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कोटक महिंद्रा बैंक में नेतृत्व परिवर्तन: अशोक वासवानी का कार्यकाल समाप्त

कोटक महिंद्रा बैंक के CEO अशोक वासवानी ने वर्ष के अंत में पुनर्नियुक्ति न लेने का निर्णय लिया है, जिससे बैंक में नए नेतृत्व की खोज शुरू हो गई है। वासवानी के कार्यकाल में बैंक ने कारोबार का विस्तार किया, लेकिन मुनाफे में उतार-चढ़ाव देखने को मिला। जानें बैंक की वित्तीय स्थिति, परिसंपत्ति गुणवत्ता और नए नेतृत्व के सामने आने वाली चुनौतियाँ।
 

कोटक महिंद्रा बैंक में बदलाव की तैयारी

भारत के निजी बैंकिंग क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण बदलाव की संभावना है। कोटक महिंद्रा बैंक के CEO और MD अशोक वासवानी ने वर्ष के अंत में अपनी पुनर्नियुक्ति न लेने का निर्णय लिया है। इस निर्णय के साथ ही बैंक में नए नेतृत्व की खोज शुरू होने की संभावना बढ़ गई है। अशोक वासवानी का कार्यकाल 35 वर्षों के अनुभव से भरा रहा है, जिसमें बैंक ने अपने कारोबार का विस्तार किया, लेकिन मुनाफे और निवेशकों को मिलने वाले प्रतिफल में अपेक्षित मजबूती नहीं दिखा सका।


नियामकीय चुनौतियाँ और वैश्विक संकट

अशोक वासवानी ने बैंक की कमान संभालने के कुछ महीनों बाद ही एक बड़े नियामकीय झटके का सामना किया। अप्रैल 2024 में भारतीय रिजर्व बैंक ने बैंक की तकनीकी प्रणालियों में कमियों के कारण नए ग्राहकों को जोड़ने और नए ऋण कार्ड जारी करने पर रोक लगा दी थी। यह प्रतिबंध लगभग दस महीने तक लागू रहा। इस कार्रवाई का बैंक की छवि और मुनाफे पर नकारात्मक प्रभाव पड़ा।


बैंक का कारोबार और वित्तीय प्रदर्शन

इन चुनौतियों के बावजूद, बैंक का कुल कारोबार लगातार बढ़ता रहा। वित्त वर्ष 2024 के अंत तक बैंक की कुल परिसंपत्तियां लगभग 3.76 लाख करोड़ रुपये थीं, जो वित्त वर्ष 2025 के अंत तक बढ़कर 4.26 लाख करोड़ रुपये हो गईं। इसके बाद वित्त वर्ष 2026 के अंत तक बैंक की ऋण पुस्तिका 4.96 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गई।


वहीं, मुनाफे में उतार-चढ़ाव देखने को मिला। मार्च 2024 तिमाही में बैंक का शुद्ध लाभ 4,133 करोड़ रुपये था, जो जून 2025 में बढ़कर 6,249 करोड़ रुपये हो गया। हालांकि, बाद की तिमाहियों में इसमें गिरावट आई।


बैंक की परिसंपत्ति गुणवत्ता

इस दौरान बैंक की परिसंपत्ति गुणवत्ता मजबूत बनी रही। सकल गैर-निष्पादित परिसंपत्ति अनुपात वित्त वर्ष 2024 के 1.39 प्रतिशत से घटकर वित्त वर्ष 2026 के अंत तक 1.20 प्रतिशत पर आ गया।


एक्सिस सिक्योरिटीज की एक रिपोर्ट के अनुसार, कोटक महिंद्रा बैंक अब विकास के अगले चरण में प्रवेश कर रहा है।


नए नेतृत्व की चुनौतियाँ

अब बैंक के नए प्रमुख के सामने केवल कारोबार बढ़ाना ही चुनौती नहीं होगी, बल्कि निवेशकों का भरोसा मजबूत करना और बेहतर प्रतिफल देना भी महत्वपूर्ण होगा। मीडिया रिपोर्टों में बैंक के सीनियर अधिकारियों परितोष कश्यप और अनुप साहा को संभावित उत्तराधिकारी के रूप में देखा जा रहा है।