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एन चंद्रशेखरन ने टाटा संस के चेयरमैन पद से दिया इस्तीफा

एन चंद्रशेखरन ने टाटा संस के चेयरमैन पद से इस्तीफा दे दिया है, जो 18 अगस्त को होने वाली वार्षिक आम बैठक से पहले आया है। उन्होंने अपने कार्यकाल के अंत के बाद पुनर्नियुक्ति की इच्छा नहीं जताई है। उनके इस्तीफे के बाद टाटा ग्रुप की कंपनियों के शेयरों में गिरावट आई है। जानें इस घटनाक्रम के पीछे की वजहें और टाटा ग्रुप के भविष्य पर इसका प्रभाव क्या होगा।
 

चंद्रशेखरन का इस्तीफा और भविष्य की योजनाएं

एन चंद्रशेखरन ने बुधवार को टाटा संस के चेयरमैन के पद से इस्तीफा देने की घोषणा की। कंपनी की वार्षिक आम बैठक 18 अगस्त को निर्धारित है। एक आधिकारिक बयान में चंद्रशेखरन ने कहा कि उन्होंने टाटा ग्रुप में अपने 40 साल के करियर को पूरा कर लिया है और इस प्रतिष्ठित संगठन में योगदान देने के लिए आभारी हैं। उन्होंने अपने इस्तीफे के पत्र में स्पष्ट किया कि वह 20 फरवरी, 2027 को समाप्त होने वाले अपने कार्यकाल के बाद पुनर्नियुक्ति के लिए अपना नाम नहीं देंगे। उन्होंने बोर्ड से अनुरोध किया है कि वे उत्तराधिकार के मुद्दे पर जल्द निर्णय लें ताकि कार्यभार का सुचारू हस्तांतरण हो सके।




चंद्रशेखरन 2017 से टाटा संस का नेतृत्व कर रहे हैं। उनके इस्तीफे से भारत के प्रमुख बिजनेस समूहों में से एक, टाटा ग्रुप की होल्डिंग कंपनी में नेतृत्व परिवर्तन होगा। टाटा संस 30 से अधिक कंपनियों का संचालन करती है, जिनमें टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज़, टाटा मोटर्स और एयर इंडिया शामिल हैं। चंद्रशेखरन के इस्तीफे के बाद टाटा ग्रुप की कंपनियों के शेयरों में गिरावट आई है; TCS, टाटा स्टील और टाटा पावर के शेयरों में भी कमी देखी गई।




चंद्रशेखरन का वर्तमान कार्यकाल 20 फरवरी, 2027 तक है, लेकिन उन्होंने स्पष्ट किया है कि वह फिर से नियुक्ति नहीं चाहेंगे। उन्होंने कहा कि टाटा संस के चेयरमैन के रूप में उनका कार्यकाल 20 फरवरी, 2027 को समाप्त हो रहा है। उनका इस्तीफा शेयरहोल्डर्स के साथ तनाव और चंद्रशेखरन तथा टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन नोएल टाटा के बीच मतभेदों के संदर्भ में आया है। चंद्रशेखरन ने कहा कि सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट और सर रतन टाटा ट्रस्ट ने सर्वसम्मति से उनके अगले कार्यकाल को पांच साल के लिए बढ़ाने की सिफारिश की थी।




यह घटनाक्रम 18 अगस्त को होने वाली टाटा संस की वार्षिक आम बैठक से कुछ दिन पहले हुआ है, जिसमें शेयरहोल्डर डायरेक्टर के रूप में चंद्रशेखरन की पुनर्नियुक्ति पर मतदान किया जाएगा। चंद्रशेखरन के पद पर बने रहने का मुद्दा पहले से ही समूह के भीतर तनाव का कारण बना हुआ था। रिपोर्टों के अनुसार, फरवरी में नोएल टाटा द्वारा चंद्रशेखरन की पुनर्नियुक्ति का विरोध किए जाने के बाद टाटा संस ने उनके कार्यकाल को बढ़ाने का निर्णय टाल दिया था।