कुडनकुलम परमाणु परियोजना से जुड़े दस्तावेजों का साइबर उल्लंघन: सुरक्षा चिंताएं बढ़ीं
साइबर सुरक्षा पर नया संकट
भारत में साइबर सुरक्षा एक बार फिर से चर्चा का विषय बन गई है। कुडनकुलम परमाणु ऊर्जा परियोजना से संबंधित हजारों दस्तावेजों के इंटरनेट के गुप्त हिस्से पर लीक होने का दावा किया गया है। हालांकि, इन दस्तावेजों की प्रामाणिकता की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो पाई है, लेकिन यह मामला सुरक्षा एजेंसियों और साइबर विशेषज्ञों के लिए चिंता का कारण बन गया है.
रैनसमवेयर गिरोह का दावा
एक रैनसमवेयर समूह, जो खुद को "वर्ल्ड लीक्स" के नाम से पहचानता है, ने कहा है कि उसने कुडनकुलम परियोजना से जुड़े 19,000 से अधिक दस्तावेज सार्वजनिक किए हैं। समूह का दावा है कि ये दस्तावेज लगभग 858,000 फाइलों के बड़े डाटा संग्रह का हिस्सा हैं, जिन्हें कथित तौर पर रिलायंस समूह के सर्वर से प्राप्त किया गया है.
रिलायंस समूह की प्रतिक्रिया
रिलायंस समूह ने एक तीसरे पक्ष के डाटा केंद्र में अपने सर्वर में सीमित डाटा उल्लंघन की पुष्टि की है। कंपनी ने बताया कि संबंधित सरकारी विभागों को इस घटना की जानकारी दे दी गई है, लेकिन यह स्पष्ट नहीं किया गया कि किस प्रकार का डाटा प्रभावित हुआ है.
दस्तावेजों की प्रकृति
कथित रूप से लीक हुए दस्तावेज 2016 से 2025 के बीच के हैं। इनमें वेंटिलेशन और शीतलन प्रणाली के अभियांत्रिकी नक्शे, साझा नियंत्रण कक्ष की रूपरेखा, उपकरणों की जांच रिपोर्ट, आपूर्तिकर्ताओं की सूची, विक्रेताओं के प्रस्ताव, बैठकों के रिकॉर्ड और बीमा संबंधी दस्तावेज शामिल हैं. हालांकि, इन दस्तावेजों की स्वतंत्र पुष्टि अभी तक नहीं हो पाई है.
परियोजना की स्थिति
ज्यादातर दस्तावेज कुडनकुलम परियोजना की तीसरी और चौथी इकाई से संबंधित हैं, जिनका निर्माण कार्य चल रहा है और इनके 2027 तक शुरू होने की संभावना है. उपलब्ध जानकारी के अनुसार, इनमें परमाणु रिएक्टर के मुख्य तंत्र से संबंधित डिजाइन शामिल नहीं हैं, जिनकी आपूर्ति रूस की सरकारी कंपनी रोसाटॉम द्वारा की जा रही है.
विशेषज्ञों की चिंताएं
साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि भले ही परमाणु रिएक्टर के संचालन तंत्र से समझौता होने के कोई प्रमाण नहीं मिले हैं, लेकिन इस तरह की जानकारी का गलत इस्तेमाल महत्वपूर्ण आधारभूत ढांचे को निशाना बनाने के लिए किया जा सकता है. विशेषज्ञ निकोलस रोथ ने कहा कि यह जानकारी किसी भी विरोधी पक्ष के लिए परियोजना की संरचना और पहुंच व्यवस्था को समझने में सहायक हो सकती है.
जांच की प्रक्रिया
इस मामले की जांच भारतीय कंप्यूटर आपात प्रतिक्रिया दल और भारतीय परमाणु ऊर्जा निगम द्वारा की जा रही है. डाटा केंद्र संचालित करने वाली कंपनी योट्टा ने बताया कि उसे 29 मई को संदिग्ध गतिविधि का पता चला था और संभावित रैनसमवेयर हमले को रोक दिया गया था. इसके बाद रिलायंस समूह ने डाटा उल्लंघन के दावे की जानकारी दी थी.
साइबर हमलों की बढ़ती घटनाएं
हाल के वर्षों में भारत में साइबर हमलों की घटनाओं में वृद्धि देखी गई है. साइबर सुरक्षा क्षेत्र की एक कंपनी के आंकड़ों के अनुसार, पिछले वर्ष देश में करोड़ों ऑनलाइन खातों से समझौता होने की घटनाएं दर्ज की गई थीं. एक उद्योग सर्वेक्षण में यह भी सामने आया कि कई संस्थानों को यह तक जानकारी नहीं होती कि वे कभी साइबर हमले का शिकार हुए हैं या नहीं. इस घटना ने एक बार फिर महत्वपूर्ण राष्ट्रीय परियोजनाओं की साइबर सुरक्षा को मजबूत करने की आवश्यकता को उजागर किया है.