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एयर इंडिया की नई रणनीति: खर्चों में कटौती और कर्मचारियों की भागीदारी

एयर इंडिया ने अपने बढ़ते खर्चों और नुकसान को कम करने के लिए नई रणनीतियाँ अपनाई हैं। CEO तेवोल्डे गेब्रेमेरियम ने कर्मचारियों से अपील की है कि वे खर्च बचाने और कार्यप्रणाली में सुधार में सक्रिय भागीदारी करें। कंपनी ने 'वन एयर इंडिया' एकीकरण योजना के तहत विभागों के एकीकरण और खर्चों की मंजूरी प्रक्रिया में बदलाव की घोषणा की है। इसके साथ ही, कर्मचारियों के सुझावों को प्रोत्साहित करने के लिए 'प्रभाव-वैल्यू क्रिएटर अवॉर्ड' पहल शुरू की गई है। जानें कैसे ये कदम एयर इंडिया की सेवा की गुणवत्ता को बनाए रखते हुए खर्चों को कम करने में मदद करेंगे।
 

एयर इंडिया की खर्चों में कटौती की योजना

टाटा समूह की एयर इंडिया वर्तमान में अपने बढ़ते खर्चों और लगातार हो रहे नुकसान को कम करने के लिए सक्रिय है। कंपनी ने खर्चों पर नियंत्रण, कार्यप्रणाली में सुधार और कर्मचारियों की जिम्मेदारी बढ़ाने की योजना बनाई है। एयर इंडिया के CEO तेवोल्डे गेब्रेमेरियम ने एक आंतरिक संदेश में बताया कि मौजूदा कठिनाइयों के बीच, हर कर्मचारी को खर्च बचाने और कार्यप्रणाली को बेहतर बनाने में योगदान देना होगा।


चुनौतियों का सामना

सोमवार को कर्मचारियों के साथ साझा किए गए संदेश में गेब्रेमेरियम ने कहा कि कंपनी के कार्यों में खर्च के प्रति सावधानी, सादगी और जिम्मेदारी को शामिल करना आवश्यक है। विमानन क्षेत्र विभिन्न चुनौतियों का सामना कर रहा है, जैसे हवाई मार्गों पर पाबंदियाँ, मध्य पूर्व में संघर्ष और विमान ईंधन की बढ़ती कीमतें। इन परिस्थितियों में एयर इंडिया के लिए खर्च कम करना और संसाधनों का सही उपयोग करना अत्यंत महत्वपूर्ण हो गया है।


संरचना में बदलाव

सूत्रों के अनुसार, एयर इंडिया और एयर इंडिया एक्सप्रेस की कुछ इकाइयों के विभागों को एकीकृत करने की योजना है। यह कदम 'वन एयर इंडिया' एकीकरण योजना के तहत उठाया जा सकता है। इसके साथ ही, खर्चों की समीक्षा के लिए विभिन्न विभागों के सदस्यों की एक स्थायी टीम बनाई जाएगी। यह टीम कंपनी के सभी विभागों में होने वाले खर्चों का मूल्यांकन करेगी और उन तरीकों की पहचान करेगी, जिनसे कार्य की गुणवत्ता बनाए रखते हुए लागत को कम किया जा सके। गेब्रेमेरियम ने कर्मचारियों से इस टीम को पूरा सहयोग देने की अपील की है।


खर्चों की मंजूरी प्रक्रिया में बदलाव

उन्होंने अपने संदेश में कहा कि खर्चों को कम करने की जिम्मेदारी केवल किसी एक टीम या विभाग की नहीं हो सकती। इसके लिए सभी कर्मचारियों की सक्रिय भागीदारी और प्रतिबद्धता आवश्यक है। कंपनी ने खर्चों की मंजूरी प्रक्रिया में भी बदलाव किया है। 1 अक्टूबर से सभी मंजूरियां विभाग प्रमुखों, CEO और मुख्य कार्यकारी अधिकारियों के माध्यम से दी जाएंगी। इस बदलाव का उद्देश्य खर्चों पर निगरानी बढ़ाना और निर्णयों की जिम्मेदारी तय करना है।


नए पुरस्कार और सुझावों की पहल

खर्चों में कटौती के प्रयासों को कर्मचारियों से जोड़ने के लिए एयर इंडिया ने 'प्रभाव-वैल्यू क्रिएटर अवॉर्ड' नामक एक नई पहल शुरू की है। इसके तहत कर्मचारी ऐसे सुझाव दे सकेंगे, जो खर्च कम करने, कार्य में तेजी लाने और आय बढ़ाने में मदद कर सकें। इसमें संसाधनों का बेहतर उपयोग, कार्यप्रणाली में सुधार, प्रक्रियाओं को सरल बनाना, ठेकों की शर्तों पर पुनर्विचार, खरीद प्रक्रिया में बचत और बर्बादी कम करने जैसे सुझाव शामिल होंगे।


सुझावों की प्रक्रिया

कर्मचारी कंपनी की मौजूदा सेवाओं और सुविधाओं से अधिक आय उत्पन्न करने या नए व्यापार के अवसरों की खोज से संबंधित विचार भी साझा कर सकते हैं। सभी सुझावों की एक निर्धारित प्रक्रिया के तहत समीक्षा की जाएगी और जिन विचारों को लागू करना संभव होगा, उन्हें सम्मानित किया जाएगा। सुझाव जमा करने की प्रक्रिया की जानकारी अलग से दी जाएगी।


छोटे सुधारों का बड़ा प्रभाव

गेब्रेमेरियम ने कहा कि बड़े संगठनों में छोटे-छोटे सुधार भी मिलकर बड़ा प्रभाव डाल सकते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि कई बार कार्य को करीब से समझने वाले कर्मचारियों के पास सबसे उपयोगी सुझाव होते हैं। उनके अनुसार, बचाया गया हर रुपया कंपनी के संचालन, सेवाओं, यात्रियों के अनुभव और भविष्य की वृद्धि को मजबूत करने में मदद कर सकता है। एयर इंडिया के सामने खर्च कम करने के साथ-साथ सेवा की गुणवत्ता बनाए रखने की चुनौती भी है, इसलिए कंपनी की नई योजना में कर्मचारियों की भागीदारी महत्वपूर्ण मानी जा रही है।