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एलपीजी गैस सिलेंडर की कीमतों में भारी उछाल: जानें क्या है इसका असर?

हाल ही में, देशभर में एलपीजी गैस सिलेंडर की कीमतों में भारी वृद्धि हुई है, जिससे कमर्शियल गैस सिलेंडर की कीमतें 3000 रुपये के पार पहुंच गई हैं। हालांकि, घरेलू रसोई गैस के दाम स्थिर हैं। इस बढ़ोतरी का सीधा असर होटल और रेस्टोरेंट पर पड़ेगा, जिससे खाद्य पदार्थों की कीमतों में वृद्धि की संभावना है। जानें इस बदलाव के पीछे के कारण और इसके प्रभाव के बारे में।
 

एलपीजी गैस सिलेंडर की कीमतों में बदलाव


नई दिल्ली: देशभर में एलपीजी गैस सिलेंडर की कीमतों में महत्वपूर्ण परिवर्तन हुआ है। 1 मई 2026 से सरकारी तेल कंपनियों ने 19 किलो के कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर के दाम में भारी वृद्धि की घोषणा की है, जिसका प्रभाव बाजार और उपभोक्ताओं पर स्पष्ट रूप से देखा जा रहा है।


इस वृद्धि के बाद, प्रमुख शहरों में कमर्शियल गैस सिलेंडर की कीमतें 3000 रुपये के स्तर को पार कर गई हैं। हालांकि, घरेलू रसोई गैस (14.2 किलो) के दामों में कोई बदलाव नहीं किया गया है, जिससे आम परिवारों को फिलहाल राहत मिली है।


कमर्शियल सिलेंडर की कीमत में 993 रुपये की वृद्धि

सरकारी तेल कंपनियों ने 19 किलो वाले कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की कीमत में 993 रुपये की वृद्धि की है। अब दिल्ली में एक कमर्शियल सिलेंडर की कीमत 3071.50 रुपये हो गई है, जबकि 1 अप्रैल को यह 2078.50 रुपये थी। इस प्रकार, एक महीने में लगभग 1000 रुपये की वृद्धि हुई है।


होटल और रेस्टोरेंट पर प्रभाव

कमर्शियल सिलेंडर की कीमतों में वृद्धि से होटल, रेस्टोरेंट और खाद्य उद्योग पर सीधा असर पड़ेगा। इससे खाने-पीने की वस्तुओं की कीमतों में बढ़ोतरी की संभावना है। इसके अलावा, स्ट्रीट फूड की कीमतें भी बढ़ सकती हैं, जिससे आम जनता की जेब पर अतिरिक्त बोझ पड़ सकता है।


घरेलू गैस सिलेंडर की कीमतें स्थिर

कमर्शियल गैस की कीमतें बढ़ने के बावजूद घरेलू रसोई गैस के दाम स्थिर बने हुए हैं। रसोई गैस की कीमतों में आखिरी बार 7 मार्च को वृद्धि की गई थी।


  • दिल्ली में कीमत: 913 रुपये
  • मुंबई में कीमत: 912.50 रुपये
  • चेन्नई में कीमत: 928.50 रुपये
  • कोलकाता में कीमत: 939 रुपये
  • ईरान-अमेरिका तनाव का प्रभाव


अंतरराष्ट्रीय कारणों का प्रभाव

गैस की कीमतों में इस वृद्धि के पीछे अंतरराष्ट्रीय कारण भी जिम्मेदार माने जा रहे हैं। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के कारण होर्मुज जलडमरूमध्य का मार्ग प्रभावित हुआ है, जहां से भारत बड़े पैमाने पर तेल और गैस का आयात करता है।


इस मार्ग में रुकावट के कारण आपूर्ति प्रभावित हुई है, जिससे भारत को अन्य देशों से आयात बढ़ाना पड़ा है। इससे लागत में वृद्धि हुई और आपूर्ति पर दबाव बढ़ा, जिसका सीधा असर गैस की कीमतों पर पड़ा है।