एसी निर्माताओं की चिंता: बेमौसम बारिश और कच्चे माल की कीमतों में वृद्धि
बेमौसम बारिश से एसी की मांग पर असर
हाल ही में देश के विभिन्न हिस्सों में हुई बेमौसम बारिश ने एयर कंडीशनर (एसी) बनाने वाली कंपनियों को चिंतित कर दिया है। इन कंपनियों को डर है कि इससे गर्मी के मौसम की शुरुआत में एसी की मांग में कमी आ सकती है, जो कि उनकी बिक्री के लिए एक महत्वपूर्ण समय होता है।
उद्योग के विशेषज्ञों का मानना है कि चिंता केवल मौसम तक सीमित नहीं है। पश्चिम एशिया में चल रहे तनाव के कारण कच्चे माल, विशेषकर प्लास्टिक की कीमतों में वृद्धि हो रही है। इसके साथ ही, एलपीजी गैस की आपूर्ति में कमी भी उत्पादन को प्रभावित कर रही है।
उपकरणों की कीमतों में संभावित वृद्धि
कंपनियों का कहना है कि महंगे प्लास्टिक के कारण वॉशिंग मशीन और फ्रिज जैसे बड़े घरेलू उपकरणों की कीमतें 10 से 12 प्रतिशत तक बढ़ सकती हैं। आमतौर पर मार्च में गर्मी बढ़ने लगती है और ठंडक देने वाले उत्पादों की मांग में तेजी आती है, लेकिन इस बार मौसम के बदलाव ने कंपनियों को असमंजस में डाल दिया है। हालांकि, उन्हें उम्मीद है कि अप्रैल में तापमान बढ़ेगा और मांग में सुधार होगा।
गोदरेज एंटरप्राइजेज के उपकरण कारोबार के प्रमुख कमल नंदी ने बताया कि अगले सप्ताह दिल्ली और उत्तर भारत में तापमान में वृद्धि के संकेत हैं।
उत्पादन में कमी की संभावना
नंदी ने कहा कि बिक्री पर प्रभाव के बारे में अभी कुछ कहना जल्दबाजी होगी। उन्होंने यह भी बताया कि कंपनियों ने पहले ही इस साल कीमतें बढ़ाई हैं, जब जनवरी से नए ऊर्जा लेबलिंग नियम लागू हुए। अब कच्चे माल और परिवहन लागत में वृद्धि के कारण अप्रैल में फिर से कीमतें बढ़ने की संभावना है। गोदरेज ने एसी की कीमतों में 5 से 10 प्रतिशत की वृद्धि का संकेत दिया है।
हायर इंडिया के अध्यक्ष एन. एस. सतीश ने बताया कि कारखानों को मिलने वाली एलपीजी गैस की आपूर्ति में कमी की गई है। यदि यह स्थिति बनी रहती है, तो गर्मी के व्यस्त सीजन से पहले उत्पादन में 20 से 30 प्रतिशत तक कटौती करनी पड़ सकती है।
ग्राहकों पर असर
सरकार ने घरेलू रसोई गैस को प्राथमिकता देने के लिए उद्योगों को मिलने वाली एलपीजी आपूर्ति को उनकी औसत खपत के 80 प्रतिशत से घटाकर 65 प्रतिशत कर दिया है। इससे एसी निर्माण में इस्तेमाल होने वाली प्रक्रियाओं पर असर पड़ रहा है।
सतीश ने कहा कि महंगे प्लास्टिक के कारण कंपनियों की लागत बढ़ रही है, जिसका प्रभाव ग्राहकों पर पड़ेगा। उन्होंने बताया कि वॉशिंग मशीन की कुल लागत का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा प्लास्टिक का होता है, इसलिए कीमतें बढ़ाना आवश्यक हो गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि कीमतों में वृद्धि होने पर ग्राहक महंगे मॉडल के बजाय सस्ते या कम क्षमता वाले उत्पाद खरीदने की संभावना रखते हैं।