एयर प्यूरीफायर और कार्बन क्रेडिट: क्या सच में पर्यावरण की रक्षा कर रहे हैं?
प्रदूषण की समस्या और कार्बन क्रेडिट
दुनिया में प्रदूषण एक गंभीर चुनौती बन चुका है। कार्बन डाइऑक्साइड (CO₂) और अन्य ग्रीनहाउस गैसों (GHG) को कम करने के लिए कई उपाय अपनाए जा रहे हैं। इनमें से एक प्रमुख उपाय है कार्बन क्रेडिट, जिसे मुख्य रूप से वे उद्योग खरीदते हैं जो अधिक मात्रा में GHG या कार्बन का उत्सर्जन करते हैं। इन उद्योगों को प्रदूषण कम करने के लिए कानूनी या स्वैच्छिक लक्ष्यों को पूरा करना आवश्यक होता है।
एयर प्यूरीफायर का बढ़ता बाजार
भारत में प्रदूषण के बढ़ने के साथ एयर प्यूरीफायर का बाजार तेजी से बढ़ रहा है। एयर प्यूरीफायर बनाने वाली कंपनियां लोगों को साफ हवा देने का वादा करती हैं। लेकिन क्या ये कंपनियां अपनी जिम्मेदारी निभा रही हैं? क्या उन्हें भी कार्बन क्रेडिट खरीदना चाहिए?
कार्बन क्रेडिट का तंत्र
एक कार्बन क्रेडिट का अर्थ है कि धारक को 1 टन CO₂ या उसके समकक्ष GHG उत्सर्जित करने की अनुमति है। जो कंपनियां जैसे सौर या पवन ऊर्जा का उपयोग करती हैं, वे कार्बन क्रेडिट अर्जित करती हैं। वहीं, जो कंपनियां तय सीमा से अधिक प्रदूषण करती हैं, वे कम प्रदूषण करने वाली कंपनियों से क्रेडिट खरीदती हैं।
क्या एयर प्यूरीफायर ग्रीन हैं?
सर्दियों में एयर प्यूरीफायर की बिक्री में अचानक वृद्धि होती है। ये मशीनें 'साफ हवा' और '99.9% बैक्टीरिया-फ्री' जैसे वादे करती हैं। लेकिन क्या ये वास्तव में पर्यावरण के लिए लाभकारी हैं? सामान्यतः, एयर प्यूरीफायर बनाने वाली कंपनियां कार्बन क्रेडिट नहीं खरीदती हैं।
कार्बन क्रेडिट की वास्तविकता
कई लोग मानते हैं कि एयर प्यूरीफायर पर्यावरण की रक्षा कर रहे हैं, लेकिन सच्चाई यह है कि ये केवल स्थानीय प्रदूषकों को ही हटाते हैं। कार्बन क्रेडिट तभी मिलता है जब CO₂ या GHG की मात्रा को मापने योग्य तरीके से कम किया जाए। भारत में एयर प्यूरीफायर से कार्बन क्रेडिट जनरेट करने के लिए कोई मान्यता प्राप्त नियम नहीं हैं।
कंपनियों की ESG रिपोर्टिंग
कंपनियां अपनी रिपोर्टों में पर्यावरण संरक्षण के बड़े दावे करती हैं, लेकिन एयर प्यूरीफायर से उनके संबंध को समझना आवश्यक है। Eureka Forbes ने अपने कार्बन उत्सर्जन में 4% की कमी की है, लेकिन यह उनकी फैक्ट्रियों के कारण है, न कि बेचे गए एयर प्यूरीफायर्स के कारण। Philips, Coway और Xiaomi जैसी कंपनियां भी कार्बन न्यूट्रैलिटी के लक्ष्य रखती हैं, लेकिन उनके प्यूरीफायर सीधे कार्बन क्रेडिट नहीं देते।