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क्या भारतीय आईटी कंपनियों को मिलेगी नई दिशा? विनीत नायर का विश्लेषण

HCL टेक्नोलॉजी के पूर्व CEO विनीत नायर ने अमेरिकी ग्रीन कार्ड प्रक्रिया में बदलाव के संदर्भ में भारतीय आईटी कंपनियों के लिए नए अवसरों की संभावना पर चर्चा की है। उनका मानना है कि यदि अमेरिका में भारतीय कर्मचारियों के लिए काम करना कठिन होता है, तो अमेरिकी कंपनियां अपने तकनीकी कार्यों का एक बड़ा हिस्सा भारत में स्थानांतरित कर सकती हैं। नायर ने भारतीय कंपनियों को सलाह दी है कि उन्हें केवल कर्मचारियों की संख्या बढ़ाने पर ध्यान नहीं देना चाहिए, बल्कि महत्वपूर्ण कार्यों की जिम्मेदारी भी लेनी चाहिए। जानें, कैसे AI और तकनीकी बदलाव भारतीय आईटी क्षेत्र को प्रभावित कर सकते हैं।
 

अमेरिका में ग्रीन कार्ड प्रक्रिया का प्रभाव


नई दिल्ली: अमेरिका में भारतीय तकनीकी कर्मचारियों के लिए ग्रीन कार्ड प्रक्रिया में सख्ती का असर भारत के आईटी क्षेत्र पर पड़ सकता है। HCL टेक्नोलॉजी के पूर्व CEO विनीत नायर का मानना है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नीतियों से भारतीय टेक कंपनियों को अप्रत्याशित अवसर मिल सकते हैं। उनका कहना है कि यदि भारतीय कर्मचारियों के लिए अमेरिका में काम करना कठिन हो जाता है, तो अमेरिकी कंपनियां अपने तकनीकी कार्यों का एक बड़ा हिस्सा भारत में ही करने लगेंगी। नायर ने यह भी बताया कि आने वाले वर्षों में भारतीय आईटी कंपनियों को केवल कर्मचारियों की संख्या बढ़ाने पर ध्यान नहीं देना चाहिए, बल्कि महत्वपूर्ण कार्यों की जिम्मेदारी भी लेनी होगी।


PERM प्रक्रिया पर नज़र

विनीत नायर का यह बयान अमेरिकी श्रम सचिव कीथ सोंडरिंग द्वारा कई प्रमुख आईटी आउटसोर्सिंग कंपनियों को PERM ग्रीन कार्ड प्रक्रिया से निलंबित करने की घोषणा के बाद आया। PERM, यानी प्रोग्राम फॉर इलेक्ट्रॉनिक रिव्यू मैनेजमेंट, अमेरिका में रोजगार आधारित ग्रीन कार्ड प्रक्रिया का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।


सोशल मीडिया पर नायर की प्रतिक्रिया

एक्स पर किया पोस्ट


नायर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि जब उन्होंने कुछ बड़ी तकनीकी कंपनियों को PERM प्रक्रिया के उपयोग से रोकने की खबर पढ़ी, तो उन्हें अधिक चिंता नहीं हुई। उन्होंने बताया कि पिछले साल जारी किए गए 1,17,849 PERM सर्टिफिकेशन में भारतीय आईटी कंपनियों का हिस्सा 1,400 से भी कम था, जो कुल संख्या का 2 प्रतिशत से भी कम है। उनके अनुसार, इस फैसले का प्रभाव पहली नजर में जितना बड़ा लगता है, वास्तव में वह उससे कम हो सकता है। हालांकि, इसके पीछे एक बड़ा बदलाव छिपा है, जो भारतीय आईटी कंपनियों के कार्य करने के तरीके को प्रभावित कर सकता है।


भारतीय प्रतिभाओं का बढ़ता महत्व

अमेरिकी टेक का काम भारत में कैसे बढ़ सकता है?


नायर ने आईटी क्षेत्र में पहले हुए परिवर्तनों का उदाहरण देते हुए बताया कि प्रारंभिक दौर में अमेरिकी ग्राहकों का महत्वपूर्ण कार्य करने के लिए भारतीय इंजीनियरों को अमेरिका भेजा जाता था। बाद में कंपनियों ने समझा कि यह कार्य भारत में भी किया जा सकता है। इसी सोच ने ऑनसाइट-ऑफशोर मॉडल को बढ़ावा दिया।


अब, उनके अनुसार, एक और बदलाव की शुरुआत हो सकती है। यदि अमेरिका भारतीय प्रतिभाओं को अपने यहां बुलाने की प्रक्रिया को कठिन बनाता है, तो तकनीक की मदद से भारत में मौजूद छोटी टीमें भी अधिक जिम्मेदारी ले सकेंगी। इसका परिणाम यह हो सकता है कि अमेरिकी कंपनियां अपने तकनीकी कार्य भारत में अधिक स्थानांतरित करें। हालांकि, नायर का कहना है कि यह अवसर केवल कोडिंग और सॉफ्टवेयर मेंटेनेंस तक सीमित नहीं होना चाहिए। भारतीय कंपनियों को आर्किटेक्चर, प्रोडक्ट इंजीनियरिंग, साइबर सुरक्षा, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), इंडस्ट्री सॉल्यूशन और अपने उत्पादों और बौद्धिक संपदा के विकास पर भी ध्यान देना चाहिए।


काम करने के तरीके में बदलाव की आवश्यकता

भारतीय आईटी कंपनियों को बदलना होगा काम करने का तरीका


नायर ने अमेरिकी ग्राहकों के साथ काम करने वाली भारतीय कंपनियों को सलाह दी कि उन्हें केवल विदेश से मिलने वाले निर्देशों पर निर्भर नहीं रहना चाहिए। भारतीय टीमों को यह तय करने में भी भूमिका निभानी चाहिए कि कौन-सा उत्पाद बनाया जाए और किसी कंपनी की तकनीकी व्यवस्था को कैसे बेहतर किया जा सकता है। उनके अनुसार, भारतीय इंजीनियरों को केवल किसी वैश्विक बैंक के टेक प्लेटफॉर्म को संभालने के बजाय उसके पूरे सिस्टम को नए सिरे से बेहतर बनाने में मदद करनी चाहिए। कंपनियों को केवल कर्मचारियों की सेवाएं देने के बजाय समस्याओं की जिम्मेदारी लेकर उनका समाधान तैयार करना चाहिए।


AI के प्रभाव से बदलती स्थिति

AI के दौर में भारतीय आईटी सेक्टर के सामने नई चुनौती


नायर ने कहा कि पिछले तीन दशकों में भारतीय आईटी उद्योग का कारोबार बढ़ने के साथ रोजगार भी बढ़ता रहा। कंपनियों को अधिक काम मिलने पर अधिक इंजीनियरों की आवश्यकता होती थी। लेकिन AI के आगमन से यह समीकरण बदल सकता है। बेहतर उत्पादकता के कारण कंपनियां कम कर्मचारियों के साथ भी अधिक और जटिल कार्य कर सकेंगी। ऐसे में भविष्य में आईटी कंपनियों की सफलता केवल कर्मचारियों की संख्या पर निर्भर नहीं करेगी। नायर के अनुसार, भारतीय आईटी उद्योग ने पिछले 30 वर्षों में भारतीय प्रतिभाओं की लागत के आधार पर प्रतिस्पर्धा की है, लेकिन आने वाले 30 वर्षों में उसकी असली ताकत कर्मचारियों की क्षमता, तकनीकी कौशल और नए समाधान तैयार करने की योग्यता होगी।