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कच्चे तेल की कीमतें बढ़ने की आशंका: अमेरिका-ईरान संघर्ष का प्रभाव

अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतें 180 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंचने की संभावना है। ईरान के हमलों के चलते पश्चिम एशिया में अशांति का माहौल है, जिससे तेल उत्पादन और आपूर्ति प्रभावित हो रही है। भारत ने इराक से तेल आयात बढ़ाया है, जबकि रूस का स्थान भी महत्वपूर्ण बना हुआ है। जानें इस स्थिति का वैश्विक बाजार पर क्या असर पड़ सकता है।
 

कच्चे तेल की कीमतें 180 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकती हैं


कच्चे तेल की कीमतें 180 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकती हैं


बिजनेस डेस्क : अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर हमलों के जवाब में, ईरान ने खाड़ी देशों पर हमले शुरू कर दिए हैं। ईरान का दावा है कि ये हमले उन स्थानों पर किए जा रहे हैं, जिन्हें अमेरिका अपने सैन्य ठिकानों के रूप में उपयोग करता है। इन हमलों के कारण पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ गया है, जिससे तेल उत्पादन और आपूर्ति पर नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है। कई देशों में तेल की कमी स्पष्ट रूप से देखी जा रही है।


सऊदी अरब के अधिकारियों का मानना है कि यदि ईरान के साथ युद्ध और ऊर्जा संकट की स्थिति अप्रैल के अंत तक जारी रहती है, तो कच्चे तेल की कीमतें 180 डॉलर प्रति बैरल से अधिक हो सकती हैं। यह जानकारी एक रिपोर्ट में सामने आई है, जिसमें कहा गया है कि युद्ध के कारण तेल की आपूर्ति प्रभावित हो रही है, विशेषकर मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के कारण वैश्विक बाजार में अनिश्चितता बढ़ गई है।


भारत का तेल आयात: इराक की बढ़ती भूमिका

भारत के तेल आयात में हालिया बदलाव देखने को मिला है। फरवरी में, इराक ने रूस को पीछे छोड़ते हुए भारत का सबसे बड़ा तेल सप्लायर बन गया। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि मार्च में रूस फिर से पहले स्थान पर आ सकता है। फरवरी में रूस से तेल आयात में 32% की कमी आई, जिससे यह लगभग 10 लाख बैरल प्रतिदिन रह गया। वहीं, इराक से आयात बढ़कर 11.8 लाख बैरल प्रति दिन पहुंच गया। सऊदी अरब से भी आयात बढ़कर लगभग 9.98 लाख बैरल प्रति दिन हो गया।


इस दौरान, भारत के कुल तेल आयात में मध्य पूर्व की हिस्सेदारी बढ़कर 59% हो गई। फरवरी में, ब्राजील भारत का चौथा सबसे बड़ा तेल सप्लायर बनकर उभरा। वैश्विक तनाव और आपूर्ति में बदलाव के बीच, भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए विभिन्न देशों से तेल खरीदने की रणनीति अपना रहा है।


रूसी तेल का आयात क्यों बढ़ रहा है?

पश्चिम एशिया में तनाव और होर्मुज जलसंधि में बाधा के कारण आपूर्ति प्रभावित हुई है। इसके परिणामस्वरूप, भारत ने फिर से रूस से अधिक तेल खरीदना शुरू कर दिया है। मार्च में, रूस से तेल आयात बढ़कर 18 से 22 लाख बैरल प्रति दिन तक पहुंच सकता है। इसके पीछे अमेरिकी फैसले की भी महत्वपूर्ण भूमिका है, जिसमें भारत के लिए रूसी तेल पर कुछ प्रतिबंधों में छूट दी गई थी। विशेषज्ञों का कहना है कि सस्ती कीमत और स्थिर आपूर्ति के कारण रूस भारत की तेल आयात रणनीति में महत्वपूर्ण बना हुआ है।