घरेलू एलपीजी गैस सिलेंडर की कीमतों में वृद्धि: जानें क्या है नया
एलपीजी गैस सिलेंडर की कीमतों में बढ़ोतरी
घरेलू एलपीजी गैस सिलेंडर की कीमतों में 29 रुपये की वृद्धि हुई है। यह पिछले तीन महीनों में रसोई गैस की कीमतों में दूसरी बार वृद्धि है। हालांकि, सरकार का कहना है कि भारत में रसोई गैस की कीमतें अन्य देशों की तुलना में अभी भी सबसे कम हैं।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में ऊर्जा की लागत
PIB द्वारा जारी एक प्रेस विज्ञप्ति में बताया गया है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में ऊर्जा की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं। इसके बावजूद, भारत सरकार आम उपभोक्ताओं को अन्य देशों की तुलना में काफी कम दरों पर गैस उपलब्ध करा रही है। सरकार और तेल कंपनियां इस बढ़ती लागत का एक बड़ा हिस्सा अपने ऊपर ले रही हैं, ताकि भारतीय परिवारों पर इसका पूरा बोझ न पड़े।
उज्ज्वला योजना के तहत सब्सिडी
प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना से जुड़े परिवारों को सरकार द्वारा अतिरिक्त राहत दी जा रही है। उदाहरण के लिए, दिल्ली में सामान्य उपभोक्ता को 14.2 किलोग्राम का सिलेंडर 942 रुपये में मिलता है, जबकि उज्ज्वला योजना के लाभार्थियों को DBT के माध्यम से हर सिलेंडर पर 300 रुपये की सब्सिडी मिलती है।
सरकार और तेल कंपनियों का बोझ
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, वर्तमान में एक घरेलू सिलेंडर की सप्लाई लागत 1,600 रुपये से अधिक हो चुकी है। फिर भी, सामान्य ग्राहकों को यह सिलेंडर केवल 942 रुपये में मिल रहा है। इसका मतलब है कि हर सिलेंडर पर लगभग 700 रुपये का घाटा सरकार और तेल कंपनियां खुद उठा रही हैं।
अंतरराष्ट्रीय बाजार का प्रभाव
भारत में पेट्रोल, डीजल और गैस की कीमतें अंतरराष्ट्रीय बाजार के अनुसार निर्धारित होती हैं, क्योंकि भारत अपनी आवश्यकताओं के लिए अधिकांश एलपीजी आयात करता है। गैस की कीमत मुख्य रूप से सऊदी अरामको के 'सऊदी कॉन्ट्रैक्ट प्राइस' पर निर्भर करती है।
पश्चिम एशिया संकट का प्रभाव
पश्चिम एशिया में चल रहे तनाव और समुद्री रास्तों में रुकावट के कारण वैश्विक स्तर पर एलपीजी की कीमतें बढ़ गई हैं। फरवरी में एलपीजी का सऊदी बेंचमार्क रेट लगभग 543 डॉलर प्रति टन था, जो संकट के बाद तेजी से बढ़कर अप्रैल में 775 डॉलर और जून में 790 डॉलर प्रति टन तक पहुंच गया।
भारत में गैस की कीमतें
सरकार का कहना है कि पश्चिम एशिया में संकट के बावजूद भारत ने ईंधन और गैस की सप्लाई को बनाए रखा है। सरकार का दावा है कि भारत में घरेलू रसोई गैस की कीमतें न केवल पड़ोसी देशों से कम हैं, बल्कि अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और कनाडा जैसे विकसित देशों की तुलना में भी सस्ती हैं।