एन चंद्रशेखरन को टाटा संस का चेयरमैन फिर से नियुक्त किया गया
एन चंद्रशेखरन की पुनर्नियुक्ति
टाटा संस ने एन चंद्रशेखरन को अगले पांच वर्षों के लिए चेयरमैन के रूप में फिर से नियुक्त करने का निर्णय लिया है। टाटा संस, टाटा समूह की प्रमुख कंपनी है, और चंद्रशेखरन वर्तमान में समूह के कार्यकारी अध्यक्ष हैं। यह उनके लिए चेयरमैन के रूप में तीसरा कार्यकाल होगा, और कंपनी के बोर्ड ने उनकी नियुक्ति को मंजूरी दे दी है। यह जानकारी विभिन्न समाचार स्रोतों द्वारा साझा की गई है। यह निर्णय तब आया है जब चंद्रशेखरन ने अपने तीसरे कार्यकाल के लिए अनिच्छा व्यक्त की थी।
इस निर्णय के बाद, यह चर्चा शुरू हो गई थी कि चंद्रशेखरन के उत्तराधिकारी कौन होंगे, क्योंकि उनका मौजूदा कार्यकाल 20 फरवरी 2027 को समाप्त होगा। हालाँकि, गुरुवार को मुंबई में टाटा संस की बोर्ड बैठक में उनके तीसरे कार्यकाल पर मुहर लगाई गई।
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने 11 सितंबर को टाटा संस के गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनी (NBFC) के रूप में पंजीकरण को सरेंडर करने के आवेदन को अस्वीकार कर दिया था। इसके अनुसार, कंपनी को तीन वर्षों के भीतर सूचीबद्ध होना आवश्यक था, और यह समय सीमा सितंबर 2025 में समाप्त हो रही है।
वहीं, कोर इन्वेस्टमेंट कंपनी के रूप में पंजीकरण रद्द करने का आवेदन अभी भी लंबित है। आरबीआई के इस कदम के बाद ही चंद्रशेखरन की नियुक्ति को मंजूरी मिली है, क्योंकि टाटा संस पिछले एक वर्ष से मार्केट लिस्टिंग से बचने का प्रयास कर रहा है।
नोएल टाटा का विरोध
नोएल टाटा ने किया विरोध
पिछले वर्ष, टाटा ट्रस्ट्स ने चंद्रशेखरन के कार्यकाल को पांच साल बढ़ाने का प्रस्ताव पारित किया था। फरवरी में हुई बोर्ड बैठक में नोएल टाटा को छोड़कर चार निदेशकों ने उनके कार्यकाल विस्तार का समर्थन किया। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, गुरुवार को भी टाटा ट्रस्ट्स के अध्यक्ष नोएल टाटा ने चंद्रशेखरन की पुनर्नियुक्ति के खिलाफ वोट दिया, लेकिन प्रस्ताव बहुमत से पारित हो गया।
क्या चंद्रशेखरन अपने निर्णय पर पुनर्विचार करेंगे?
क्या अपने फैसले पर विचार करेंगे चंद्रशेखरन?
टाटा संस में टाटा ट्रस्ट्स की लगभग 66 प्रतिशत हिस्सेदारी है, जबकि 18 प्रतिशत हिस्सेदारी शापूरजी पालोनजी समूह के पास है, जो टाटा संस की मार्केट लिस्टिंग के पक्ष में है। माना जा रहा है कि अब निदेशक मंडल की नामांकन और पारिश्रमिक समिति चंद्रशेखरन से अपने निर्णय पर पुनर्विचार करने का अनुरोध करेगी। इसके अलावा, यह भी संभावना है कि बोर्ड के ताजा निर्णय के बाद सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट नए चेयरमैन की चयन प्रक्रिया को रोक या समाप्त कर सकता है।