☰
×

क्या भारतीय शेयर बाजार में विदेशी निवेशकों की वापसी का संकेत है?

अक्टूबर में भारतीय शेयर बाजार में विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों की गतिविधियों ने महत्वपूर्ण बदलाव लाए। जहां पहले दो महीनों में भारी बिकवाली हुई, वहीं अंतिम सप्ताह में 6,300 करोड़ रुपये का निवेश हुआ। जानें इस बदलाव के पीछे के कारण, जैसे कच्चे तेल की कीमतें और वैश्विक ब्याज दरें, और भविष्य में बाजार की दिशा पर क्या प्रभाव पड़ सकता है। क्या यह निवेशकों के लिए एक सकारात्मक संकेत है? पूरी जानकारी के लिए पढ़ें।
 

अक्टूबर में विदेशी निवेशकों की गतिविधियाँ


भारतीय शेयर बाजार में विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों की गतिविधियों ने अक्टूबर में बाजार की दिशा पर महत्वपूर्ण प्रभाव डाला। पूरे महीने के आंकड़ों के अनुसार, विदेशी निवेशकों ने भारतीय शेयरों से कुल 34,843 करोड़ रुपये की निकासी की। इससे पहले सितंबर में भी लगभग 35,861 करोड़ रुपये की निकासी हुई थी। लगातार दो महीनों तक इतनी बड़ी बिकवाली ने बाजार के निवेश माहौल पर दबाव बनाए रखा। हालांकि, अक्टूबर के अंतिम कारोबारी सप्ताह में स्थिति में कुछ बदलाव देखने को मिला।


अक्टूबर के अंतिम सप्ताह में निवेश में बदलाव

26 से 30 अक्टूबर के बीच, विदेशी निवेशकों ने भारतीय शेयरों में लगभग 6,300 करोड़ रुपये का निवेश किया। इस खरीदारी ने बाजार में सकारात्मक हलचल पैदा की और निफ्टी को फिर से 23,000 अंकों के स्तर तक पहुंचने में मदद की।


सालभर में निकासी का आंकड़ा

सेंट्रल डिपॉजिटरी सर्विसेज लिमिटेड के आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2026 में अब तक विदेशी निवेशकों ने भारतीय शेयर बाजार से कुल 2.95 लाख करोड़ रुपये की निकासी की है। यह आंकड़ा विदेशी पूंजी के उतार-चढ़ाव को दर्शाता है। दिलचस्प बात यह है कि साल के मध्य में ये निवेशक भारतीय बाजार में काफी सक्रिय थे। जुलाई में उन्होंने लगभग 20,200 करोड़ रुपये का निवेश किया, जबकि अगस्त में यह आंकड़ा बढ़कर करीब 29,631 करोड़ रुपये तक पहुंच गया। लेकिन सितंबर से उनकी रणनीति में बदलाव आया और लगातार दो महीनों तक बिकवाली का दबाव बना रहा।


कच्चे तेल और ब्याज दरों का प्रभाव

विशेषज्ञों के अनुसार, विदेशी निवेशकों की निकासी के पीछे कई अंतरराष्ट्रीय और घरेलू कारण हैं। मीरा मनी के सह-संस्थापक आनंद के राठी ने कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों, वैश्विक ब्याज दरों में वृद्धि और कंपनियों की कमाई में अनिश्चितता को मुख्य कारण बताया। तेल की कीमतों में वृद्धि से भारत का आयात खर्च और महंगाई बढ़ने की संभावना रहती है, जो कंपनियों के मुनाफे को प्रभावित कर सकता है। दूसरी ओर, अमेरिका में बॉंड यील्ड के आकर्षक होने से विदेशी निवेशकों को वहां सुरक्षित निवेश के अवसर दिखाई दे रहे हैं। इस दौरान, घरेलू संस्थागत निवेशकों की खरीदारी ने भारतीय बाजार को बड़ी गिरावट से बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।


फार्मा और हेल्थकेयर में रुचि

अक्टूबर के अंत में, विदेशी निवेशकों की पसंद में बदलाव देखा गया। बाजार विशेषज्ञ वीके विजयकुमार के अनुसार, उन्होंने बड़े वित्तीय संस्थानों के शेयरों से दूरी बनाई और फार्मा तथा हेल्थकेयर क्षेत्र की कुछ कंपनियों में निवेश किया। कुछ डिजिटल प्लेटफॉर्म कंपनियों के शेयर भी उनकी खरीदारी का हिस्सा बने। अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों को स्थिर रखने के निर्णय और भारतीय बड़ी कंपनियों के शेयरों के अपेक्षाकृत आकर्षक मूल्यांकन ने निवेशकों की धारणा को सुधारने में मदद की।


भविष्य में बाजार की दिशा

आने वाले समय में कच्चे तेल की कीमतें, अमेरिकी चुनाव, अमेरिका-ईरान के बीच तनाव और रूस-यूक्रेन संघर्ष जैसे मुद्दे बाजार को प्रभावित कर सकते हैं। भारतीय कंपनियों के तिमाही नतीजों पर भी निवेशकों की नजर रहेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि अंतिम सप्ताह की खरीदारी राहत देने वाली है, लेकिन इससे यह निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी कि विदेशी निवेशकों की बिकवाली पूरी तरह समाप्त हो गई है।