क्या पेट्रोल-डीजल की कीमतें फिर से बढ़ेंगी? जानें हालात
पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी का खतरा
नई दिल्ली: पेट्रोल और डीजल की कीमतों को लेकर आम जनता की चिंताएं एक बार फिर से बढ़ सकती हैं। इस महीने निजी कंपनियों जियो-बीपी और नायरा एनर्जी ने ईंधन की कीमतों में इजाफा किया है। पेट्रोल की कीमत में पांच रुपये और डीजल में तीन रुपये प्रति लीटर की वृद्धि हुई है। हालांकि, सरकारी तेल कंपनियां अभी भी अपने दाम स्थिर रखे हुए हैं, जबकि कच्चे तेल की कीमतें लगातार 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बनी हुई हैं। 13 अक्टूबर को ब्रेंट क्रूड का भाव 105.89 डॉलर प्रति बैरल था, जबकि सोमवार को यह 107 डॉलर से नीचे बंद हुआ। अमेरिकी कच्चा तेल WTI भी तीन कारोबारी सत्रों में छह प्रतिशत से अधिक चढ़ने के बाद सोमवार को 93 डॉलर प्रति बैरल पर रहा।
जब ईरान युद्ध शुरू हुआ था और कच्चा तेल पहली बार 100 डॉलर के पार गया, तब नायरा ने सबसे पहले कीमतें बढ़ाई थीं। उस समय बंगाल चुनाव चल रहा था, इसलिए सरकारी कंपनियों ने तुरंत कोई बदलाव नहीं किया। लेकिन चुनाव खत्म होते ही मई में उन्होंने चार किस्तों में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में 7.50 रुपये की वृद्धि की। उसके बाद से इनकी कीमतों में कोई बदलाव नहीं आया है। ऐसे में यह सवाल उठता है कि क्या इस बार भी ऐसा ही होगा।
सरकारी कंपनियों का प्रभाव
देश में एक लाख से अधिक पेट्रोल पंप हैं, जिनमें से 90 प्रतिशत से अधिक पर सरकारी कंपनियों का नियंत्रण है। रेटिंग एजेंसी इक्रा के अनुसार, विदेशी बाजार में तेल महंगा होने के बावजूद देश में कीमतें लंबे समय से स्थिर हैं। इसी कारण IOC, BPCL और HPCL को घाटा उठाना पड़ रहा है। अनुमान है कि उन्हें पेट्रोल पर लगभग 8 रुपये और डीजल पर करीब 9 रुपये प्रति लीटर का नुकसान हो रहा है।
यदि कीमतें बढ़ती हैं, तो इसका सीधा असर निजी वाहन चलाने वालों की जेब पर पड़ेगा। इसके परिणामस्वरूप माल ढुलाई महंगी होने से सब्जियों, राशन और अन्य दैनिक उपयोग की वस्तुओं की कीमतें भी बढ़ सकती हैं।
आज के सरकारी रेट
आज दिल्ली में इंडियन ऑयल के पंप पर पेट्रोल की कीमत 102.12 रुपये और डीजल की कीमत 95.20 रुपये प्रति लीटर है। हरियाणा के फरीदाबाद में पेट्रोल 103.35 रुपये और डीजल 96.01 रुपये पर स्थिर है। नायरा और जियो-बीपी द्वारा कीमतें बढ़ाने के बावजूद IOCL, HPCL और भारत पेट्रोलियम ने अपने दाम नहीं बढ़ाए हैं। अब सभी की नजर इस बात पर है कि सरकारी कंपनियां कब तक राहत बनाए रखती हैं।