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केंद्र सरकार ने ईंधन निर्यात पर विंडफॉल टैक्स बढ़ाया

केंद्र सरकार ने डीजल और विमान ईंधन के निर्यात पर विंडफॉल टैक्स बढ़ाने का निर्णय लिया है। नई दरें 16 जून से लागू होंगी, लेकिन घरेलू खपत के लिए पेट्रोल और डीजल की कीमतों पर इसका कोई असर नहीं पड़ेगा। जानें इस निर्णय के पीछे के कारण और इसके संभावित प्रभावों के बारे में।
 

ईंधन निर्यात पर नया टैक्स निर्णय

केंद्र सरकार ने देश में ईंधन निर्यात को लेकर एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। सोमवार को, सरकार ने डीजल और विमान ईंधन (एटीएफ) के निर्यात पर लगने वाले अप्रत्याशित लाभ कर (विंडफॉल टैक्स) में वृद्धि करने का ऐलान किया। वित्त मंत्रालय द्वारा जारी एक आधिकारिक सूचना के अनुसार, ये नई टैक्स दरें 16 जून से प्रभावी हो गई हैं। हालांकि, पेट्रोल के निर्यात शुल्क और घरेलू उपयोग के लिए ईंधन पर टैक्स की दरों में कोई परिवर्तन नहीं किया गया है।


नई व्यवस्था के तहत, डीजल के निर्यात पर विशेष अतिरिक्त उत्पाद शुल्क (एसएईडी) को बढ़ाकर 14 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है, जो पहले 13.5 रुपये प्रति लीटर था। वहीं, विमान ईंधन के निर्यात पर एसएईडी को 12.5 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है, जो पहले 9.5 रुपये प्रति लीटर था। पेट्रोल के निर्यात पर शुल्क की दर 1.5 रुपये प्रति लीटर पर स्थिर बनी हुई है। वित्त मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि ये शुल्क 16 जून से लागू होंगे।


आम जनता पर प्रभाव

इस निर्णय का सीधा असर देश में पेट्रोल-डीजल की खुदरा कीमतों पर नहीं पड़ेगा। वित्त मंत्रालय ने बताया है कि घरेलू खपत के लिए पेट्रोल और डीजल पर मौजूदा शुल्क दरों में कोई बदलाव नहीं किया गया है।


विंडफॉल टैक्स क्या है?

जब तेल रिफाइनिंग कंपनियां अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की ऊंची कीमतों या उच्च मार्जिन के कारण अप्रत्याशित लाभ कमाती हैं, तो सरकार उस मुनाफे के एक हिस्से पर विशेष टैक्स लगाती है। इसे 'विंडफॉल टैक्स' या विशेष अतिरिक्त उत्पाद शुल्क (SAED) कहा जाता है। इसका उद्देश्य घरेलू बाजार में ईंधन की पर्याप्त आपूर्ति सुनिश्चित करना भी होता है।


यह कदम वैश्विक ऊर्जा बाजार में हो रहे उतार-चढ़ाव के बीच उठाया गया है, जब सरकार राजकोषीय स्थिति और घरेलू बाजार की आवश्यकताओं के बीच संतुलन बनाने की कोशिश कर रही है।