☰
×

ओडिशा में 25,000 करोड़ रुपये की कोयला गैसीकरण परियोजना का निर्माण शुरू

भारत कोल गैसीकरण एंड केमिकल्स लिमिटेड (बीसीजीसीएल) ने ओडिशा में 25,000 करोड़ रुपये की कोयला गैसीकरण परियोजना का निर्माण कार्य शुरू कर दिया है। यह परियोजना कोल इंडिया और बीएचईएल के सहयोग से विकसित की जा रही है, जिसका उद्देश्य 2030 तक 10 करोड़ टन कोयला गैसीकरण क्षमता हासिल करना है। इस परियोजना से सालाना 6.6 लाख टन अमोनियम नाइट्रेट का उत्पादन होगा, जिससे देश की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूती मिलेगी।
 

ओडिशा में कोयला गैसीकरण परियोजना की शुरुआत

भारत कोल गैसीकरण एंड केमिकल्स लिमिटेड (बीसीजीसीएल) के प्रबंध निदेशक पीयूष कुमार ने बताया कि ओडिशा में 25,000 करोड़ रुपये की कोयला से गैस बनाने वाली परियोजना का निर्माण कार्य शुरू हो चुका है। यह परियोजना कोल इंडिया लिमिटेड और भारत हेवी इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड (बीएचईएल) के सहयोग से स्थापित की गई है। यह राष्ट्रीय कोयला गैसीकरण मिशन के तहत 2030 तक 10 करोड़ टन कोयला गैसीकरण क्षमता विकसित करने के लिए महत्वपूर्ण है।


कुमार ने मिशन एनर्जी फाउंडेशन के 17वें गैसीफिकेशन इंडिया 2026 कार्यक्रम में कहा, "हम भेल और कोल इंडिया के संयुक्त उद्यम बीसीजीसीएल के तहत आगे बढ़ रहे हैं। निर्माण कार्य अब शुरू हो चुका है।"


उन्होंने बताया कि अधिकांश ठेके पहले ही दिए जा चुके हैं और निर्माण कार्य प्रारंभ हो चुका है। बीसीजीसीएल को अत्याधुनिक कोयला-से-अमोनियम नाइट्रेट परियोजना विकसित करने के लिए स्थापित किया गया है, जिसमें कोल इंडिया की 51 प्रतिशत हिस्सेदारी है, जबकि बीएचईएल के पास 49 प्रतिशत हिस्सेदारी है।


कुमार ने यह भी बताया कि लगभग 15,000 करोड़ रुपये के ठेके पहले ही दिए जा चुके हैं, जबकि बाकी कार्यों के लिए अनुबंध अभी दिए जाने हैं। परियोजना की कुल लागत में ब्याज, मूल्यह्रास और भूमि से संबंधित अन्य खर्च शामिल हैं।


उन्होंने कहा, "इस 25,000 करोड़ रुपये की परियोजना में से 15,000 करोड़ रुपये के ठेके पहले ही दिए जा चुके हैं। इसमें से 10,000 करोड़ रुपये का कार्य भेल को और 5,000 करोड़ रुपये का कार्य लार्सन एंड टुब्रो (एलएंडटी) को सौंपा गया है।"


इस परियोजना का मुख्य उद्देश्य कोयला गैसीकरण के माध्यम से सालाना लगभग 6.6 लाख टन तकनीकी श्रेणी के अमोनियम नाइट्रेट का उत्पादन करना है।


ओडिशा में स्थापित की जा रही इस परियोजना को राज्य सरकार के उच्चस्तरीय मंजूरी प्राधिकरण से एकल अनुमति व्यवस्था के तहत स्वीकृति प्राप्त हो चुकी है।