कृत्रिम मेधा से आईटी क्षेत्र में विकास की नई संभावनाएं
कृत्रिम मेधा का प्रभाव
नैसकॉम के अध्यक्ष श्रीकांत वेलामकन्नी ने स्पष्ट किया है कि कृत्रिम मेधा (एआई) भारतीय आईटी क्षेत्र के लिए खतरा नहीं है, बल्कि यह इसके विकास को तेज करेगा और नए रोजगार के अवसर भी उत्पन्न करेगा। वर्तमान में, जब भारतीय आईटी उद्योग भू-राजनीतिक अस्थिरता और एआई से संबंधित परिवर्तनों का सामना कर रहा है, तब नैसकॉम के शीर्ष नेतृत्व की जिम्मेदारी श्रीकांत वेलामकन्नी ने संभाली है।
भविष्य की संभावनाएं
उन्होंने कहा, "एआई हमारे प्रौद्योगिकी उद्योग को गति प्रदान करेगा। यह हमारे लिए खतरा नहीं है, यह सबसे महत्वपूर्ण है। यदि इसे सही तरीके से समझा जाए, तो हम एक मजबूत स्थिति में होंगे। इससे प्रदर्शन में सुधार होगा और उद्योग के भविष्य पर विश्वास बढ़ेगा।" वेलामकन्नी ने यह भी बताया कि उनका लक्ष्य नैसकॉम के कार्यकाल के दौरान इस उद्योग को वैश्विक पहचान दिलाना है।
भर्ती की स्थिति
हाल ही में, टीसीएस ने घोषणा की कि वह वित्त वर्ष 2025-27 में लगभग 25,000 नए कर्मचारियों की भर्ती करने की योजना बना रहा है। जबकि अन्य आईटी कंपनियों में या तो कर्मचारियों की संख्या में कमी आई है या सीमित भर्ती की जा रही है। टीसीएस ने यह भी बताया कि यह संख्या पिछले वर्ष की 44,000 की तुलना में कम है।
भर्ती में कमी के कारण
वेलामकन्नी ने भर्ती में कमी को स्वीकार किया, लेकिन एआई से प्रेरित प्रौद्योगिकी उद्योग की वृद्धि के प्रति आशावाद भी व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि इससे भविष्य में प्रतिभा की मांग में वृद्धि होगी। समीक्षाधीन तिमाही में टीसीएस के कर्मचारियों की संख्या में शुद्ध वृद्धि हुई है, और जैसे-जैसे उद्योग में संरचनात्मक बदलाव होंगे, भर्ती के तरीके में भी बदलाव आएगा।
भविष्य की चुनौतियां
उन्होंने कहा, "हमें पता है कि भर्ती की गति कम हुई है, यह एक स्पष्ट समस्या है। इसका एक कारण यह है कि वृद्धि अपेक्षा से कम रही है।" वेलामकन्नी ने यह भी बताया कि विभिन्न प्रकार की एआई तकनीकों के कारण कार्यों में समय की बचत हो रही है। जैसे-जैसे एआई और अधिक उन्नत होगा, उद्यमों में इसकी आवश्यकता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी।