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क्या प्याज के दामों में आएगी राहत? जानें नई फसल की संभावनाएं

प्याज की कीमतों में गिरावट की उम्मीद जताई जा रही है, जिसका मुख्य कारण नई खरीफ फसल की आवक और सरकार द्वारा बफर स्टॉक से बिक्री को बढ़ाना है। हालांकि, खुदरा बाजार में प्याज की कीमतें पिछले वर्ष की तुलना में दोगुनी बनी हुई हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि नई फसल की आवक उम्मीद के अनुसार हुई, तो अक्टूबर के अंत से नवंबर के बीच प्याज के दामों में राहत मिल सकती है। जानें इस विषय में और क्या जानकारी है।
 

प्याज की कीमतों में गिरावट की उम्मीद


नई दिल्ली: महंगे प्याज की समस्या से जूझ रहे उपभोक्ताओं के लिए राहत की सूचना आई है। आने वाले दिनों में प्याज के दाम में कमी आने की संभावना है। इसका मुख्य कारण खरीफ फसल की आवक और सरकार द्वारा बफर स्टॉक से बिक्री को बढ़ाना है। फिर भी, खुदरा बाजार में प्याज की कीमतें पिछले वर्ष की तुलना में लगभग दोगुनी बनी हुई हैं।


प्याज की कीमतों में सालाना वृद्धि

10 अक्टूबर को देश में प्याज की औसत खुदरा कीमत 52.99 रुपये प्रति किलो रही, जबकि पिछले वर्ष इसी समय यह 26.65 रुपये प्रति किलो थी। इस प्रकार, सालाना आधार पर कीमतों में लगभग 99 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।


सरकारी आंकड़ों के अनुसार, 10 सितंबर को प्याज का औसत रिटेल दाम 53.10 रुपये था, जो 10 अक्टूबर को घटकर 52.99 रुपये हो गया। यह दर्शाता है कि थोक बाजार में सप्लाई में सुधार होने के बावजूद खुदरा बाजार में इसका लाभ उपभोक्ताओं तक नहीं पहुंचा है। थोक में प्याज की औसत कीमत 4,591 रुपये प्रति क्विंटल है, जो पिछले वर्ष की तुलना में 123 प्रतिशत अधिक है।


नई फसल से सप्लाई में सुधार

कीमतों में कमी की उम्मीद नई फसल से है। महाराष्ट्र और अन्य राज्यों से खरीफ प्याज की आवक जल्द शुरू होने वाली है। कर्नाटक, तेलंगाना और आंध्र प्रदेश से नवंबर के अंत तक सप्लाई जारी रहने की संभावना है, जबकि महाराष्ट्र की प्रारंभिक फसल अक्टूबर के अंत तक बाजार में आ सकती है। इसके अतिरिक्त, महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश में पुराने प्याज का पर्याप्त स्टॉक भी उपलब्ध है, जो नवंबर के तीसरे सप्ताह तक मांग को पूरा करने में सहायक होगा। राजस्थान के अलवर से सप्लाई बढ़ने पर उत्तर भारत की महाराष्ट्र पर निर्भरता भी कम होगी।


सरकार की पहल से बढ़ी बिक्री

केंद्र सरकार ने कीमतों को नियंत्रित करने के लिए बफर स्टॉक से प्याज की बिक्री को 123 शहरों तक बढ़ा दिया है। सरकार का अनुमान है कि इस वर्ष खरीफ प्याज का रकबा पिछले वर्ष से 5 प्रतिशत अधिक है। त्योहारी सीजन में मांग को देखते हुए परिवहन और वितरण व्यवस्था को भी मजबूत किया गया है। हालांकि, सरकारी बिक्री के बावजूद खुदरा दामों में अभी तक कोई बड़ी गिरावट नहीं आई है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि नई फसल की आवक उम्मीद के अनुसार हुई, तो अक्टूबर के अंत से नवंबर के बीच प्याज के दामों में राहत मिल सकती है।