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क्या फिर से बढ़ेंगे पेट्रोल-डीजल के दाम? जानें कच्चे तेल की स्थिति

कच्चे तेल की कीमतें 92 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर बनी हुई हैं, जिससे पेट्रोल और डीजल की कीमतों में स्थिरता बनी हुई है। हालांकि, लंबे समय तक महंगे कच्चे तेल का असर घरेलू बाजार पर पड़ सकता है। जानें विभिन्न शहरों में पेट्रोल और डीजल की वर्तमान कीमतें और क्या भविष्य में दाम बढ़ सकते हैं।
 

कच्चे तेल की कीमतें बनी हुई हैं ऊंची


नई दिल्ली: कच्चे तेल की कीमतें एक बार फिर 92 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर स्थिर हैं। मंगलवार, 8 सितंबर को अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतों में कोई महत्वपूर्ण बदलाव नहीं आया, लेकिन यह ऊंचा स्तर ऑयल मार्केटिंग कंपनियों के लिए चिंता का विषय बना हुआ है। वर्तमान में, घरेलू बाजार में पेट्रोल और डीजल के दाम स्थिर हैं, लेकिन लंबे समय तक कच्चे तेल की महंगाई का असर भविष्य में देखने को मिल सकता है।


पेट्रोल के दाम 110 रुपये के पार

देश के कई प्रमुख शहरों में पेट्रोल की कीमतें 110 रुपये प्रति लीटर से अधिक हैं। मुंबई में एक लीटर पेट्रोल की कीमत 111.21 रुपये, बेंगलुरु में 110.82 रुपये, हैदराबाद में 116.15 रुपये, पटना में 113.35 रुपये और तिरुवनंतपुरम में 115.49 रुपये है। नई दिल्ली में पेट्रोल की कीमत 102.12 रुपये प्रति लीटर, गुरुग्राम में 102.97 रुपये, भुवनेश्वर में 108.97 रुपये और चंडीगढ़ में 101.54 रुपये है।


डिजल की कीमतें भी जानें

मंगलवार को नई दिल्ली में डीजल की कीमत 95.20 रुपये प्रति लीटर, मुंबई में 97.83 रुपये, गुरुग्राम में 95.64 रुपये और बेंगलुरु में 98.77 रुपये प्रति लीटर है। भुवनेश्वर में डीजल की कीमत 100.68 रुपये, चंडीगढ़ में 89.47 रुपये, हैदराबाद में 104.23 रुपये, पटना में 99.36 रुपये और तिरुवनंतपुरम में 104.40 रुपये प्रति लीटर है।


मई में हुई थी आखिरी बढ़ोतरी

पेट्रोल और डीजल की कीमतों में आखिरी बार मई में बड़ी बढ़ोतरी हुई थी। 2022 के बाद, मई में तेल कंपनियों ने लगातार चार बार कीमतें बढ़ाई थीं, जिससे पेट्रोल और डीजल की औसत कीमत लगभग 7.5 रुपये प्रति लीटर बढ़ गई थी। इसके बाद से घरेलू बाजार में कीमतें स्थिर बनी हुई हैं।


क्या फिर से बढ़ेंगे दाम?

अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की वर्तमान स्थिति ने पेट्रोल और डीजल की कीमतों को लेकर चिंता बढ़ा दी है। यदि कच्चे तेल की कीमतें लंबे समय तक ऊंची बनी रहती हैं, तो घरेलू बाजार में भी दाम बढ़ने का दबाव बन सकता है। हालांकि, अभी तक तेल कंपनियों या सरकार की ओर से किसी संभावित बढ़ोतरी के बारे में कोई आधिकारिक जानकारी नहीं दी गई है। युद्ध से पहले कच्चे तेल की कीमत लगभग 70 डॉलर प्रति बैरल थी, लेकिन अब यह 100 डॉलर के करीब पहुंच गई है। ऐसे में आने वाले दिनों में तेल की कीमतों पर नजर रखना आवश्यक होगा।