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खाने के तेल के पैकेट के साइज तय, उपभोक्ताओं को मिलेगी सुविधा

उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय ने खाने के तेल के पैकेट और बोतलों के आकार को निर्धारित किया है, जिससे उपभोक्ताओं को विभिन्न ब्रांडों की कीमतों की तुलना करने में आसानी होगी। नए नियमों के तहत, प्रमुख कुकिंग ऑयल केवल 9 निश्चित आकारों में उपलब्ध होंगे। इसके अलावा, कंपनियों को तेल की मात्रा के साथ उसका वजन भी स्पष्ट रूप से दर्शाना होगा। छोटे पैकेटों को इस नियम से छूट दी गई है, और कंपनियों को नए नियमों के अनुसार ढलने के लिए 3 महीने का समय दिया गया है।
 

खाने के तेल के पैकेट के साइज में बदलाव


उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय ने ग्राहकों के हित में एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। अब बाजार में उपलब्ध खाने के तेल के पैकेट और बोतलों के आकार को निर्धारित किया गया है, जिससे लोग विभिन्न ब्रांडों के तेल की कीमतों की तुलना कर सकें और सही विकल्प चुन सकें। यह नया नियम लीगल मेट्रोलॉजी फ्रेमवर्क के अंतर्गत लागू होगा और यह देश में उत्पादित तथा आयातित दोनों प्रकार के तेलों पर लागू होगा।


खाने के तेल के लिए निर्धारित साइज

नए दिशा-निर्देशों के अनुसार, सरसों, सूरजमुखी, सोयाबीन, पाम ऑयल, मूंगफली, तिल, राइस ब्रान, कॉटनसीड, कॉर्न और ब्लेंडेड ऑयल जैसे सभी प्रमुख कुकिंग ऑयल अब केवल निम्नलिखित 9 आकारों में बेचे जाएंगे:


200 मिलीलीटर/ग्राम


500 मिलीलीटर/ग्राम


1 लीटर/किलोग्राम


2 लीटर/किलोग्राम


3 लीटर/किलोग्राम


4 लीटर/किलोग्राम


5 लीटर/किलोग्राम


15 लीटर/किलोग्राम


20 लीटर/किलोग्राम


वजन की जानकारी देना अनिवार्य

नए नियमों के तहत एक और महत्वपूर्ण बदलाव किया गया है। यदि किसी तेल के पैकेट पर मात्रा लीटर या मिलीलीटर में दर्शाई गई है, तो कंपनी को उसके साथ उसका वजन किलोग्राम या ग्राम में भी स्पष्ट रूप से लिखना होगा। यह जानकारी लीगल मेट्रोलॉजी नियम 2011 के अनुसार प्रदान की जानी चाहिए।


छोटे पैकेटों को मिली छूट

सरकार ने छोटे उपभोक्ताओं की जरूरतों का ध्यान रखते हुए 200 मिलीलीटर या 200 ग्राम से छोटे पैकेटों को इस नियम से बाहर रखा है। इसके अलावा, कुछ कम उपयोग होने वाले छोटे तेलों को भी इस दायरे से छूट दी गई है, ताकि बाजार में कम कीमत वाले छोटे पैकेट के विकल्प उपलब्ध रहें।


कंपनियों को समय दिया गया

सरकार ने तेल उत्पादन, आयात और पैकेजिंग करने वाली कंपनियों को नए नियमों के अनुसार ढलने के लिए 3 महीने का समय दिया है। हालांकि, जो कंपनियां चाहें, वे इस नियम को तुरंत लागू कर सकती हैं। यह निर्णय तेल उद्योग से जुड़े प्रमुख संगठनों के साथ चर्चा के बाद लिया गया है। उद्योग जगत ने भी इस कदम का स्वागत किया है। अधिकारियों का मानना है कि इस निर्णय से बाजार में विभिन्न आकार के पैकेटों से होने वाली उलझन समाप्त होगी, जिससे ग्राहकों के लिए खरीदारी आसान होगी और कंपनियों के बीच प्रतिस्पर्धा भी बढ़ेगी।