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खुदरा मुद्रास्फीति में वृद्धि: प्याज और खाद्य वस्तुओं की कीमतों का असर

सितंबर में खुदरा मुद्रास्फीति 5.54 प्रतिशत तक पहुंच गई, जो खाद्य वस्तुओं की कीमतों में वृद्धि के कारण है। प्याज, अदरक और लहसुन जैसी वस्तुओं की कीमतों में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। हालांकि, आलू और टमाटर जैसी कुछ वस्तुओं की कीमतों में गिरावट आई है। आरबीआई ने ब्याज दरों में वृद्धि की है और भविष्य में मुद्रास्फीति के बढ़ने की संभावना जताई है। जानें इस विषय पर और क्या कहा गया है विशेषज्ञों द्वारा।
 

खुदरा मुद्रास्फीति में वृद्धि

सितंबर में प्याज और अन्य खाद्य सामग्रियों की कीमतों में वृद्धि के चलते खुदरा मुद्रास्फीति 5.54 प्रतिशत तक पहुंच गई है। यह आंकड़ा भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) द्वारा निर्धारित संतोषजनक सीमा के भीतर है, जैसा कि सोमवार को जारी सरकारी आंकड़ों में बताया गया।


खाद्य मुद्रास्फीति का आंकड़ा

उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) के अनुसार, अगस्त में खुदरा मुद्रास्फीति 4.83 प्रतिशत थी। राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (एनएसओ) के अनुसार, खाद्य मुद्रास्फीति सितंबर में बढ़कर 7.74 प्रतिशत हो गई, जो अगस्त में 5.97 प्रतिशत थी। प्याज (108.09 प्रतिशत), चांदी के आभूषण (87.8 प्रतिशत), अदरक (62.85 प्रतिशत), लहसुन (54.62 प्रतिशत) और नींबू (36.41 प्रतिशत) जैसी वस्तुओं की कीमतों में सबसे अधिक वृद्धि हुई।


कुछ वस्तुओं की कीमतों में गिरावट

इसके विपरीत, आलू, टमाटर, मोटर कार, जीप, भिंडी और नारियल की कीमतों में कमी आई है। सितंबर में ग्रामीण क्षेत्रों में खुदरा मुद्रास्फीति 6.08 प्रतिशत और शहरी क्षेत्रों में 4.88 प्रतिशत रही।


आरबीआई की नीतियां

जनवरी 2024 को आधार वर्ष मानकर नई श्रृंखला शुरू होने के बाद, सितंबर में खुदरा मुद्रास्फीति अपने उच्चतम स्तर पर पहुंच गई। पिछले सप्ताह, आरबीआई ने अपनी प्रमुख नीतिगत दर रेपो में 0.25 प्रतिशत की वृद्धि की, जिससे यह 5.50 प्रतिशत हो गई। यह चार वर्षों में पहली बार है कि दरों में वृद्धि की गई है।


भविष्य की मुद्रास्फीति की संभावनाएं

केंद्रीय बैंक ने संकेत दिया है कि निकट भविष्य में ब्याज दरों में कटौती की संभावना नहीं है। बढ़ती मुद्रास्फीति, रुपये की कमजोरी और कच्चे तेल की ऊंची कीमतों के बीच दरों में और वृद्धि की जा सकती है। आरबीआई ने चालू वित्त वर्ष के लिए खुदरा मुद्रास्फीति का अनुमान 5 प्रतिशत से बढ़ाकर 5.2 प्रतिशत कर दिया है।


राज्यों में मुद्रास्फीति का स्तर

एनएसओ के आंकड़ों के अनुसार, तमिलनाडु, ओडिशा, मध्य प्रदेश, तेलंगाना और आंध्र प्रदेश में मुद्रास्फीति सबसे अधिक रही, जबकि मिजोरम में यह सबसे कम थी।


विशेषज्ञों की राय

क्रिसिल की वरिष्ठ निदेशक दीप्ति देशपांडे ने कहा कि कम बारिश के कारण कृषि उत्पादन प्रभावित होने से खाद्य मुद्रास्फीति ऊंची बनी रह सकती है। उन्होंने यह भी बताया कि अन्य क्षेत्रों में भी कीमतों में बढ़ोतरी का दबाव बढ़ रहा है।


भविष्यवाणियाँ

एमके ग्लोबल फाइनेंशियल सर्विसेज की मुख्य अर्थशास्त्री माधवी अरोड़ा ने अनुमान लगाया है कि वित्त वर्ष 2026-27 की तीसरी तिमाही में मुद्रास्फीति औसतन 6.1 प्रतिशत रह सकती है।


आंकड़ों का संग्रहण

एनएसओ ने बताया कि वह सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के 1,407 चुनिंदा शहरी बाजारों और 1,465 गांवों से साप्ताहिक आधार पर वास्तविक समय में कीमतों के आंकड़े एकत्र करता है।