खनिज संसाधनों की खोज में तेजी लाने के लिए नीति आयोग के सुझाव
खनिज संसाधनों की खोज में सुधार के उपाय
नीति आयोग ने बुधवार को यह बताया कि सरकार को खनिज संसाधनों की खोज को तेज करने के लिए भू-वैज्ञानिक डेटा तक पहुंच को सरल बनाना चाहिए। इसके अलावा, छोटी खोज कंपनियों के लिए जोखिम पूंजी और वित्तीय सहायता प्रदान करने के साथ-साथ निजी क्षेत्र की भागीदारी को बढ़ावा देने के उपायों की आवश्यकता है। आयोग ने अपनी तिमाही व्यापार रिपोर्ट में यह सुझाव दिया कि अनुपालन रिपोर्ट की वैधता अवधि को बढ़ाना चाहिए, मंजूरी की प्रक्रियाओं को कम करना चाहिए, और वन भूमि के उपयोग के बाद पुनर्वनीकरण की प्रक्रियाओं को सरल बनाना चाहिए। इससे परियोजनाओं में देरी को कम करने में मदद मिलेगी।
औद्योगिक क्षेत्र और नवीकरणीय ऊर्जा के लिए सिफारिशें
आयोग ने पुराने औद्योगिक क्षेत्रों के विस्तार से संबंधित परियोजनाओं के लिए स्पष्ट नियम बनाने का भी सुझाव दिया है। रिपोर्ट में नवीकरणीय ऊर्जा के लिए नियमों में एकरूपता लाने, औद्योगिक उपभोक्ताओं के लिए बैंकिंग सीमा बढ़ाने, और बिजली पारेषण शुल्क को तर्कसंगत बनाने की सिफारिश की गई है। इसके साथ ही, खनिजों के परिवहन के लिए पाइपलाइन परियोजनाओं को तेजी से मंजूरी देने और लॉजिस्टिक सुविधाओं पर जीएसटी से संबंधित मुद्दों को हल करने की बात भी की गई है।
विमानन क्षेत्र में घरेलू उत्पादन की आवश्यकता
नीति आयोग ने विमानन क्षेत्र के लिए उच्च गुणवत्ता वाले मिश्र धातु इस्पात, विशेष मिश्र धातु, एल्युमीनियम और टाइटेनियम मिश्र धातुओं का घरेलू उत्पादन बढ़ाने की आवश्यकता पर जोर दिया है। इसके साथ ही, घरेलू सामग्री के उपयोग की अनिवार्यता को चरणबद्ध तरीके से लागू करने और विमान उद्योग की आपूर्ति श्रृंखला में भारतीय कंपनियों की भागीदारी को बढ़ाने का सुझाव दिया गया है। आयोग ने यूरोपीय संघ की कार्बन सीमा समायोजन व्यवस्था के तहत सत्यापन क्षमता को बढ़ाने और निर्यातकों को रिपोर्टिंग आवश्यकताओं को पूरा करने में मदद करने की सिफारिश की है।
वैश्विक धातु मांग और भारत की स्थिति
वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही की रिपोर्ट के अनुसार, वैश्विक धातु की मांग 1.63 लाख करोड़ डॉलर रही, जिसमें भारत का निर्यात 34.8 अरब डॉलर था, जो वैश्विक मांग का 2.1 प्रतिशत है। लौह एवं इस्पात (उनसे बनी वस्तुओं समेत) वैश्विक धातु मांग का 50.9 प्रतिशत यानी 826.8 अरब डॉलर रहा।
भारत की आत्मनिर्भरता का आंकड़ा
भारत इस मांग का केवल 2.5 प्रतिशत पूरा करता है। प्राथमिक एल्युमीनियम और इस्पात उत्पादन में भारत विश्व में दूसरे स्थान पर है, जबकि लौह अयस्क, क्रोमाइट और जस्ता उत्पादन में तीसरे और मैंगनीज अयस्क उत्पादन में पांचवे स्थान पर है। रिपोर्ट के अनुसार, भारत प्रमुख थोक खनिजों के मामले में काफी हद तक आत्मनिर्भर है।
खनिजों में आत्मनिर्भरता के आंकड़े
लौह अयस्क में आत्मनिर्भरता 100 प्रतिशत, जस्ता में 94 प्रतिशत, क्रोमाइट में 92 प्रतिशत और बॉक्साइट में 90 प्रतिशत है। वहीं, मैंगनीज अयस्क में यह 37 प्रतिशत, तांबे में 35 प्रतिशत और मैग्नेसाइट में 17 प्रतिशत है।