केंद्र सरकार की नई कर्ज गारंटी योजना: आर्थिक राहत की उम्मीद
नई कर्ज गारंटी योजना का प्रस्ताव
पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच, केंद्र सरकार आर्थिक मोर्चे पर राहत प्रदान करने की दिशा में कदम बढ़ा रही है। हालिया जानकारी के अनुसार, सरकार लगभग ढाई लाख करोड़ रुपये की एक नई कर्ज गारंटी योजना शुरू करने की योजना बना रही है, जिसका उद्देश्य संकट से प्रभावित विभिन्न क्षेत्रों को समर्थन देना है.
आपातकालीन कर्ज गारंटी योजना का विस्तार
यह नई योजना पहले से चल रही आपातकालीन कर्ज गारंटी योजना का विस्तार है, जिसे 2020 में कोरोना महामारी के दौरान छोटे और मझोले उद्योगों की सहायता के लिए शुरू किया गया था। अब सरकार इस ढांचे को और विस्तारित कर अधिक क्षेत्रों तक पहुंचाने का प्रयास कर रही है.
सरकारी गारंटी का लाभ
इस योजना के तहत, कारोबारियों को मिलने वाले कर्ज पर लगभग 90 प्रतिशत तक सरकारी गारंटी प्रदान की जाएगी। इसका अर्थ है कि यदि कोई कर्ज लेने वाला भुगतान करने में असफल होता है, तो बैंक या वित्तीय संस्थान को होने वाले नुकसान का बड़ा हिस्सा सरकार द्वारा वहन किया जाएगा। इससे बैंकों का जोखिम कम होगा और वे अधिक आसानी से कर्ज देने के लिए तैयार होंगे.
योजना की अवधि और दायरा
इस योजना की अवधि लगभग चार साल तक हो सकती है, और विभिन्न क्षेत्रों के लिए एक निश्चित सीमा तक गारंटी कवर प्रदान किया जाएगा। सूत्रों के अनुसार, इस प्रस्ताव को मंजूरी के लिए मंत्रिमंडल के पास भेजा गया है, और जल्द ही इस पर अंतिम निर्णय लिया जा सकता है.
विस्तारित दायरा
इस बार योजना का दायरा पहले से अधिक व्यापक रखा जाएगा। इसमें छोटे और मझोले उद्योगों के साथ-साथ विमानन क्षेत्र और अन्य ऐसे व्यवसाय भी शामिल होंगे, जो वर्तमान में नकदी की कमी का सामना कर रहे हैं। विशेष रूप से, विमानन क्षेत्र पर पश्चिम एशिया के संकट का प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है, जिससे उड़ान मार्ग, लागत और संचालन प्रभावित हुए हैं.
पहली योजना के लाभ
पहली योजना के तहत कर्ज लेने के लिए अतिरिक्त गारंटी या संपार्श्विक की आवश्यकता नहीं थी, और ब्याज दरों पर भी सीमा निर्धारित की गई थी, ताकि कारोबारियों को सस्ती दर पर कर्ज मिल सके। इसके साथ ही, मूलधन के भुगतान पर एक साल की मोहलत भी दी गई थी, जिससे व्यवसायों को संभलने का समय मिल सके.
पिछली योजना का प्रभाव
पिछली योजना के तहत बड़ी संख्या में गारंटी जारी की गई थी, जिसमें अधिकांश लाभ छोटे और मझोले उद्योगों को मिला। यही कारण है कि सरकार अब इसे और बड़े स्तर पर लागू करने की दिशा में काम कर रही है.