गिग वर्कर्स के लिए नए सामाजिक सुरक्षा नियम: क्या बदलने वाला है?
केंद्र सरकार ने गिग वर्कर्स के लिए नए सामाजिक सुरक्षा नियमों की घोषणा की है, जो ऑनलाइन डिलीवरी और ऐप आधारित सेवाओं से जुड़े कर्मचारियों को प्रभावित करेंगे। इन नियमों के तहत कर्मचारियों को कुछ विशेष शर्तें पूरी करनी होंगी, जैसे कि साल में निर्धारित दिनों तक काम करना। इसके अलावा, कंपनियों की जिम्मेदारियाँ भी बढ़ाई गई हैं। जानें इन नए नियमों का क्या असर होगा और कैसे ये गिग अर्थव्यवस्था को प्रभावित कर सकते हैं।
May 11, 2026, 21:18 IST
गिग वर्कर्स के लिए नए नियमों की घोषणा
केंद्र सरकार ने ऑनलाइन डिलीवरी और ऐप आधारित सेवाओं से जुड़े लाखों कर्मचारियों के लिए नए काम करने के नियमों की रूपरेखा तैयार की है। सामाजिक सुरक्षा संहिता के तहत गिग और प्लेटफॉर्म वर्कर्स को मिलने वाले लाभों के लिए ये नियम लागू होंगे। स्विगी, जोमैटो, ओला, उबर और रेपिडो जैसे प्लेटफॉर्म से जुड़े कर्मचारियों को कुछ विशेष शर्तें पूरी करनी होंगी, ताकि वे बीमा और अन्य सामाजिक सुरक्षा सुविधाओं का लाभ उठा सकें।
गिग वर्कर्स के लिए सामाजिक सुरक्षा का उद्देश्य
सरकार का मुख्य उद्देश्य गिग वर्कर्स को एक संगठित सामाजिक सुरक्षा प्रणाली से जोड़ना है। हालांकि, ये नए नियम उन लोगों के लिए चुनौतीपूर्ण हो सकते हैं, जो केवल अतिरिक्त आय या पार्ट टाइम काम के लिए इन प्लेटफॉर्म से जुड़े हैं।
काम के दिनों की आवश्यकताएँ
एक रिपोर्ट के अनुसार, यदि कोई कर्मचारी केवल एक प्लेटफॉर्म से जुड़ा है, जैसे जोमैटो या ओला, तो उसे साल में कम से कम 90 दिन काम करना होगा। वहीं, यदि कोई व्यक्ति एक से अधिक प्लेटफॉर्म पर काम करता है, तो उसे साल में कम से कम 120 दिन काम करना अनिवार्य होगा।
कार्य दिवसों की गणना
सरकार ने कार्य दिवसों की गणना के लिए स्पष्ट नियम भी बनाए हैं। यदि कोई गिग वर्कर एक ही दिन में तीन अलग-अलग कंपनियों के लिए काम करता है, तो उस दिन को तीन कार्य दिवसों के रूप में गिना जाएगा। इससे कई प्लेटफॉर्म पर सक्रिय कर्मचारियों को राहत मिल सकती है।
कंपनियों की जिम्मेदारियाँ
नए नियमों के तहत कंपनियों की जिम्मेदारियाँ भी निर्धारित की गई हैं। सभी कंपनियों को अपने गिग वर्कर्स का पूरा विवरण 45 दिनों के भीतर केंद्र सरकार के पोर्टल पर अपलोड करना होगा। इसके अलावा, नए कर्मचारियों की भर्ती और काम छोड़ने वालों की जानकारी भी रियल टाइम या दैनिक आधार पर अपडेट करनी होगी।
विशेष पहचान पत्र और जुर्माना
सरकार के अनुसार, प्रत्येक योग्य कर्मचारी को एक विशेष पहचान पत्र जारी किया जाएगा, जिससे उसकी सामाजिक सुरक्षा योजनाओं में पहचान सुनिश्चित की जा सके। यदि कोई कंपनी सामाजिक सुरक्षा फंड में योगदान नहीं करती है, तो उस पर 12 प्रतिशत वार्षिक ब्याज के हिसाब से जुर्माना लगाया जाएगा।
उम्र सीमा और पात्रता
नियमों में उम्र सीमा भी निर्धारित की गई है। 60 वर्ष की आयु पूरी करने के बाद गिग वर्कर्स को हेल्थ इंश्योरेंस, लाइफ इंश्योरेंस और एक्सीडेंट इंश्योरेंस जैसे लाभ नहीं मिलेंगे। इसके अलावा, यदि किसी कर्मचारी ने पिछले वित्त वर्ष में न्यूनतम कार्य दिवस पूरे नहीं किए, तो उसकी पात्रता स्वतः समाप्त हो जाएगी।
गिग अर्थव्यवस्था का विकास
पिछले कुछ वर्षों में भारत में गिग अर्थव्यवस्था तेजी से बढ़ी है। लाखों युवा और पार्ट टाइम कर्मचारी ऑनलाइन टैक्सी, फूड डिलीवरी और अन्य ऐप आधारित सेवाओं के जरिए रोजगार प्राप्त कर रहे हैं। ऐसे में सरकार के ये नए नियम इस क्षेत्र की कार्यप्रणाली को प्रभावित कर सकते हैं।
राज्यों के लिए मार्गदर्शक नियम
केंद्र सरकार ने स्पष्ट किया है कि ये नियम राज्यों के लिए मार्गदर्शक के रूप में कार्य करेंगे। इसका मतलब है कि राज्य सरकारें भी इन्हीं नियमों के आधार पर अपने सामाजिक सुरक्षा कानून और व्यवस्थाएं लागू कर सकेंगी।