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एचडीएफसी बैंक के अधिकारियों पर जुर्माना, आंतरिक जांच के बाद लिया गया निर्णय

एचडीएफसी बैंक के निदेशक मंडल ने आंतरिक जांच के बाद तीन वरिष्ठ अधिकारियों पर एक-एक लाख रुपये का जुर्माना लगाया है। यह कार्रवाई महाराष्ट्र राज्य सड़क विकास निगम से जमा राशि जुटाने की प्रक्रिया की समीक्षा के बाद की गई। जुर्माना लगाए गए अधिकारियों में बैंक के प्रबंध निदेशक, मुख्य वित्त अधिकारी और समूह प्रमुख शामिल हैं। बैंक ने कहा कि जांच में कोई ठोस प्रमाण नहीं मिला, लेकिन कर्मचारियों के आचरण में कुछ अनियमितताएं पाई गईं। इस घटनाक्रम का असर बैंक के शेयरों पर भी पड़ा है।
 

एचडीएफसी बैंक में जुर्माना और आंतरिक जांच

एचडीएफसी बैंक के निदेशक मंडल ने आंतरिक जांच के परिणामों के आधार पर तीन वरिष्ठ अधिकारियों पर एक-एक लाख रुपये का जुर्माना लगाने का निर्णय लिया है। यह कार्रवाई महाराष्ट्र राज्य सड़क विकास निगम से 2017 और 2021 के बीच जमा राशि जुटाने की प्रक्रिया की समीक्षा के बाद की गई है।


जुर्माना लगाए गए अधिकारी

जिन अधिकारियों पर यह जुर्माना लगाया गया है, उनमें बैंक के प्रबंध निदेशक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी शशिधर जगदीशन, मुख्य वित्त अधिकारी श्रीनिवासन वैद्यनाथन और समूह प्रमुख अरविंद वोहरा शामिल हैं। इसके अतिरिक्त, मामले से जुड़े अन्य कर्मचारियों को चेतावनी पत्र जारी करने का भी निर्णय लिया गया है।


जांच समिति की सिफारिशें

बैंक के स्वतंत्र निदेशकों की विशेष अनुशासन समिति ने मामले की गहन जांच की। समिति ने निदेशक मंडल को अपनी सिफारिशें प्रस्तुत कीं। बैंक ने शेयर बाजार को दी गई जानकारी में बताया कि जांच के दौरान ऐसा कोई ठोस प्रमाण नहीं मिला जिससे यह साबित हो कि किसी अधिकारी ने गलत मंशा से काम किया। हालांकि, समिति ने यह स्वीकार किया कि संबंधित कर्मचारियों के आचरण में कारोबारी सीमा से आगे बढ़ने जैसी स्थिति दिखाई दी।


आरबीआई के दिशा-निर्देशों का पालन

निदेशक मंडल ने यह भी माना कि कुछ मामलों में भारतीय रिजर्व बैंक के दिशा-निर्देशों से संभावित अंतर की आशंका को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। इसी आधार पर तीन वरिष्ठ अधिकारियों पर आर्थिक दंड लगाने और अन्य कर्मचारियों को चेतावनी देने का निर्णय लिया गया। साथ ही, बोर्ड ने निर्देश दिया कि इस मामले की जानकारी भारतीय रिजर्व बैंक को भी भेजी जाए।


मीडिया रिपोर्टों का संदर्भ

इस वर्ष मई में कुछ मीडिया रिपोर्टों में यह दावा किया गया था कि एचडीएफसी बैंक ने महाराष्ट्र राज्य सड़क विकास निगम से बड़ी जमा राशि आकर्षित करने के लिए लगभग 45 करोड़ रुपये का भुगतान किया था। रिपोर्टों के अनुसार, इस राशि को विपणन खर्च के रूप में दर्ज किया गया था और यह भी कहा गया था कि बैंक के शीर्ष प्रबंधन को इसकी जानकारी थी।


बैंक का स्पष्टीकरण

एचडीएफसी बैंक ने इन आरोपों का खंडन करते हुए कहा था कि उसके पास मजबूत आंतरिक निगरानी और नियंत्रण व्यवस्था है। बैंक का कहना था कि सभी मामलों का निपटारा निर्धारित नियमों और प्रक्रियाओं के अनुसार किया जाता है।


शेयर बाजार पर प्रभाव

इस घटनाक्रम का असर बैंक के शेयरों पर भी देखने को मिला। कारोबार समाप्त होने पर एचडीएफसी बैंक का शेयर राष्ट्रीय शेयर बाजार में लगभग 0.40 प्रतिशत की गिरावट के साथ 740 रुपये पर बंद हुआ। पिछले एक महीने में बैंक के शेयर में लगभग 7.34 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है। निवेशकों की नजर अब भारतीय रिजर्व बैंक की प्रतिक्रिया और बैंक द्वारा उठाए जाने वाले कदमों पर है।