एयर इंडिया ने ईंधन अधिभार में की कटौती, पश्चिम एशिया के लिए उड़ानें बहाल
एयर इंडिया ने जुलाई की शुरुआत में अपने लंबी दूरी की अंतरराष्ट्रीय उड़ानों पर ईंधन अधिभार में कटौती की है, जो कच्चे तेल की कीमतों में कमी के कारण संभव हुआ। इसके साथ ही, एयर इंडिया एक्सप्रेस ने पश्चिम एशिया के लिए अपनी उड़ान सेवाएँ फिर से शुरू की हैं। यह बदलाव यात्रियों के लिए राहत लेकर आया है, जिससे पर्यटन और व्यापार में वृद्धि की उम्मीद है। जानें इस निर्णय के पीछे के कारण और इसके संभावित प्रभाव।
Jul 2, 2026, 21:05 IST
एयर इंडिया की नई उड़ान नीतियाँ
जुलाई की शुरुआत में हवाई यात्रा करने वालों के लिए एक सकारात्मक समाचार आया है। एयर इंडिया ने अपनी लंबी दूरी की अंतरराष्ट्रीय उड़ानों पर ईंधन अधिभार में कमी की है। यह निर्णय कच्चे तेल की कीमतों में आई गिरावट और अंतरराष्ट्रीय बाजार में स्थिरता के चलते लिया गया है। इसके साथ ही, एयर इंडिया एक्सप्रेस ने पश्चिम एशिया के सभी प्रमुख गंतव्यों के लिए अपनी उड़ान सेवाओं को पूरी तरह से पुनः आरंभ करने की घोषणा की है।
कच्चे तेल की कीमतों में कमी का प्रभाव
हाल के दिनों में अमेरिका और ईरान के बीच संघर्ष विराम के बाद वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में कमी आई है। इसका प्रभाव विमान ईंधन की लागत पर भी पड़ा है, जिसके कारण एयर इंडिया ने अपने यात्रियों को राहत देते हुए ईंधन अधिभार में कटौती की है।
ईंधन अधिभार में कमी के नए दर
जानकारी के अनुसार, एयर इंडिया की उत्तर अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया की उड़ानों पर पहले 280 अमेरिकी डॉलर तक ईंधन अधिभार लिया जाता था, जिसे अब घटाकर 200 अमेरिकी डॉलर कर दिया गया है। इसी तरह, ब्रिटेन और यूरोप की उड़ानों पर पहले 205 अमेरिकी डॉलर का अधिभार था, जिसे अब 125 अमेरिकी डॉलर कर दिया गया है। यात्रा उद्योग के विशेषज्ञों का कहना है कि यह बदलाव 1 जुलाई से लागू हो चुका है और इसका असर टिकट बुकिंग में दिखने लगा है।
पाकिस्तान के हवाई क्षेत्र का प्रभाव
यह ध्यान देने योग्य है कि एयर इंडिया भारत की एकमात्र एयरलाइन है जो उत्तर अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया के लिए सीधी उड़ानें संचालित करती है। हालांकि, पिछले 14 महीनों से पाकिस्तान का हवाई क्षेत्र बंद रहने के कारण एयर इंडिया की लंबी दूरी की उड़ानों पर अतिरिक्त दबाव बना हुआ है। पाकिस्तान के हवाई क्षेत्र का उपयोग न कर पाने के कारण उड़ानों का मार्ग लंबा हो गया है, जिससे ईंधन की खपत और परिचालन लागत दोनों में वृद्धि हुई है।
भविष्य की संभावनाएँ
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि पाकिस्तान का हवाई क्षेत्र खुल जाता है, तो एयर इंडिया अपनी लंबी दूरी की उड़ानों की संख्या बढ़ाने और किरायों में अधिक राहत देने में सक्षम हो सकती थी। लेकिन वर्तमान परिस्थितियों में कंपनी को संचालन लागत और व्यावसायिक चुनौतियों के बीच संतुलन बनाना पड़ रहा है।
एयर इंडिया के वित्तीय हालात
पिछले वित्तीय वर्ष में एयर इंडिया को कई कारणों से रिकॉर्ड घाटा हुआ था, जिसमें लंबी दूरी की उड़ानों की बढ़ती लागत भी शामिल है। इसी कारण टाटा समूह ने एयर इंडिया के विस्तार की गति को धीमा करने का निर्णय लिया है। कंपनी में जल्द ही नए मुख्य कार्यकारी अधिकारी की नियुक्ति की संभावना है, क्योंकि मौजूदा मुख्य कार्यकारी अधिकारी कैंपबेल विल्सन जल्द ही पद छोड़ने वाले हैं।
एयर इंडिया एक्सप्रेस की उड़ान सेवाएँ
इस बीच, एयर इंडिया एक्सप्रेस ने यात्रियों के लिए अच्छी खबर दी है। कंपनी ने पश्चिम एशिया के सभी गंतव्यों के लिए अपनी उड़ान सेवाएँ फिर से शुरू करने की घोषणा की है। कोझिकोड से सलालाह के बीच उड़ानें 2 जुलाई से शुरू हो गई हैं, जबकि कोझिकोड से कुवैत के लिए सेवाएँ 3 जुलाई से बहाल की जाएंगी। बेंगलुरु से कुवैत के लिए उड़ानें 4 जुलाई से शुरू होंगी, और आने वाले दिनों में इन मार्गों पर उड़ानों की संख्या भी बढ़ाई जाएगी।
अंतरराष्ट्रीय यात्रियों के लिए राहत
विशेषज्ञों का कहना है कि ईंधन अधिभार में कमी और पश्चिम एशिया के मार्गों पर उड़ानों की बहाली से अंतरराष्ट्रीय यात्रियों को राहत मिलेगी। इसके साथ ही, पर्यटन, व्यापार और प्रवासी भारतीयों की आवाजाही भी पहले की तुलना में अधिक आसान होने की उम्मीद है।