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क्या भारत में पेट्रोल-डीजल की कीमतें स्थिर रहेंगी? जानें ताजा अपडेट

भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतें स्थिर बनी हुई हैं, जबकि वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव जारी है। प्रमुख तेल विपणन कंपनियों ने हाल ही में नए दाम घोषित किए हैं, जिसमें दिल्ली से लेकर पटना तक कोई बदलाव नहीं हुआ है। जानें कि कैसे अंतरराष्ट्रीय भू-राजनीतिक तनाव और भारत के विविध तेल स्रोतों ने इस स्थिरता को बनाए रखा है।
 

नई दिल्ली में ईंधन की कीमतों में स्थिरता


नई दिल्ली: वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव के बीच भारतीय उपभोक्ताओं के लिए राहत की खबर आई है। प्रमुख तेल विपणन कंपनियों जैसे HPCL, IOCL और भारत पेट्रोलियम ने 10 जुलाई को पेट्रोल और डीजल के नए दाम घोषित किए हैं। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भू-राजनीतिक तनाव के बावजूद, जैसे कि कच्चे तेल की कीमत 76 डॉलर प्रति बैरल के पार जा रही है, घरेलू बाजार में दिल्ली से पटना तक ईंधन की कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया गया है।


अंतरराष्ट्रीय बाजार की स्थिति और भारत पर प्रभाव

ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य में परिचालन संबंधी समस्याओं के कारण कच्चे तेल की कीमतें तेजी से 80 डॉलर प्रति बैरल की ओर बढ़ने लगी थीं। 10 जुलाई को सुबह ब्रेंट क्रूड की कीमत 76.07 डॉलर प्रति बैरल थी, जबकि WTI क्रूड 0.22 प्रतिशत गिरकर 71.86 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा था।


प्रमुख शहरों में ईंधन की कीमतें

देश के प्रमुख शहरों में, दिल्ली में इंडियन ऑयल के पंपों पर पेट्रोल की कीमत 102.12 रुपये और डीजल की कीमत 95.20 रुपये प्रति लीटर पर स्थिर है। मुंबई में पेट्रोल 111.21 रुपये और डीजल 97.83 रुपये प्रति लीटर बिक रहा है। कोलकाता में पेट्रोल 113.51 रुपये और डीजल 99.82 रुपये है, जबकि चेन्नई में पेट्रोल 107.77 रुपये और डीजल 99.55 रुपये प्रति लीटर मिल रहा है।


अन्य राज्यों में ईंधन की कीमतें

अन्य राज्यों में, जयपुर में पेट्रोल 112.66 रुपये और डीजल 97.78 रुपये प्रति लीटर है। पटना में पेट्रोल 112.70 रुपये और डीजल 99.87 रुपये प्रति लीटर पर स्थिर है। उत्तर प्रदेश के लखनऊ में पेट्रोल 102.05 रुपये और अयोध्या में 102.40 रुपये प्रति लीटर है। मध्य प्रदेश के भोपाल में पेट्रोल की कीमत 114.65 रुपये और इंदौर में 114.61 रुपये प्रति लीटर दर्ज की गई है।


सप्लाई पर असर न होने के कारण

केप्लर के सीनियर एनालिस्ट सुमित रितोलिया के अनुसार, वैश्विक तनाव के बावजूद भारत के कच्चे तेल के आयात पर कोई बड़ा असर नहीं पड़ा है। इसका मुख्य कारण यह है कि भारतीय रिफाइनरियों ने पिछले कुछ वर्षों में अपने तेल स्रोतों को विविधता प्रदान की है। वर्तमान में, रूस भारत को कच्चे तेल का सबसे बड़ा आपूर्तिकर्ता बना हुआ है। इसके अलावा, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात से वैकल्पिक रास्तों के जरिए मिलने वाली सप्लाई भारत को सुरक्षा प्रदान कर रही है। पश्चिमी अफ्रीका और लैटिन अमेरिका से आने वाले कच्चे तेल ने रिफाइनरी फीडस्टॉक को और मजबूत किया है।