कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि: अमेरिका और सऊदी अरब की चिंताएं
कच्चे तेल की कीमतों में तेजी
कच्चे तेल की कीमतों में एक बार फिर उछाल देखने को मिला है। बुधवार को ब्रेंट कच्चा तेल की कीमत 101 डॉलर प्रति बैरल के स्तर को पार कर गई। अमेरिका और सऊदी अरब से जुड़ी आपूर्ति संबंधी चिंताओं ने मध्य पूर्व से बढ़ती तेल आपूर्ति के कारण बनी राहत पर भारी असर डाला है। इसका प्रभाव भारत जैसे बड़े तेल आयातक देशों पर भी पड़ सकता है।
ब्रेंट कच्चा तेल की कीमत में वृद्धि
अंतरराष्ट्रीय बाजार में बुधवार को ब्रेंट कच्चा तेल 1.02% की वृद्धि के साथ 101.60 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया। इसी तरह, अमेरिकी वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट की कीमत 1.05% बढ़कर 90.38 डॉलर प्रति बैरल हो गई। यह वृद्धि ऐसे समय में हुई है जब मध्य पूर्व से तेल की आपूर्ति में सुधार के संकेत मिल रहे हैं।
अमेरिका में तूफान की आशंका
हालिया जानकारी के अनुसार, अमेरिका के मैक्सिको की खाड़ी में बन रहा एक तूफान तेल और गैस की आपूर्ति के लिए नई चिंता का कारण बन गया है। मौसम विशेषज्ञों का अनुमान है कि यह तूफान जल्द ही 2026 का पहला अटलांटिक तूफान बन सकता है। इसके रास्ते में अमेरिका के कई महत्वपूर्ण तेल और गैस क्षेत्र आ सकते हैं।
तूफान का संभावित प्रभाव
जहां तूफान का असर पड़ सकता है, वहां अमेरिका का लगभग 15% कच्चे तेल का उत्पादन होता है। इसके अलावा, देश के लगभग 5% प्राकृतिक गैस उत्पादन पर भी असर पड़ने की संभावना है। 6 तेल शोधन संयंत्र भी इसकी चपेट में आ सकते हैं, जो देश की कुल 18.2 मिलियन बैरल प्रतिदिन की शोधन क्षमता का लगभग 50% हिस्सा रखते हैं।
सऊदी अरब में तनाव
तेल बाजार के लिए चिंता केवल अमेरिका तक सीमित नहीं है। सऊदी अरब और यमन के बीच तनाव भी आपूर्ति को लेकर अनिश्चितता बढ़ा रहा है। सऊदी ऊर्जा मंत्री अब्दुलअजीज बिन सलमान ने हाल ही में कहा था कि देश से तेल की आपूर्ति बढ़ रही है। पूर्व-पश्चिम तेल पाइपलाइन के आंकड़ों के अनुसार, इसके जरिए लगभग 5.8 मिलियन बैरल प्रतिदिन तेल भेजा जा रहा है।
मध्य पूर्व से आपूर्ति
तेल कारोबार कंपनी विटोल के प्रमुख के अनुसार, पिछले 7 से 10 दिनों में मध्य पूर्व से टैंकरों के जरिए लगभग 12 मिलियन बैरल प्रतिदिन कच्चा तेल और 2 मिलियन बैरल प्रतिदिन तैयार पेट्रोलियम उत्पाद बाहर भेजे गए हैं। इससे बाजार में आपूर्ति को लेकर कुछ राहत मिली है, लेकिन नए जोखिम कीमतों को नीचे आने नहीं दे रहे हैं।
अमेरिका के भंडार के आंकड़े
अमेरिका से आए भंडार के आंकड़े भी स्पष्ट तस्वीर नहीं देते। बाजार सूत्रों के अनुसार, 2 अक्टूबर को समाप्त सप्ताह में अमेरिका का कच्चा तेल भंडार 2.09 मिलियन बैरल घटा। पेट्रोल का भंडार भी कम हुआ, जबकि डीजल जैसे उत्पादों का भंडार मामूली बढ़ा है। इससे बाजार में मांग और आपूर्ति को लेकर अलग-अलग संकेत मिल रहे हैं।
सऊदी अरब में हमले
सऊदी अरब में बढ़ते तनाव ने भी तेल बाजार की चिंता बढ़ाई है। सऊदी विमानन अधिकारियों के अनुसार, जाजान और नजरान के हवाई अड्डों पर हाल ही में हमले हुए। ये हमले सऊदी अरब और ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों के बीच बढ़ते संघर्ष के बीच हुए हैं।
क्षेत्रीय तनाव का प्रभाव
सऊदी समर्थित यमनी सरकारी बल हूतियों से क्षेत्र वापस लेने के लिए बड़ा सैन्य अभियान चला रहे हैं। कई सप्ताह तक हूतियों की बढ़त के बाद सऊदी अरब ने भी इस अभियान के समर्थन में हवाई हमले तेज किए हैं। ऐसे में क्षेत्रीय तनाव बढ़ने पर तेल आपूर्ति और शोधन व्यवस्था पर असर की आशंका बनी हुई है।
विश्लेषकों की राय
सिडनी स्थित एक्स एनालिस्ट्स के मुख्य तेल विश्लेषक मुकेश सहदेव ने कहा कि हमले और तेल शोधन संयंत्रों में रुकावटें कीमतों को ऊंचे स्तर पर बनाए रख सकती हैं। उनके अनुसार, यदि तनाव कम नहीं हुआ तो कच्चे तेल की कीमत लगभग 100 डॉलर के आसपास बनी रह सकती है।
ईरान के साथ तनाव
ईरान को लेकर अमेरिका और क्षेत्रीय देशों के बीच तनाव भी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। अमेरिकी राष्ट्रपति ने हाल ही में कहा कि ईरान में सत्ता किसके हाथ में है, इसे लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। वहीं, ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि अमेरिका को अच्छी तरह पता है कि ईरान में उसका बातचीत वाला पक्ष कौन है।
भविष्य की संभावनाएं
आने वाले दिनों में तेल बाजार की नजर अमेरिका के तूफान, मध्य पूर्व की स्थिति और प्रमुख तेल उत्पादक देशों से होने वाली आपूर्ति पर रहेगी। यदि आपूर्ति में बड़ी रुकावट आती है तो कीमतों पर और दबाव बढ़ सकता है, जबकि तनाव कम होने और उत्पादन सामान्य रहने पर बाजार को राहत मिल सकती है। भारत जैसे आयात पर निर्भर देशों के लिए कच्चे तेल की कीमतों में यह उतार-चढ़ाव विशेष रूप से महत्वपूर्ण हैं।