सरकार भारतीय मानक ब्यूरो (बीआईएस) द्वारा निर्धारित मानकों को सरल बनाने पर कार्य कर रही है, जिससे उद्योग के लिए अनुपालन करना आसान हो सके।


उन्होंने कहा, 'उपभोक्ता मामलों के विभाग में हम ग्राहकों को गुणवत्ता और मात्रा दोनों का भरोसा दिलाते हैं। गुणवत्ता के लिए हमारे पास राष्ट्रीय मानक निकाय बीआईएस है, जिसके तहत कई तृतीय-पक्ष परीक्षण सुविधाओं को मान्यता दी जाती है।' खरे ने यह भी बताया कि 'नेशनल टेस्ट हाउस' वैमानिकी, ड्रोन, जैविक खाद्य परीक्षण, इलेक्ट्रिक वाहन (ईवी) बैटरी, स्विच और सौर पैनल जैसे उभरते क्षेत्रों के लिए परीक्षण अवसंरचना विकसित कर रहा है।


उपभोक्ता मामलों की सचिव ने कहा, 'अब यह समझने का समय आ गया है कि विनिर्माण और उपभोक्ताओं को उत्पाद बेचने की प्रक्रिया में गुणवत्ता संबंधी चिंताओं पर ध्यान दिए बिना विकास संभव नहीं है। जैसे-जैसे उपभोक्ता जागरूक हो रहे हैं, उनकी अपेक्षाएं भी बढ़ रही हैं। हमें आज से पांच वर्ष पहले की तुलना में लगभग पांच गुना अधिक शिकायतें मिल रही हैं।' उन्होंने बताया कि विभाग उपभोक्ता अधिकारों की रक्षा के लिए प्रौद्योगिकी का उपयोग कर रहा है।


राष्ट्रीय उपभोक्ता 'हेल्पलाइन' के माध्यम से शिकायतें प्राप्त की जा रही हैं, और यदि उपभोक्ताओं को उचित मुआवजा नहीं मिलता है, तो वे 'ई-जागृति' मंच पर भी मामला दर्ज कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि उपभोक्ता अब अपनी समस्याओं और सवालों के बेहतर समाधान की अपेक्षा कर रहे हैं, 'उनकी शिकायतों का समुचित निवारण होना चाहिए।'


खरे ने कहा, 'यदि हम अभी प्रतिदिन 30 नमूनों की जांच करते हैं, तो इसे बढ़ाकर 300 नमूने प्रतिदिन तक किया जा सकता है। हमें इसी स्तर की क्षमता चाहिए और हम उसी दिशा में काम कर रहे हैं।' उन्होंने बताया कि सरकार ने कई प्रावधानों को अपराध की श्रेणी से बाहर कर दिया है।


उन्होंने कहा, 'हमारा उद्देश्य विनिर्माताओं और खुदरा कारोबारियों में विश्वास पैदा करना है और यह सुनिश्चित करना है कि छोटी एवं अनजाने में हुई गलतियों को अपराध नहीं माना जाए।' उन्होंने बताया कि विभाग ने विधिक मापविज्ञान अधिनियम के तहत 'सुधार नोटिस' का प्रावधान किया है। निर्माताओं और खुदरा कारोबारियों को अपनी त्रुटियां सुधारने के लिए समय दिया जाएगा, उसके बाद ही मामले को जुर्माना लगाकर निपटाने पर विचार किया जाएगा।


कारोबारी सुगमता के लिए सरकार ने गुणवत्ता नियंत्रण आदेशों (क्यूसीओ) की संख्या भी कम की है।