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कोल इंडिया का पूंजीगत व्यय पहली तिमाही में 16.64% बढ़ा

कोल इंडिया लिमिटेड ने चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में अपने पूंजीगत व्यय में 16.64% की वृद्धि की है, जो 3,399 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। इस वृद्धि के पीछे भूमि अधिग्रहण, अवसंरचना विकास और मशीनरी पर निवेश का बड़ा हाथ है। कंपनी ने स्वच्छ ऊर्जा पहल के तहत भी महत्वपूर्ण निवेश किए हैं। जानें इस रिपोर्ट में और क्या खास है।
 

कोल इंडिया का वित्तीय प्रदर्शन

नई दिल्ली, 28 जुलाई: कोल इंडिया लिमिटेड (सीआईएल) ने मंगलवार को जानकारी दी कि चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में उसका पूंजीगत व्यय 16.64 प्रतिशत बढ़कर 3,399 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है, जबकि पिछले वित्त वर्ष की इसी अवधि में यह 2,914 करोड़ रुपये था। कंपनी ने एक बयान में बताया कि अप्रैल से जून के बीच भूमि अधिग्रहण और पुनर्वास एवं पुनर्स्थापन (आरएंडआर) गतिविधियों पर 804 करोड़ रुपये खर्च किए गए, जो कुल पूंजीगत व्यय का लगभग एक-चौथाई है। समय पर भूमि अधिग्रहण कोयला खनन के लिए अत्यंत आवश्यक है, क्योंकि इसके बिना भंडार उपलब्ध होने के बावजूद खनन परियोजनाएं शुरू नहीं हो सकतीं और न ही उनका विस्तार संभव है।


सीआईएल ने कोयला निकासी अवसंरचना को मजबूत करने के लिए सहायक रेल पटरी बिछाने और गलियारे के विकास पर 754 करोड़ रुपये का निवेश किया। इसके अतिरिक्त, कोयला साज-संभाल संयंत्र, भंडारण और सड़कों पर 195 करोड़ रुपये खर्च किए गए, जिससे इस मद में कुल व्यय 949 करोड़ रुपये हो गया। संयंत्र एवं मशीनरी पर 819 करोड़ रुपये खर्च हुए, जिसमें भारी मशीनरी की खरीद और वॉशरी का विस्तार शामिल है।


कोल इंडिया लिमिटेड के चेयरमैन बी. साईराम ने कहा, 'भूमि, अवसंरचना और मशीनरी पर निवेश कुल पूंजीगत व्यय का 75 प्रतिशत से अधिक है और इससे उत्पादन लक्ष्य हासिल करने में मदद मिलेगी।' स्वच्छ ऊर्जा पहल के तहत सौर परियोजनाओं पर 278 करोड़ रुपये और संयुक्त उपक्रमों में 207 करोड़ रुपये का निवेश किया गया।