×

क्या सोने और चांदी की कीमतों में गिरावट का कारण है भू-राजनीतिक तनाव?

सोने और चांदी की कीमतों में हालिया गिरावट ने बाजार को चौंका दिया है। मीडिल ईस्ट में बढ़ते संघर्ष के बीच, निवेशक मुनाफावसूली कर रहे हैं, जबकि कच्चे तेल की कीमतें रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई हैं। जानें कि कैसे मजबूत डॉलर और बढ़ती बॉंड यील्ड ने कीमती धातुओं पर दबाव डाला है। क्या यह गिरावट अल्पकालिक है? इस लेख में हम इन सभी पहलुओं का विश्लेषण करेंगे।
 

सोने और चांदी की कीमतों में गिरावट


नई दिल्ली: आमतौर पर भू-राजनीतिक तनाव के समय सोना और चांदी सुरक्षित निवेश के विकल्प माने जाते हैं, लेकिन इस बार मीडिल ईस्ट में बढ़ते संघर्ष के बीच, सोमवार, 9 मार्च को वैश्विक बाजार में इन कीमती धातुओं की कीमतों में उल्लेखनीय गिरावट आई है। कॉमेक्स पर सोने की कीमत लगभग 1.3% गिरकर 5,090 डॉलर प्रति औंस के आसपास पहुंच गई, जबकि चांदी में 4% से अधिक की कमी आई। कच्चे तेल की कीमतें युद्ध की छाया में रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच रही हैं, फिर भी सोने और चांदी पर उलटा दबाव बना हुआ है, जिससे बाजार के विशेषज्ञ हैरान हैं।


मुनाफावसूली का प्रभाव

विशेषज्ञों का मानना है कि यह गिरावट पिछले महीनों में हुई तेजी के बाद मुनाफावसूली, मजबूत डॉलर और बढ़ती बॉंड यील्ड के संयुक्त प्रभाव का परिणाम है। निवेशक युद्ध की अनिश्चितता के बीच तरलता बनाए रखने के लिए सोने के स्टॉक बेच रहे हैं।


मुनाफा सुरक्षित करने की प्रक्रिया

रिपोर्टों के अनुसार, कीमती धातुओं में आई इस गिरावट का मुख्य कारण निवेशकों द्वारा मुनाफा सुरक्षित करना है। पिछले कुछ महीनों में सोने ने शानदार रिटर्न दिया था, जिसके बाद अब निवेशक अपने मुनाफे को सुरक्षित करने में जुटे हैं। शेयर बाजार में गिरावट के कारण पोर्टफोलियो के नुकसान की भरपाई के लिए भी सोने के हिस्से को बेचा जा रहा है। वर्तमान में, सोने की कीमतों पर मध्य पूर्व की स्थिति का सबसे अधिक प्रभाव देखा जा रहा है, जिससे बाजार में उतार-चढ़ाव बढ़ गया है।


कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि

हालांकि सोने और चांदी की कीमतें गिर रही हैं, कच्चे तेल की कीमतें आसमान छू रही हैं। ब्रेंट क्रूड का भाव 17% की वृद्धि के साथ 108 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया, जो महामारी के बाद की सबसे बड़ी एक दिवसीय बढ़ोतरी है। वहीं, डब्ल्यूटीआई क्रूड भी 107 डॉलर के करीब ट्रेड कर रहा है। यह उछाल होर्मुज स्ट्रेट से तेल आपूर्ति बाधित होने की आशंका के कारण है।


महंगाई और ब्याज दरों पर प्रभाव

बढ़ते तेल दाम वैश्विक महंगाई को और बढ़ा रहे हैं, जिससे केंद्रीय बैंकों के सामने ब्याज दरों को लेकर नई चुनौतियां खड़ी हो गई हैं। अमेरिकी फेडरल रिजर्व के लिए ब्याज दरों में कटौती का रास्ता और जटिल हो सकता है।


डॉलर और बॉंड यील्ड का दबाव

कीमती धातुओं पर दबाव का एक प्रमुख कारण अमेरिकी डॉलर की मजबूती और ट्रेजरी यील्ड में वृद्धि है। बाजार की अनिश्चितता में निवेशक नकदी के लिए डॉलर की ओर रुख कर रहे हैं। बढ़ती महंगाई के चलते अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड भी ऊपर गई है। मजबूत डॉलर के कारण अन्य मुद्राओं वाले देशों के लिए सोना खरीदना महंगा पड़ रहा है, जिससे मांग में कमी आई है।


युद्ध का बाजार पर प्रभाव

विश्लेषकों का कहना है कि सोने की कीमतों में यह उतार-चढ़ाव किसी बुनियादी बदलाव के कारण नहीं, बल्कि युद्ध से उत्पन्न अल्पकालिक अस्थिरता के कारण हो रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि एक बार भू-राजनीतिक तनाव कम होने के बाद, अमेरिकी ब्याज दरों और डॉलर की दिशा जैसे पारंपरिक कारक ही सोने और चांदी की कीमतों को निर्धारित करेंगे। वर्तमान में, निवेशक सुरक्षित निवेश और बाजार की तरलता की आवश्यकता के बीच उलझे हुए हैं।