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क्या ट्रंप का नया शांति बोर्ड संयुक्त राष्ट्र का विकल्प बनेगा?

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक नए अंतरराष्ट्रीय शांति बोर्ड की स्थापना की योजना बनाई है, जिसमें देशों से 1 अरब डॉलर का योगदान मांगा जाएगा। ट्रंप खुद इस बोर्ड के पहले अध्यक्ष होंगे और सदस्यता की शर्तें भी निर्धारित करेंगे। आलोचकों का मानना है कि यह पहल संयुक्त राष्ट्र का विकल्प बनने की कोशिश है। इस लेख में हम इस बोर्ड की संरचना, उद्देश्य और संभावित प्रभावों पर चर्चा करेंगे। क्या यह वैश्विक शांति के लिए एक नई दिशा होगी? जानने के लिए पढ़ें पूरा लेख।
 

ट्रंप का अनोखा कदम


नई दिल्ली: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक नई दिशा में कदम बढ़ाया है, जो अमेरिकी इतिहास में पहले कभी नहीं देखा गया। अब ट्रंप प्रशासन एक अंतरराष्ट्रीय शांति बोर्ड की स्थापना की योजना बना रहा है, जिसमें स्थायी सदस्यता के इच्छुक देशों से कम से कम 1 अरब डॉलर का योगदान मांगा जाएगा।


शांति बोर्ड की संरचना

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, इस शांति बोर्ड के पहले अध्यक्ष स्वयं ट्रंप होंगे। वह यह तय करेंगे कि किन देशों या व्यक्तियों को सदस्य के रूप में आमंत्रित किया जाएगा। प्रस्तावित ढांचे के अनुसार, निर्णय बहुमत से लिए जाएंगे, लेकिन सभी अंतिम निर्णय अध्यक्ष की स्वीकृति पर निर्भर करेंगे।


सदस्यता की शर्तें

प्रस्तावित चार्टर में कहा गया है कि प्रत्येक सदस्य देश अधिकतम तीन वर्षों तक बोर्ड में कार्य करेगा, जिसे अध्यक्ष द्वारा नवीनीकरण किया जा सकता है। हालांकि, यह सीमा उन देशों पर लागू नहीं होगी जो पहले वर्ष में 1 अरब डॉलर से अधिक का योगदान देंगे।


संयुक्त राष्ट्र का विकल्प?

आलोचकों का मानना है कि ट्रंप प्रशासन संयुक्त राष्ट्र का एक विकल्प बनाने की कोशिश कर रहा है, जिसे ट्रंप लंबे समय से आलोचना करते आ रहे हैं। इस पहल को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंताएं व्यक्त की जा रही हैं।


शांति बोर्ड का उद्देश्य

चार्टर में इस बोर्ड को एक अंतरराष्ट्रीय संगठन के रूप में वर्णित किया गया है, जिसका उद्देश्य संघर्ष प्रभावित क्षेत्रों में स्थिरता लाना और स्थायी शांति सुनिश्चित करना है। दस्तावेजों के अनुसार, तीन सदस्य देशों द्वारा चार्टर पर सहमति के बाद यह बोर्ड आधिकारिक रूप से अस्तित्व में आ जाएगा।


यूरोपीय देशों को निमंत्रण

ट्रंप ने अर्जेंटीना के राष्ट्रपति जेवियर मिलेई और कनाडा के मार्क कार्नी सहित कई वैश्विक नेताओं को इस शांति बोर्ड का हिस्सा बनने का निमंत्रण दिया है।


हालांकि, इजराइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने इस योजना की आलोचना की है, यह कहते हुए कि इसके विवरण उनके देश के साथ समन्वयित नहीं किए गए।


फंड नियंत्रण पर विवाद

सूत्रों के अनुसार, कई यूरोपीय देशों को इस शांति बोर्ड में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया गया है। मसौदे से यह संकेत मिलता है कि फंड पर नियंत्रण ट्रंप के पास होगा, जो संभावित सदस्य देशों के लिए अस्वीकार्य हो सकता है।


वोटिंग प्रक्रिया

सूत्रों के अनुसार, कई देश ट्रंप के चार्टर मसौदे का विरोध कर रहे हैं और सामूहिक रणनीति पर काम कर रहे हैं। मसौदे में कहा गया है कि शांति बोर्ड साल में कम से कम एक बार वोटिंग बैठकें करेगा, जिनका एजेंडा अध्यक्ष की स्वीकृति पर निर्भर करेगा।


ट्रंप की निर्णायक शक्ति

चार्टर के अनुसार, ट्रंप को किसी सदस्य को हटाने का अधिकार होगा, लेकिन सदस्य देशों के दो-तिहाई बहुमत से इस फैसले को वीटो किया जा सकेगा। इसके अलावा, व्हाइट हाउस ने बोर्ड के गठन से पहले एक प्रारंभिक कार्यकारी पैनल की घोषणा की है, जिसमें प्रमुख व्यक्ति शामिल हैं।