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क्या अमेरिका-ईरान तनाव से बढ़ेंगे तेल के दाम? जानें क्या है स्थिति

अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव ने अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार में उथल-पुथल मचा दी है। कच्चे तेल की कीमतों में लगातार वृद्धि से भारत जैसे तेल आयातक देशों की चिंताएं बढ़ गई हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह स्थिति बनी रहती है, तो आने वाले समय में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में और वृद्धि हो सकती है। जानें इस तनाव का वैश्विक बाजार पर क्या असर पड़ सकता है और भविष्य में क्या संभावनाएं हैं।
 

तेल की कीमतों में उछाल का असर


नई दिल्ली: पेट्रोल और डीजल की कीमतों में राहत की उम्मीद कर रहे लोगों को एक बार फिर निराशा का सामना करना पड़ा है। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव का प्रभाव अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार पर स्पष्ट रूप से देखा जा रहा है। कच्चे तेल की कीमतों में निरंतर वृद्धि से भारत जैसे तेल आयातक देशों की चिंताएं बढ़ गई हैं। यदि यह स्थिति लंबे समय तक बनी रहती है, तो ईंधन की कीमतों पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।


कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि

अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड की कीमत लगभग 1.66 प्रतिशत बढ़कर 84.82 डॉलर प्रति बैरल तक पहुँच गई है। इसी तरह, अमेरिकी कच्चा तेल (WTI) भी लगभग 2 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 79.88 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा है। इससे पहले भी कच्चे तेल में तेज वृद्धि देखी गई थी, जिससे महंगाई की चिंताएं बढ़ गई हैं।


अमेरिका-ईरान तनाव का प्रभाव

विशेषज्ञों का मानना है कि तेल की कीमतों में वृद्धि का मुख्य कारण अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता सैन्य संघर्ष है। दोनों देशों के बीच लगातार हमले और जवाबी कार्रवाई से मध्य पूर्व का माहौल तनावपूर्ण बना हुआ है। इसके अलावा, हॉर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर बढ़ते विवाद ने भी तेल आपूर्ति में अनिश्चितता पैदा कर दी है।


हवाई हमलों से बढ़ी चिंता

अमेरिकी सेना ने ईरान के कई ठिकानों पर बड़े पैमाने पर हवाई हमले किए हैं। अमेरिका का कहना है कि इन कार्रवाइयों का उद्देश्य ईरान की समुद्री हमले करने की क्षमता को कमजोर करना है। दूसरी ओर, ईरान ने भी जवाबी कार्रवाई करते हुए खाड़ी क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य ठिकानों को मिसाइल और ड्रोन से निशाना बनाया है, जिससे पूरे क्षेत्र में तनाव और बढ़ गया है।


हॉर्मुज जलडमरूमध्य पर स्थिति

ईरान ने एक बार फिर हॉर्मुज जलडमरूमध्य में आवाजाही पर सख्ती बढ़ा दी है। सामान्य दिनों में जहां बड़ी संख्या में जहाज इस मार्ग से गुजरते थे, वहीं अब आवाजाही काफी कम हो गई है। इस रणनीतिक समुद्री मार्ग से दुनिया के बड़े हिस्से का तेल निर्यात होता है, इसलिए यहां किसी भी तरह की रुकावट का सीधा असर वैश्विक बाजार पर पड़ता है।


कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों ने फिलहाल पेट्रोल-डीजल सस्ता होने की उम्मीदों पर पानी फेर दिया है। यदि अमेरिका और ईरान के बीच तनाव जल्द कम नहीं हुआ, तो आने वाले दिनों में तेल और ईंधन की कीमतों में और बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है।