किसानों और उद्योगपतियों के कर्ज माफी में बड़ा अंतर: आंकड़े बताते हैं
कर्ज माफी पर बहस
कई बार यह चर्चा होती है कि उद्योगपतियों के कर्ज माफ कर दिए जाते हैं, जबकि किसान कर्ज के बोझ तले आत्महत्या कर लेते हैं। वर्तमान केंद्र सरकार को भी बड़े उद्योगपतियों के कर्ज माफ करने के कारण आलोचना का सामना करना पड़ा है। हाल ही में संसद में पूछे गए एक प्रश्न के उत्तर में यह जानकारी सामने आई है कि पिछले पांच वर्षों में किसानों के मुकाबले उद्योगपतियों का कर्ज 2.7 गुना अधिक माफ किया गया है। इस अवधि में कुल 4.39 लाख करोड़ रुपये का कर्ज माफ किया गया, जिसमें से 3.20 लाख करोड़ रुपये का कर्ज बड़ी कंपनियों का है। सरकारी बैंकों ने इस कर्ज का सबसे बड़ा हिस्सा माफ किया है, जो कि 3.18 लाख करोड़ रुपये है।
Write Off और कर्ज माफी में अंतर
यह समझना आवश्यक है कि Write Off और कर्ज माफी में क्या अंतर है। कर्ज माफी का अर्थ है कि वह कर्ज अब कभी वापस नहीं करना होगा, जबकि Write Off का मतलब है कि बैंक उस कर्ज को अपनी बैलेंस शीट से हटा देती हैं और इसे घाटे में डाल देती हैं। इस कर्ज की वसूली के लिए विभिन्न प्रक्रियाएं अपनाई जाती हैं। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने मई 2024 में बताया था कि पिछले 9 वर्षों में केंद्र सरकार ने 10 लाख करोड़ रुपये के कर्ज की रिकवरी की है।
संसद में पूछे गए सवाल
आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद संत बलबीर सिंह ने संसद में यह सवाल उठाया कि पिछले पांच वर्षों में कितने उद्योगपतियों और किसानों का कर्ज माफ या Write Off किया गया है। उन्होंने इसके राज्यवार और सेक्टरवार आंकड़े भी मांगे थे, लेकिन संसद के जवाब में कहा गया कि ऐसे आंकड़े नहीं रखे जाते। हालांकि, वित्त मंत्रालय ने बताया कि साल और बैंकों के हिसाब से डेटा उपलब्ध है।
आंकड़ों का विश्लेषण
भारत के रिजर्व बैंक के आंकड़ों के अनुसार, पिछले पांच वर्षों में Write Off किए गए कर्ज में बदलाव देखा गया है। उद्योगपतियों के कर्ज Write Off में कमी आई है, जबकि किसानों के कर्ज Write Off में वृद्धि हुई है। यह रुझान सरकारी और प्राइवेट दोनों प्रकार के बैंकों में देखने को मिला है। स्मॉल फाइनेंस बैंकों में Write Off में तेजी आई है। उदाहरण के लिए, 2021-22 में स्मॉल फाइनेंस बैंकों ने बड़ी कंपनियों का केवल 8 करोड़ रुपये का कर्ज Write Off किया, जबकि 2025-26 में यह राशि 271 करोड़ रुपये हो गई।
किसका कर्ज अधिक Write Off हुआ?
पिछले पांच वर्षों में सभी बैंकों ने बड़ी कंपनियों का कुल 3,20,481 करोड़ रुपये का कर्ज Write Off किया, जबकि कृषि क्षेत्र से जुड़े 1,18,984 करोड़ रुपये के कर्ज को Write Off किया गया। इसका मतलब है कि कुल Write Off में 72 प्रतिशत हिस्सा बड़ी कंपनियों और उद्योगपतियों का है। सरकारी बैंकों ने 3.18 लाख करोड़ रुपये, प्राइवेट बैंकों ने 1.04 लाख करोड़ रुपये, स्मॉल फाइनेंस बैंकों ने 10,961 करोड़ रुपये और विदेशी बैंकों ने 5,908 करोड़ रुपये का कर्ज Write Off किया है।
विदेशी बैंकों का Write Off
आंकड़े यह भी बताते हैं कि विदेशी बैंकों के Write Off में तेजी से कमी आई है, जो पिछले पांच वर्षों में 1,800 करोड़ रुपये से घटकर केवल 698 करोड़ रुपये पर आ गया है।
डेटा चित्रण