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क्रेडिट कार्ड और व्यक्तिगत ऋण में चूक की दर में वृद्धि: आरबीआई रिपोर्ट

भारतीय रिजर्व बैंक की हालिया रिपोर्ट में बताया गया है कि क्रेडिट कार्ड और व्यक्तिगत ऋण जैसे असुरक्षित कर्जों में चूक की दर में वृद्धि हो रही है। निजी बैंकों में इस प्रकार के कर्जों पर दबाव अधिक है, जबकि फिनटेक कंपनियों की भूमिका भी महत्वपूर्ण है। रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि बिना गारंटी वाले कर्जों में चूक के मामले बढ़ रहे हैं, जो कुल खुदरा कर्ज चूक का 53.1 प्रतिशत हैं। जानें इस स्थिति के पीछे के कारण और इसके संभावित प्रभाव।
 

आरबीआई की नई रिपोर्ट में चूक की स्थिति

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने बुधवार को जानकारी दी कि क्रेडिट कार्ड और व्यक्तिगत ऋण जैसे असुरक्षित कर्जों के पुनर्भुगतान में चूक अब कुल खुदरा कर्ज चूक का आधा से अधिक हो चुकी है।


आरबीआई की छमाही वित्तीय स्थिरता रिपोर्ट में बताया गया है कि निजी क्षेत्र के बैंकों में असुरक्षित कर्जों पर दबाव सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों की तुलना में अधिक है।


हालांकि, बिना गारंटी वाले खुदरा कर्ज का सकल गैर-निष्पादित परिसंपत्ति (एनपीए) अनुपात 1.8 प्रतिशत पर स्थिर है, जो कुल खुदरा कर्जों के 1.1 प्रतिशत एनपीए अनुपात के मुकाबले बेहतर स्थिति में है।


रिपोर्ट के अनुसार, असुरक्षित खुदरा कर्जों में चूक के मामले अनुसूचित वाणिज्यिक बैंकों के कुल खुदरा कर्ज चूक का 53.1 प्रतिशत हैं। इस मामले में निजी बैंकों की हिस्सेदारी सबसे अधिक रही है।


आरबीआई ने बताया कि निजी बैंकों के कुल कर्ज भुगतान चूक में 76 प्रतिशत हिस्सा बिना गारंटी वाले कर्ज का है, जबकि सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में यह आंकड़ा केवल 15.9 प्रतिशत है।


केंद्रीय बैंक ने फिनटेक कंपनियों की भूमिका पर भी प्रकाश डाला, यह बताते हुए कि जिन उधारकर्ताओं ने पांच या अधिक संस्थानों से बिना गारंटी वाले कर्ज लिए हैं, उनमें चुकौती में कमी अधिक देखी गई है।


रिपोर्ट में कहा गया है कि फिनटेक कंपनियों के कर्ज पोर्टफोलियो में 70 प्रतिशत से अधिक हिस्सा बिना गारंटी वाले कर्ज का है, और इनमें से आधे से अधिक कर्ज 35 वर्ष से कम उम्र के उधारकर्ताओं को दिए गए हैं।


सितंबर 2024 से सितंबर 2025 के बीच फिनटेक कंपनियों के कर्ज में 36.1 प्रतिशत की वृद्धि हुई, जिसमें व्यक्तिगत कर्ज का हिस्सा सबसे अधिक रहा। आरबीआई ने कहा कि बैंकों के स्तर पर बिना गारंटी वाले खुदरा कर्ज में वृद्धि के संकेत फिर से दिखने लगे हैं, जबकि बड़ी कंपनियों को दिए जाने वाले कर्ज में सुस्ती बनी हुई है।