किराए पर रहने वालों के लिए टैक्स छूट: जानें कैसे बचाएं पैसे
किराए पर रहने वाले पेशेवरों के लिए टैक्स बचत के उपाय
किराए के मकान में रहने वाले पेशेवरों को टैक्स में छूट मिलती है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि बिना नौकरी के भी आप अपने भारी किराए पर टैक्स बचा सकते हैं? यदि आप फ्रीलांसर, कंसलटेंट, यूट्यूबर, डॉक्टर, वकील या छोटे व्यवसाय के मालिक हैं, तो आपके लिए भी सरकार ने टैक्स छूट का एक विशेष प्रावधान रखा है। आमतौर पर, यह धारणा होती है कि किराए की छूट केवल वेतनभोगियों को ही मिलती है, लेकिन यह पूरी तरह से सही नहीं है।
किस धारा के तहत मिलती है राहत
आयकर अधिनियम की धारा 80GG के अंतर्गत उन व्यक्तियों को टैक्स में राहत दी जाती है, जो किराए के मकान में निवास करते हैं लेकिन उन्हें किसी कंपनी से HRA प्राप्त नहीं होता। ध्यान देने योग्य बात यह है कि यह लाभ केवल पुरानी टैक्स व्यवस्था को चुनने वालों के लिए है; नई व्यवस्था अपनाने वाले इस छूट का लाभ नहीं उठा सकते। इस छूट का लाभ उठाने के लिए कुछ आवश्यक शर्तें पूरी करनी होती हैं।
क्या हैं शर्तें?
पहली शर्त यह है कि आपको किसी भी नियोक्ता से HRA नहीं मिलना चाहिए। दूसरी शर्त यह है कि आप वास्तव में उस आवासीय संपत्ति का किराया चुका रहे हों जिसमें आप निवास कर रहे हैं। इसके अलावा, आपके, आपके जीवनसाथी, नाबालिग बच्चों या आपके हिंदू अविभाजित परिवार के नाम पर उस शहर में कोई अपना मकान नहीं होना चाहिए जहां आप रहते हैं या काम करते हैं।
टैक्स छूट का दावा करने के लिए फॉर्म 10BA भरना अनिवार्य है। यह एक प्रकार का घोषणा-पत्र है, जिसके बिना आपका दावा खारिज हो सकता है। धारा 80GG के तहत मिलने वाली छूट की एक सीमा निर्धारित है, जो निम्नलिखित तीन राशियों में से जो भी सबसे कम होगी, के आधार पर की जाती है:
1. 5000 प्रति माह यानी 60,000 रुपये वार्षिक
2. आपकी कुल आय का 25%
3. चुकाया गया वास्तविक किराया कुल आय का 10%
उदाहरण के लिए, भले ही आप सालभर में कितना भी अधिक किराया देते हों, लेकिन अधिकतम छूट 60,000 रुपये वार्षिक तक ही सीमित हो सकती है। इस लाभ को प्राप्त करने के लिए रेंट एग्रीमेंट, किराए की रसीदें, बैंक स्टेटमेंट और यदि वार्षिक किराया 1 लाख रुपये से अधिक है तो मकान मालिक का पैन कार्ड जैसे दस्तावेज संभालकर रखें। सही तरीके से फॉर्म 10BA भरकर आप अपनी टैक्स देनदारी को काफी कम कर सकते हैं।