×

क्या अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ट्रंप के टैरिफ पर देगा फैसला? जानें भारत पर इसका क्या असर होगा

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा लगाए गए टैरिफ का वैश्विक अर्थव्यवस्था पर गहरा प्रभाव पड़ा है। अब यह मामला अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट में पहुंच चुका है, जहां कोर्ट का निर्णय भारत समेत कई देशों के व्यापार पर महत्वपूर्ण असर डाल सकता है। यदि कोर्ट ट्रंप प्रशासन के टैरिफ को अवैध ठहराता है, तो अमेरिका को बड़ा आर्थिक नुकसान हो सकता है। जानें इस फैसले का भारत के व्यापारिक हितों पर क्या प्रभाव पड़ेगा और ट्रंप प्रशासन की संभावित रणनीतियाँ क्या हो सकती हैं।
 

अमेरिकी राष्ट्रपति के टैरिफ का वैश्विक प्रभाव


नई दिल्ली: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अपने दूसरे कार्यकाल में ऐसे निर्णय ले रहे हैं जिनका प्रभाव केवल अमेरिका तक सीमित नहीं है। उनके द्वारा लगाए गए भारी टैरिफ ने वैश्विक अर्थव्यवस्था में हलचल पैदा कर दी है। ट्रंप प्रशासन ने कई देशों से आयातित वस्तुओं पर उच्च शुल्क लगाए हैं, जिससे भारत समेत कई देशों के व्यापारिक हित प्रभावित हुए हैं।


100 से अधिक देशों पर टैरिफ का प्रभाव

डोनाल्ड ट्रंप ने अपने "अमेरिका फर्स्ट" नीति के तहत 100 से अधिक देशों पर व्यापक टैरिफ लागू किए हैं। इन टैरिफ का उद्देश्य अमेरिकी उद्योगों को संरक्षण देना बताया गया है, लेकिन इससे वैश्विक व्यापार संतुलन में असंतुलन उत्पन्न हो रहा है। भारत पर लगाए गए 50 प्रतिशत टैरिफ ने विशेष रूप से भारतीय निर्यातकों की चिंताओं को बढ़ा दिया है। टेक्सटाइल, स्टील, ऑटो पार्ट्स और फार्मा जैसे क्षेत्रों पर इसका प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है।


सुप्रीम कोर्ट में मामला पहुंचा

ट्रंप के इन निर्णयों की वैधता को लेकर मामला अब अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच चुका है। आज, 9 जनवरी को कोर्ट इस पर महत्वपूर्ण निर्णय ले सकता है। सवाल यह है कि क्या ट्रंप प्रशासन ने इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट (IEEPA) के तहत इतने बड़े स्तर पर टैरिफ लगाने का अधिकार सही तरीके से इस्तेमाल किया है या नहीं। इस निर्णय पर न केवल अमेरिका, बल्कि वैश्विक सरकारों और बाजारों की नजरें टिकी हुई हैं।


फैसला पलटा तो आर्थिक नुकसान

यदि सुप्रीम कोर्ट यह तय करता है कि ट्रंप प्रशासन को इस कानून के तहत ऐसे टैरिफ लगाने का अधिकार नहीं था, तो अमेरिकी सरकार को बड़ा आर्थिक झटका लग सकता है। ऐसी स्थिति में आयातकों को वसूला गया धन लौटाना पड़ सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार, रिफंड की राशि 100 से 150 अरब डॉलर तक हो सकती है, जो अमेरिकी खजाने पर भारी बोझ डालेगी।


बीच का रास्ता निकलने की संभावना

हालांकि, अर्थशास्त्रियों और कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि सुप्रीम कोर्ट का निर्णय पूरी तरह से "हां या ना" में नहीं होगा। संभव है कि कोर्ट कोई संतुलित या सीमित निर्णय दे, जिसमें सरकार के कुछ अधिकार बरकरार रहें और कुछ पर अंकुश लगाया जाए। इससे ट्रंप प्रशासन को आंशिक राहत भी मिल सकती है।


वैकल्पिक रणनीति पर काम

सूत्रों के अनुसार, ट्रंप की टीम ने पहले से ही संभावित नकारात्मक फैसले को ध्यान में रखते हुए वैकल्पिक कानूनी रास्तों पर काम करना शुरू कर दिया है। यदि सुप्रीम कोर्ट का निर्णय उनके खिलाफ जाता है, तो प्रशासन अन्य कानूनों और प्रावधानों के माध्यम से टैरिफ को किसी न किसी रूप में जारी रखने की कोशिश कर सकता है।


भारत के लिए फैसला क्यों महत्वपूर्ण है

अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट का यह निर्णय भारत के लिए भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। 50 प्रतिशत टैरिफ के कारण भारतीय निर्यात प्रभावित हुआ है और कई कंपनियों को नुकसान उठाना पड़ा है। इसी बीच, भारत और अमेरिका के बीच व्यापार समझौते को लेकर लंबे समय से बातचीत चल रही है, लेकिन अब तक कोई ठोस नतीजा नहीं निकल सका है। हाल ही में ट्रंप ने यह संकेत भी दिया था कि यदि भारत रूस से तेल खरीदना बंद नहीं करता, तो टैरिफ और बढ़ाया जा सकता है। ऐसे में सुप्रीम कोर्ट का निर्णय भारत-अमेरिका व्यापार संबंधों की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।