×

कोल इंडिया की एसईसीएल: ऊर्जा सुरक्षा के लिए तैयार

साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (एसईसीएल) के चेयरमैन हरीश दुहान ने बताया कि कंपनी वैश्विक ऊर्जा परिस्थितियों के बीच भारत की कोयला मांग को पूरा करने के लिए तैयार है। उन्होंने कहा कि कंपनी ने वित्तीय वर्ष 2025-26 में 16.5 करोड़ टन कोयले का उत्पादन किया है। एसईसीएल के पास पर्याप्त कोयला भंडार है, जो बिजली क्षेत्र की बढ़ती मांग को पूरा करने में सहायक होगा। इसके अलावा, कंपनी की प्रमुख खनन परियोजनाएं और आपूर्ति तंत्र भारत की ऊर्जा सुरक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।
 

एसईसीएल की तैयारियों पर प्रकाश

साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (एसईसीएल) के चेयरमैन और प्रबंध निदेशक हरीश दुहान ने सोमवार को बताया कि कंपनी वैश्विक ऊर्जा की बदलती परिस्थितियों के बीच भारत की कोयला मांग, खासकर बिजली क्षेत्र की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए पूरी तरह तैयार है।


पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष के कारण होर्मुज जलडमरूमध्य जैसे महत्वपूर्ण ऊर्जा मार्ग प्रभावित हुए हैं, जिससे आयातित कोयले और द्रवीकृत प्राकृतिक गैस की लागत में वृद्धि हुई है।


इसका अप्रत्यक्ष प्रभाव भारत के कोयला और बिजली क्षेत्रों पर पड़ रहा है। दुहान ने एक मीडिया चैनल के साथ बातचीत में कहा कि कंपनी ने मजबूत परिचालन गति बनाए रखी है। वित्तीय वर्ष 2025-26 में, कंपनी ने मार्च तक लगभग 16.5 करोड़ टन कोयले का उत्पादन और 16.9 करोड़ टन से अधिक कोयले का प्रेषण किया है, जिससे बिजलीघरों और अन्य उपभोक्ताओं को स्थिर आपूर्ति सुनिश्चित हुई है।


कोयला आपूर्ति और भंडार

कंपनी एनटीपीसी, राजस्थान राज्य विद्युत उत्पादन निगम लिमिटेड (आरवीयूएनएल) और मध्य प्रदेश पावर जेनरेटिंग कंपनी लिमिटेड (एमपीपीजीसीएल) जैसे प्रमुख बिजली उत्पादकों को कोयला प्रदान करती है। दुहान ने बताया कि वर्तमान में कंपनी के पास लगभग 2.3 करोड़ टन कोयले का भंडार है, जो बिजली क्षेत्र में मांग बढ़ने पर सहारा प्रदान करेगा। इसके अलावा, कंपनी के पास लगभग 1.2 करोड़ टन कोयला भंडार है, जिसे तुरंत उत्पादन में बदला जा सकता है।


उन्होंने यह भी कहा कि चालू वित्त वर्ष में खनन कार्यों के लिए कंपनी के पास पर्याप्त भूमि उपलब्ध है और उत्पादन एवं आपूर्ति बनाए रखने के लिए सभी आवश्यक खनन और परिवहन अनुबंध पहले से लागू हैं। इसके साथ ही, एसईसीएल से जुड़े बिजली संयंत्रों में भी पर्याप्त कोयला भंडार है, जिससे बिजली उत्पादन की आपूर्ति श्रृंखला में स्थिरता बनी हुई है।


खनन परियोजनाओं की भूमिका

कंपनी की प्रमुख खनन परियोजनाएं इस आपूर्ति को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। एसईसीएल की ‘दीपका मेगा’ खान इस वर्ष 3.5 करोड़ टन उत्पादन का आंकड़ा पार कर चुकी है और अब तक के सबसे अधिक वार्षिक उत्पादन की ओर बढ़ रही है। इसी तरह, एशिया की सबसे बड़ी कोयला खान गेवरा ने पांच करोड़ टन से अधिक उत्पादन का स्तर पार कर लिया है, जबकि कुसमुंडा कोयला खान के चालू वर्ष में तीन करोड़ टन से अधिक उत्पादन की उम्मीद है।


इसके अलावा, एसईसीएल ‘रेक लोडिंग’ बढ़ाने, भारतीय रेल के साथ करीबी समन्वय और देशभर के बिजली संयंत्रों को प्राथमिकता के आधार पर कोयला आपूर्ति कर रही है, जिससे कोयला निकासी और आपूर्ति तंत्र को लगातार मजबूत किया जा रहा है। दुहान ने कहा कि इन उपायों के माध्यम से एसईसीएल भारत की ऊर्जा सुरक्षा में महत्वपूर्ण योगदान दे रही है, खासकर मांग बढ़ने के समय बिजली क्षेत्र को निर्बाध कोयला आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए वह प्रतिबद्ध है।